शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 | 07:59 IST
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दिवाली पर सज गया पहाड़ का बाजार, मेड-इन-चाइना क्यों नहीं खरीद रहे लोग ?


इस साल दिवाली का त्योहार 12 नवंबर को मनाया जाएगा. दीपावली की रौनक बाजारों में दिखने लगी है. उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर, कोटद्वार, देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि शहरों में खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।  रोशनी के महापर्व दिवाली में अब कुछ दिन बाकी हैं. त्योहार के लिए बाजार सज चुके हैं. दिवाली के चलते इन दिनों बाजार गुलजार नजर आ रहे हैं. हर तरफ रंग-बिरंगी मालाएं, मिट्टी से बनी मूर्तियां, साज-सज्जा का सामान, खील-बताशे, मिट्टी के दीए व कई अन्य आकर्षक चीजें देखने को मिल रही हैं.
त्योहारी सीजन में बाजार में मेड इन इंडिया का जलवा है. मेड इन चाइना की चमक फीकी नजर आ रही है. पिछले कई सालों से दीवाली पर देवी-देवताओं की मूर्तियों के बाजार में चीन का कब्जा था, पर अब अपने देश में बनी मूर्तियां ज्यादा दिखाई दे रही हैं. त्योहार पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी सबसे अहम है. बाजार में टेराकोटा वाली तीन से चार इंच की गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति सबसे कम दाम 50 रुपये में बिक रही है. वहीं, कोलकाता से मंगाई मूर्तियां सबसे महंगी हैं. रेशमी कपड़े, कुंदन और नग वाले गहनों से सजी यह मूर्तियां छह इंच से लेकर एक फीट तक की हैं.
दुकानदार ने कहा कि इस बार दीपावली में माता लक्ष्मी की अलग-अलग प्रकार की मूर्तियां आपको यहां मिल जाएंगी. हमारे यहां पर दीवाली को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है और दुकान सज चुकी है. अधिकांश मूर्ति स्वदेशी हैं. चाइनीज सामान बेहद कम हो गया है. दीवाली पर घरेलू साज-सज्जा के लिए बाजार में तरह-तरह के आर्टिफिशियल फूल आए हैं, जो विभिन्न रंगों में और कई प्रकार की डिजाइन में हैं. कई फूल तो असली को भी मात दे रहे हैं. इनमें गुलाब से लेकर विदेशी फूलों तक के गुच्छे हैं. इनकी कीमत 40 रुपये से लेकर 800 रुपये तक है. बाजार में रंगोली के डिजायन और सामग्री से लेकर दरवाजों पर लगने वाले स्टीकर भी बिक रहे हैं..
बाजार में दीवाली पर पूजन के लिए मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी का खास महत्व है. अब मिट्टी के स्थान पर पीओपी की मूर्ति आ गई हैं. शहर में इन मूर्तियों की बिक्री के लिए 50 से ज्यादा दुकान और फड़ सज चुके हैं. अब ऐसे दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार होने लगा है.

 



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