शनिवार, 7 दिसम्बर 2019 | 12:42 IST
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उत्तराखंड में जल्द ही लागू होगी सहकारी विकास परियोजना


मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा केन्द्रीय क्षेत्रक एकीकृत कृषि सहकारिता परियोजना (CSISAC ) के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों की सहकारी समितियों हेतु स्वीकृत 3340 करोड़ की योजना के क्रियान्वयन हेतु गठित राज्य स्तरीय मार्गदर्शक समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल, सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी उपस्थित थे।

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा प्रथम वर्ष हेतु स्वीकृत 100 करोड़ की धनराशि को क्षेत्रवार प्रस्तावित कार्यों हेतु स्वीकृत करने की सहमति प्रदान करने के साथ ही राष्ट्रीय सहकारी विकास बोर्ड द्वारा इस योजना के तहत स्वीकृत धनराशि सहकारी बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण किये जाने पर सैद्धान्तिक सहमति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त प्रदेश में नई गठित सहकारी समितियों जैसें ट्राउट मत्स्य पालन, भेड़-बकरी पालन आदि के लिये धनराशि उपलब्ध कराये जाने पर भी सहमति प्रदान की गई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सुमन कुमार प्रबन्ध निदेशक साईलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ तथा ड़ॉ एच.एस. कुटोला जनरल मैनेजर आंचल, पशु आहार निर्माण शाला रूद्रपुर के मध्य मक्के की फसल तथा साईलेज उत्पादन कर दुग्ध संघों की मांग पर विभिन्न बजन के पैकेट तैयार कर निर्धारित दर पर उन्हें उपलब्ध कराने व साइलेज उत्पादन की आंचल डेरी के माध्यम से इसकी मार्केटिंग किये जाने संबंधी एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर किये गये।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र की विभिन्न समितियों के लिये स्वीकृत इस धनराशि से कृषि एवं औद्योगिकी विकास, भेड़ बकरी पालन, डेरी विकास, मत्स्य पालन, पर्यटन व बैंकिंग क्षेत्र की सहकारिता समितियों के संयुक्त प्रयासों से किसानों एवं ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय दुगनी करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना में प्राथमिक स्तर पर सहकारी समितियों को ग्रामीण आर्थिक विकास के केन्द्र के रूप में विकसित करने, उनके डिजिटलाइजेशन एवं मार्केटिंग सोसाइटी को सुदृढ़ कर कृषि उत्पादों की खेती से लेकर बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे डेरी व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ ही भेड-बकरी पालन की व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण कर विपणन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चारागाहों में चुगान के कारण से राज्य की भेड़-बकरियों की विशेष मांग है। इसकी बेहतर ब्रांडिंग पर ध्यान देने से इससे हजारों कृषक लाभान्वित हो सकते हैं। प्रदेश में ट्राउट फार्मिंग परियोजना पर विशेष ध्यान देने तथा। ट्राउट की हेचरियों को बढ़ावा देने की भी बात उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने भेड़-बकरी की नश्ल सुधार एवं ब्रीडिंग फार्म पर विशेष ध्यान देने, मत्स्य सम्पदा योजना को बढ़ावा देने के लिये विशेषज्ञों की भी सलाह लेने को कहा। इससे इसके उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इसके लिये इच्छा शक्ति की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान देने उनकी समस्याओं की जानकारी कर उसके समाधान की त्वरित व्यवस्था, मक्के की खेती व उसके प्रोसेसिंग पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
 मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र ने प्रदेश में शहद उत्पादन के क्षेत्र विकसित करने पर भी बल दिया। इसके लिये प्रत्येक जिले में एक कलस्टर बनाया जाय। हिमालयन हनी की देश में बड़ी मांग है। इसे ग्रोथ सेन्टर से भी जोड़े जाने पर उन्होंने बल दिया।
बैठक में सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने इस संबंध में अपने व्यापक प्रस्तुतीकरण में बताया कि इस परियोजना के घटकों में बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एम0-पैक्स) का सुदृढ़ीकरण करते हुए किसानों की छोटी-छोटी जोत का सहकारी सामुहिक खेती के लिए आधुनिक तकनीकी के उपयोग द्वारा क्षेत्र विशेष हेतु निर्धारित कुषि उत्पाद को प्रोत्साहित किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से 03 एवं 05 दुधारू पशुओं तथा 50 पशुओं की सहकारी डेरी फार्म की स्थापना किये जाने के लिए राज्य सहायता एवं ऋण की व्यवस्था योजना में निहित है। समिति सदस्यों को 20 हजार दुधारू पशु उपलब्ध कराये जायेंगे। दुग्ध सहकारी समितियों के दुग्ध उत्पादकों तथा योजनान्तर्गत जोड़े जाने वाले सदस्यों को तकनीकी निवेश कार्यक्रम एवं लगभग 55 हजार सदस्यों को पशु स्वास्थ्य सेवा, संतुलित पशुआहार एवं वैक्यूम पैक्ड कॉर्न साईलेज उपलब्ध कराया जायेगा।
भेड़-बकरी पालन के असंगठित क्षेत्र को त्रिस्तरीय सहकारिता समिति के माध्यम से संगठित किया जायेगा। प्राकृतिक चारागाह में चुगान के कारण राज्य की भेड-बकरियों के उत्पाद की विशेष मांग है, जिसे ब्राडिंग कर स्वस्थ एवं स्वच्छ उत्पाद उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराये जायेंगे। इस योजना के अन्तर्गत 10,000 भेड़-बकरी पालकों को संगठित किया गया है। इससे प्रत्यक्ष रूप से लगभग 40,000 कृषक लाभान्वित होंगे।
उन्होंने कहा कि सीमान्त जनपदों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए  क्लस्टर आधारित ट्राउट फार्मिंग परियोजना भी संचालित की जायेगी। ट्राउट फार्मिंग हेतु आवश्यक मत्स्य बीज की उपलब्धता हेतु 08 ट्राउट हैचरियों की स्थापना भी योजना में लक्षित की गयी है। मात्स्यिकी संरक्षण, संवर्द्धन एवं एंग्लिंग से पर्यटन को बढ़ावा, मत्स्य क्रीडा को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था योजना में सम्मिलित की गयी है।
बैठक मे सभी संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।
 

 

 



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