बुधवार, 28 अक्टूबर 2020 | 11:11 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से अपील,सैनिक के नाम जलाएं एक दीया          विजयदशमी के पावन पर्व पर बद्री-केदार,गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि का ऐलान          स्वास्थ्य मंत्रालय की देश वासियों से अपील,त्योहारों के मौसम में कोरोना को लेकर बरतें सावधानी          दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का तोहफा,3737 करोड़ रुपये के बोनस का भुगतान तुरंत           भारत दौरे से पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री का बड़ा बयान लद्दाख में चीन भारत पर डाल रहा है सैन्‍य दबाव          उत्तराखंड में चिन्हित रेलवे क्रॉसिंगों पर 50 प्रतिशत धनराशि केन्द्रीय सड़क अवस्थापना निधि से की जाएगी          उत्तराखंड में भूमि पर महिलाओं को भी मिलेगा मालिकाना हक          सीएम रावत ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को लिखा पत्र,उत्तराखंड में आइटी सेक्टर में निवेश करने का किया अनुरोध           कोरोना के चलते रद्द हुई अमरनाथ यात्रा,अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने रद्द करने का किया एलान           बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार         
होम | मनोरंजन | मसूरी के इतिहास पर बनी डॉक्यूमेंट्री को दादा साहेब फाल्के अवार्ड

मसूरी के इतिहास पर बनी डॉक्यूमेंट्री को दादा साहेब फाल्के अवार्ड


मसूरी के करीब दो सौ साल के इतिहास को सुनहरे पर्दे पर दर्ज करने वाले निर्देशक क्षितिज शर्मा की डॉक्यूमेंट्री फिल्म सवॉय:सागा ऑफ एन आइकॉन को प्रतिष्ठित दसवें दादा साहेब फॉल्के फिल्म फेस्टिवल 2020 में दोहरी जीत मिली है। सर्वश्रेष्ठ डाक्यूमेंट्री के लिए निर्देशक क्षितिज शर्मा और बेस्ट सिनेमेटोग्राफी के लिए अभिषेक सिंह नेगी को पुरस्कार मिला है। यह फिल्म मसूरी के ऐतिहासिक सवॉय होटल के बहाने मसूरी के इतिहास पर नजर डालती है। देश विदेश के विभिन्न फिल्म फेस्टीवल में इस फिल्म का यह 19 वां पुरस्कार है। फिल्म में वॉयसओवर जाने माने अंग्रेजी लेखक गणेश सैली का है। दादा साहेब फिल्म फेस्टीवल के आयोजनकर्ताओं ने लॉकडाउन के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर इस अवार्ड शो को सिर्फ फेसबुक पेज तक सीमित रखा। लिहाजा बेहद सादगी के साथ विजेताओं के नाम की घोषणा की गई। फिल्म निर्देशक क्षितिज शर्मा ने बताया कि दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल जैसा प्रतिष्ठित खिताब जीतने की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। मुझे अपनी टीम पर गर्व है। मसूरी निवासी गणेश सैली ने बताया कि एक घंटे की फिल्म को चार लोगों के क्रू ने चार दिन में बिना रिटेक के शूट किया था। सवाय होटल ने 1920 में अफगान कान्फ्रेंस से लेकर, मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, दलाई लामा, पंचेन लामा जैसी शख्सियत की आगवानी की है। यहां घटी कई घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं। इसी होटल के इर्द गिर्द मसूरी के इतिहास को दिखाने का प्रयास किया गया है कि, कैसे मसूरी में 1823 के बाद बसावट का दौर शुरू हुआ।

© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: