शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 | 08:58 IST
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सड़कों की जगह सोशल मीडिया पर ज़्यादा हो रहा है चुनाव प्रचार


देहरादून- उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 का समर जीतने के लिए दौड़धूप कर रहे प्रत्याशी, सड़क के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी खूब पसीना बहा रहे हैं। हर हाथ तक मोबाइल फोन की पहुंच के चलते वर्तमान में सोशल मीडिया,चुनाव प्रचार का एक बड़ा मंच बन गया है।
इस वक्त विभिन्न सोशल प्लेटफार्म करीब करीब हर सियासी दल के प्रत्याशी की बैठक, सभा, पदयात्रा और जनसंपर्क के फोटो, वीडियो और रील्स से अटा पड़ा है। वर्तमान में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके चलते इन दिनों वास्तविक दुनिया से ज्यादा चुनावी माहौल वर्चुअल वर्ल्ड में नजर आ रहा है।
उत्तराखंड में 19 अप्रैल को मतदान होना है। इस हिसाब से वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशियों के पास अब केवल 17 दिन ही शेष हैं। मतदान के लिए समय कम होने के बावजूद, उत्तराखंड की सड़कों पर चुनाव प्रचार, बीते चुनावों के मुकाबले कमतर नजर आ रहा है।
शहरों में न तो ज्यादा होर्डिंग-बैनर नजर आ रहे हैं और न ही जगह-जगह पार्टी के झंडों की झालर सजाते कार्यकर्ता दिख रहे हैं। जबकि अब से पहले तक चुनावों के दौरान प्रचार सामग्री से शहरों और गांवों के गली-मोहल्ले होर्डिंग, बैनर व पोस्टर से चुनावी रंग में रंग जाते थे।
वरिष्ठ पत्रकार नवीन पाण्डेय का कहना है कि वास्तव में इस बार चुनाव में पहले सा उत्साह दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा। इतना जरूर है कि प्रत्याशी व उनके समर्थक सोशल प्लेटफार्म-व्हाटसऐप, फेसबुक, एक्स आदि पर ग्रुप बनाकर प्रचार सामग्री साझा कर रहे हैं।
हालांकि उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रचार अपेक्षित रूप से असरदार नहीं है। जनमत जनता के बीच जाकर ही बनता है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र कुमार का कहना है कि निसंदेह सड़कों के साथ सोशल मीडिया पर भी चुनावी माहौल नजर आ रहा है। उनका कहना है कि इसकी अहम वजह भी है।
बकौल सुरेंद्र, आज के दौर में इंटरनेट बेहद रियायती दर पर उपलब्ध है और स्मार्टफोन तक भी लोगों की पहुंच बढ़ी है। वर्तमान में करीब करीब हर महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग, किशोर के हाथ में मोबाइल फोन है। सोशल मीडिया के जरिए आसानी से एक बड़े वर्ग के साथ सियासी दलों व प्रत्याशियों का संपर्क बन जाता है।

 



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