बृहस्पतिवार, 17 अक्टूबर 2019 | 06:15 IST
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दिल्ली में सर्वधर्म सद्भाव संगम का आयोजन,आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा सहित कई संत हुए शामिल


ऐतिहासिक विरासत स्थल गांधी आश्रम, हरिजन सेवक संघ मुख्यालय किंग्सवे कैम्प दिल्ली में महात्मा गांधी जी की 150 वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन और शिक्षाओं का आलोक प्रकाशित करने हेतु आज सर्वधर्म सद्भाव संगम का आयोजन किया गया। जिसमें विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरू परम पावन दलाई लामा, संत मोरारी बापू, योग गुरू रामदेव,परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, पूर्व प्रमुख जत्थेदार, अमृतसर, ज्ञानी गुरबचन सिंह,ज़मीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव, मौलाना महमूद मदनी, लामा श्री चेतसंग रिन्पोचे, पादरी अजीत पैट्रिक जी, अध्यक्ष उलेमा फाउंडेशन ऑफ इंडिया शिया परंपरा मौलान कोकब मुस्तफा, हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष डॉ शंकर सान्याल, उपाध्यक्ष नरेश यादव, साध्वी भगवती सरस्वती और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया।

आपको बता दें कि वास्तव में यह स्थान एक दिव्य तप स्थल है जहां पर महात्मा गांधी जी रूकते थे और भारत को स्वतंत्र करने हेतु अनेक आंदोलनों का नेतृत्व यही से हुआ था।

हरिजन सेवक संघ मुख्यालय किंग्सवे कैम्प में पूज्य संतों व अन्य विशिष्ट अतिथियों ने टायॅलेट कैफेटेरिया, पुस्तकालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर का अवलोकन किया। साथ ही विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं, पूज्य संतों और अन्य सभी विशिष्ट अतिथियों ने विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु वॉटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की तथा सभी ने संकल्प लिया कि जाति, धर्म, सम्प्रदाय, रंग और पंथ से ऊपर उठकर मानवता की सेवा और सभी लोगों तक स्वच्छ जल और शुद्ध वायु पहुंचाने के लिये मिलकर कार्य करेंगे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी पूज्य संतों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष के पौधे भेंट करते हुये संकल्प कराया कि सभी के स्वस्थ जीवन के लिये 11 पौधों का रोपण अवश्य करेंगे तथा प्रत्येक व्यक्ति कम से कम 10 लोगों को प्रेरित करे।

 साध्वी भगवती सरस्वती द्वारा परमार्थ निकेतन गंगा तट पर दिये गये उद्बोधनों को संकलित कर प्रतिष्ठित प्रकाशक पेंग्विन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ’कम होम टू योर सेल्फ’ जिसमें जीवन की समस्याओं का सहज समाधान सुझाया है का विमोचन श्रद्धेय दलाई लामा जी और अन्य पूज्य संतों द्वारा किया गया,तथा पुस्तक की एक-एक प्रति परम पूज्य दलाई लामा और सभी पूज्य संतों को भेंट की गयी।

इस मौके पर दलाई लामा जी ने कहा कि 1000 से अधिक वर्षो से भारत के मूल में करूणा और अहिंसा का संदेश समाहित है। प्रेम, करूणा और सद्भाव भारत के मूल्य और प्राचीन परम्पराओं का हिस्सा है। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है कि हम आपसी सद्भाव और सम्मान को बनायें रखे। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिये स्वच्छता महत्वपूर्ण है लेकिन हमारी भावनात्मक स्वच्छता और स्वस्थ्य और अधिक महत्वपूर्ण है। भारत में आन्तरिक शान्ति और करूणा को बनायें रखने के लिये आधुनिक शिक्षा और प्राचीन भारतीय शिक्षा के बीच की खाई को पाटना होगा। दलाई लामा ने कहा कि वर्तमान समय में जनसंख्या वृद्धि हो रही है और ग्लोबल वार्मिग के कारण हमारा घर गर्म हो रहा है; जल रहा है तथा हमारे पास बचने के लिये कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अतः हमें अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिये, जल को बचाना चाहिये तथा अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिये। हम अपने ग्रह को बचाने की शुरूआत स्वयं से करे अपने घरों से करे।

योगगुरू स्वामी रामदेव ने कहा कि आज जो इस ऐतिहासिक धरा पर संलह का संगम हो रहा है यहां से यही संदेश प्रसारित किया जा रहा है कि पूरा देश प्रेम और मोहब्बत के साथ रहे। हमारे शास्त्रों में जो लिखा है हमारे पूज्य संतों का जीवन दर्शन उस पर आधारित है और हमारे अनेक संत शास्त्रों को जीवंत रूप में जीते है। उन्होने कहा कि यहां हमारे पास एक सच्चा संगम है एक ओर शास्त्रों का संगम और दूसरी ओर संतों का संगम। आज हम वास्तव में धन्य हैं कि हमें अपने दिव्य समागम से शान्ति और सद्भाव का संदेश एक साथ प्राप्त हो रहा है। आज का समय हमारी आधुनिक और पारम्परिक शिक्षा को एकीकृृत करने तथा हमारे पर्यावरण की रक्षा करने का समय है और यही आज की आवश्यकता भी है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज एक महत्वपूर्ण दिन है क्योकि हम यहां पर एकता का संदेश देने के लिये एकत्र हुये है और एकता का उत्सव मना रहे है। आज हम आई (मैं) से व्ही (हम) पर अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिये एकत्र हुये है। आज हम आई से व्ही की यात्रा पर है अर्थात मैं रूपी बीमारी से कल्याण की यात्रा। आज कल्याण की हमारे जीवन में, हमारे समुदाय में, हमारे राष्ट्रों और पूरी दुनिया को जरूरत है। आज के समय में हम सभी को एक साथ आने की जरूरत है अपने पर्यावरण की रक्षा करने के लिये। महात्मा गांधी जी ने औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता के लिये भारत की भूमि को एकजूट किया था। आज हमारे सामने सबसे बड़ा खतरा है जलवायु परिवर्तन का, पर्यावरण प्रदूषण का, स्वच्छ जल की कमी का। उन्होने कहा कि जैसे हम स्वतंत्रता के लिये एकजूट हुये वैसे ही हमें शान्ति के लिये, अपनी पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त करने के लिये एक जूट होना होगा क्योकि हमारे पास प्लान ए और प्लान बी हो सकता है परन्तु प्लानेट केवल एक ही है।

मौलान महमूद मदनी जी ने कहा कि हमारे राष्ट्र की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिये अगर हमें कुछ भी त्याग करने की आवश्यकता है तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिये। आईये हम अपने संवाद से, अपने अभ्यास से और अपने कार्यो से एक साथ आगे बढ़े।

डॉ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज हम पूज्य धर्मगुरूओं के साथ शान्ति के लिये एकजूट हुये है और यह शान्ति की विस्तारित परिभाषा है। शान्ति की हमारी परिभाषा का विस्तार होना चाहिये। अक्सर हम देखते है कि कहा जाता है ’’हत्या मत करो।’’ यह कहना पर्याप्त नहीं है बल्कि शान्ति की हमारी परिभाषा में हमारी प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण, स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वच्छ मिट्टी तक भी हमारी पहुंच होनी चाहिये।

पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह जी ने कहा कि गुरू नानक देव जी ने प्रदूषण को समाप्त करने, जल के संरक्षण, वृक्षारोपण के महत्व, महिलाओं को सशक्त बनाने और निःस्वार्थ सेवा के महत्व पर जोर दिया है यही दिव्य संदेश उनकी शिक्षाओं में समाहित है और आज की जरूरत भी है।

दिल्ली के आर्कबिशप के प्रतिनिधि पादरी अजीत पैट्रिक ने कहा कि हमारे पास जीओ और जीने दो का उद्धरण है जो संदेश देता है कि जीओ और जीवन दो। आईये जीवन को जीने दो, जीओ और जीवन को स्वस्थ बनायें रखें और यही संदेश प्रसारित करे।



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