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उत्तराखण्ड में महात्मा गांधी की यादें, बाल वनिता आश्रम का किया था उद्घाटन


स्वतंत्रता आंदोलन में सबको राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन को सारा देश बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाता है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बापू कई बार उत्तराखंड आए थे. वहीं उन्होंने देहरादून के श्री श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम का उद्घाटन किया था, जहां आज कई बच्चे रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं. इस आश्रम में रहने वाली दीप्ति का कहना है कि यहां हर सब्जेक्ट्स की पढ़ाई करवाई जाती है. उन्हें स्कूल भेजा जाता है और शाम को ट्यूशन पढ़ाया जाता है. उनका कहना है कि वह बड़े होकर भारतीय सेना में जाना चाहती है. आश्रम में रहने वाले दीपांशु ने कहा कि वह भी बड़े होकर सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं.वहीं एंजल ने बताया कि इस आश्रम में उन्हें पढ़ाया जाता है और शाम को हवन भी किया जाता है.आश्रम के प्रधान सुधीर गुलाटी ने जानकारी देते हुए कहा कि श्री श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम का उद्घाटन करने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 16 अक्टूबर 1926 को देहरादून आए थे.साल 1920 के दशक में बेसहारा-अनाथ बच्चों के लिए आर्य समाज ने उनको सहारा देने की पहल की थी. फरवरी 1924 में आर्य समाज धमावाला के सदस्यों ने बैठक में यह फैसला लिया कि अनाथ बच्चों और युवतियों को सहारा देने के लिए एक अनाथालय की स्थापना की जाएगी. इसके बाद दो बच्चों के साथ धमावाला में एक अनाथालय खोला गया, जिसे आर्य अनाथालय कहा गया. बाद में इसे तिलक रोड पर लाया गया. सुधीर गुलाटी ने बताया कि शहर के रईस सेठ मुकुंद हरिहर लाल ने करीब 4.5 बीघा जमीन दान में दी थी. इसके बाद यहां आश्रम बनाया गया, जिसका नाम स्वामी श्रद्धानंद के नाम पर श्री श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम रखा गया. यह आश्रम महात्मा गांधी की स्मृति के रूप में देहरादून की शान बढ़ाता है. 16 अक्टूबर 1926 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब देहरादून आए थे, तब उन्होंने इस आश्रम का उद्घाटन किया था. जिस करनी से उन्होंने शिलान्यास किया था, वह आज भी आश्रम में मौजूद है. सुधीर गुलाटी ने बताया कि आश्रम में 60 बच्चों के रहने की व्यवस्था है. वर्तमान में बाल वनिता आश्रम में करीब 47 बच्चे रह रहे हैं. यहां बच्चों के लालन-पालन के अलावा कई तरह के क्रियाकलापों से उनका कौशल विकास भी किया जाता है. उन्होंने बताया कि सुबह बच्चे स्कूल चले जाते हैं और स्कूल से लौटने के बाद उन्हें ट्यूशन दिया जाता है. शाम को सभी बच्चे साथ मिलकर प्रार्थना करते हैं. बच्चों के पढ़ने के लिए किताबें, ड्रेस आदि की व्यवस्था आश्रम द्वारा की जाती है. वहीं कुछ लोग समय-समय पर राशन और जरूरी सामान देते रहते हैं. बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बाल वनिता आश्रम में कई तरह की सुविधाएं मौजूद हैं. यहां पुस्तकालय है और प्रोजेक्टर के माध्यम से भी बच्चों को पढ़ाया जाता है. बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. महात्मा गांधी द्वारा रखी गई आधारशिला के बाद इस आश्रम में बिन मां-बाप के बच्चों को छत मिली. वहीं उन्हें बापू की अवधारणा पर अहिंसा और देश प्रेम जगाने के लिए प्रेरित भी किया जाता है. गौरतलब है कि देश की आजादी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान को हमेशा याद किया जाता है. वहीं अगर बात करें देवभूमि उत्तराखंड की, तो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी देहरादून सहित उत्तराखंड के कई जिलों में आए थे. उत्तराखंड में आज भी उनकी कई निशानियां मौजूद हैं.

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