सोमवार, 20 मई 2024 | 03:18 IST
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ईडी के छापे में गर्भवती बहू को बीच में क्यों लाए लालू ?


लैंड फॉर जॉब स्कैम में केंद्रीय जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही है। ईडी की टीम ने शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार और करीबियों के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। इससे पहले भी लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन इस बार ईडी की कार्रवाई से लालू प्रसाद यादव ने इमोशनल कार्ड खेल दिया। लालू ने तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी राजश्री यादव को परेशान करने का आरोप 
लगाकर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। लालू बोले- ईडी अधिकारियों ने गर्भवती बहू को 15 घंटे तक बैठा कर रखा। इतना ही नहीं ईडी ने बेटियों और नन्हें-मुन्ने नातियों को भी परेशान किया। इस आरोप के बाद बीजेपी बैकफुट पर आती दिखी। सियासी जानकारों का मानना है कि अपने वोट बैंक को लालू यादव ने बड़ा संदेश दे दिया है। 
दिल्ली-एनसीआर, पटना, मुंबई और रांची में 24 स्थानों पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़ी जगहों पर छापेमारी हुई। ईडी ने उनके बेटे, बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और उनकी बेटियों से जुड़े परिसरों में छापेमारी की। छापेमारी के एक दिन बाद जमीन के बदले रेलवे की नौकरी की जांच में ईडी ने दावा किया है कि उसने 600 करोड़ रुपये के अपराध की आय का खुलासा करने वाले दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। एजेंसी के अनुसार, दस्तावेज 350 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों के स्वामित्व और विभिन्न बेनामीदारों के माध्यम से किए गए 250 करोड़ रुपये के लेनदेन से संबंधित हैं।
एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में छापेमारी की है, जो कि यूपीए सरकार के तहत रेल मंत्री के रूप में लालू के कार्यकाल के दौरान नौकरी के बदले जमीन लेने से संबंधित है। रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप डी की नौकरी देने वाले लोगों से जमीन की जबरन वसूली का मामला है। ईडी ने कहा कि जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि कई रेलवे जोन में भर्ती किए गए उम्मीदवारों में से 50 फीसदी से ज्यादा लालू प्रसाद के परिवार के निर्वाचन क्षेत्रों से थे। एजेंसी का दावा है कि कथित रूप से गरीब माता-पिता से रिश्वत के रूप में ली गई जमीन को बाद में बड़े प्रीमियम पर बेच दिया गया, जिसमें अर्जित धन मुख्य रूप से तेजस्वी के खातों में जा रहा था।
डी जिन संपत्तियों की जांच कर रहा है उनमें नई दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक चार मंजिला बंगला डी-1088 शामिल है। करीब 150 करोड़ रुपये की कीमत वाली इस बंगले को महज 4 लाख रुपये में खरीदा गया दिखाया गया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि यह संपत्ति तेजस्वी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत है। ईडी ने कहा कि तलाशी के दौरान तेजस्वी प्रसाद यादव इस घर में ठहरे हुए पाए गए। इस घर को अपनी आवासीय संपत्ति के रूप में इस्तेमाल करते पाए गए। ईडी के दावों के अनुसार, तेजस्वी जमीन के बदले नौकरी घोटाले के प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभरे हैं।
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कई बार सार्वजनिक मंचों से तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी बनाने का संकेत दे चुके हैं। वहीं अब जिस तरह से केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो रही है। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को भी ईडी ने पूछताछ के लिए समन भेजा है। वैसी स्थिति में आरजेडी नेता इस बात को लेकर चिंतित है कि कहीं आने वाले समय में तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ तो नहीं जाएगी। 
लालू यादव एक दूरदर्शी नेता है। उनके पास करीब 5 दशक का राजनीतिक अनुभव है। वे जनता की नब्ज को भी अच्छी तरह से समझते हैं। उनकी गिनती देश के कद्दावर नेताओं में होती हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी को लेकर लालू प्रसाद ने जो बयान दिया है, उसके मायने भी गहन है। वैसे भी राजश्री को लालू परिवार का लेडी लक माना जाता है, क्योंकि उनकी शादी के बाद ही तेजस्वी डिप्टी सीएम बने और लालू को जमानत मिली। इसलिे 
लालू यादव ने जो इमोशनल कार्ड खेला है, उसका असर आने वाले समय में बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। लालू के इमोशनल कार्ड को कमजोर करने के लिए ईडी ने वो सबूत जारी किये जो कथित तौर पर छापे में मिले हैं। ईडी के मुताबिक लालू के परिसरों में करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा उसने 1 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, विदेशी मुद्रा में 1,900 डॉलर, 540 ग्राम सोना बुलियन और सवा करोड़ के 1.5 किलोग्राम से अधिक सोने के आभूषण , विभिन्न संपत्ति के दस्तावेज, लालू यादव केनाम पर बिक्री के दस्तावेज बरामद किए हैं। ईडी ने जिस तरह छापे में मिले दस्तावेजों को सार्वजनिक किया, उससे साफ है सरकार भी लालू के इमोशनल दांव से बैकफुट परआ गई है। लालू प्रसाद ने एक ट्वीट माध्यम से अपने समर्थकों और विपक्षी दलों को बड़ा संदेश देने काम किया हैं। वे इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बनाने की कोशिश कर रहे हैं। तो देखना है आने वाले समय में ये कितना बड़ा सियासी मुद्दा बनता है। 

 



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