मंगलवार, 5 दिसम्बर 2023 | 01:55 IST
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हार्ट अटैक का शक है तो सीटी स्कैन कब करवाना चाहिए ?


भारत में हम डॉक्टरों को खूब आदर मिलता है और हमें अपने काम की काफी आजादी भी है। हम पर आम लोगों की जबर्दस्त आस्था है, इसलिए वो हमारे सुझावों का अच्छे से पालन करते हैं। इसका एक बढ़िया उदाहरण हमारे देश में कोविड वैक्सीन को हाथोंहाथ लिया जाना है जबकि इसके प्रति अमीर देशों में भी हिचक देखी गई। ऐसे में एक डॉक्टर के रूप में हमारी जिम्मेदार और बढ़ जाती है कि हम बिल्कुल वैज्ञानिक सुझाव देते रहे हैं और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद, विश्वासों-धारणाओं या पूर्वग्रहों को हावी नहीं होने दें।
इसलिए, डॉ. विक्रम बत्रा जब कहते हैं कि इसका कोई मतलब नहीं है कि आप जितना फिट महसूस करते हैं, उतना हों भी तो यह हमें बहुत डरावना जान पड़ता है। डॉ. विक्रम बत्रा लोगों से कहते हैं कि वो खुद को फिट महसूस करते हैं तो निश्चिंत नहीं हो जाएं बल्कि सीटी स्कैन जैसे सॉफिस्टिकेटेड टेस्ट्स करवाते रहें ताकि सच पता चलता रहे। वो कहते हैं कि समय-समय पर टेस्ट नहीं करवाने से अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार होकर जान गंवाने का खतरा बना रहेगा। दरअसल, ऐसी चेतावनियों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है बल्कि ये आधी सच्चाई और धारणा पर टिकी होती हैं। डॉ. देवी शेट्टी के लेख में कई बातों का वैज्ञानिक आधार पर खंडन किया जा सकता है, लेकिन हम या कुछ ही दावों की पड़ताल कर रहे हैं।
क्या हर किसी को सीटी एंजियोग्राफी करवाना चाहिए?
जिनमें हृदय रोगों का कोई लक्षण नहीं है, उनमें ज्यादातर लोगों के लिए इस सवाल का जवाब बिल्कुल नहीं है। सीटी स्कैन ऐसा टेस्ट है जो सीने में दर्द की शिकायत या हृदय रोग के दूसरे किसी लक्षण दिखने पर ही किया जाता है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि आम लोगों को भी किसी गुप्त बीमारी के लिए सीटी स्कैन करवाना चाहिए। यही वजह है कि दुनिया का कोई भी वैज्ञानिक संस्थान ऐसी सिफारिश नहीं करता है।
यह सच है कि सीटी स्कैन हृदय की धमनियों में बीमारियों को पकड़ लेती है। फिर भी दो कारणों से रोग के लक्षण के बिना किसी का सीटी स्कैन नहीं किया जाता है। पहला- उम्र धूम्रपान की स्थिति कॉलेस्ट्रॉल के स्तर उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, और परिवार में हृदय रोगों का इतिहास जैसी जानकारियों के आधार पर किसी व्यक्ति के भविष्य में हर्ट डिजीज के खतरों को बहुत हद तक भांपा जा सकता है। इसलिए लोगों को वक्त-वक्त पर यही सब टेस्ट करवाने की सिफारिश की जाती है। इसलिए खतरे को भांपने के लिए सीटी एंजियोग्राम की जरूरत नहीं है।
दूसरा, रोग के लक्षण के बिना किसा का सीटी स्कैन करने से परेशानी उठाने के साथ-साथ आगे कई तरह के टेस्ट करवाने की जरूरत भी पैदा हो सकती है। संभव हो कि एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी तक करवाने की सलाह दे दी जाए। इसका कोई साक्ष्य नहीं है कि इस टेस्ट से आम लोगों को फायदा होता है बल्कि इन प्रक्रियाओं से गुजरकर कई तरह के खतरे मोल लेने की आशंका पैदा हो सकती है।
यहां तक कि जिन लोगों में हृदय रोग के लक्षण हैं, उनका भी दवाइयों से इलाज किया जाना चाहिए ना कि तुरंत एंजियोप्लास्टी या सर्जरी कर दी जाए क्योंकि इनसे भविष्य में हार्ट अटैक या जान जाने का खतरा कम नहीं होता है। एंजियाप्लास्टी या सर्जरी तभी की जानी चाहिए जब बीमारी दवा से ठीक नहीं हो रही हो।
क्या आपको एक्सरसाइज शुरू करने से पहले सीटी स्कैन करवाना चाहिए?
हम हैरान हैं कि कहा गया है- कोई इंसान भले ही महीने में दो बार माउंट एवरेस्ट भी चढ़ ले, फिर भी बिना सिटी स्कैन रिपोर्ट के पक्के तौर पर नहीं माना जा सकता है कि वह इंसान फिट है। जो लोग व्यायाम करते हैं, उनके हृदय और धमनियां एक्सरसाइज नहीं करने वालों के मुकाबले दुरुस्त रहते हैं। इस तरह, एक्सरसाइज करने वालों में अचानक हार्ट अटैक या मौत का खतरा कम होता है, बशर्ते वो समय-समय पर बीपी मापते रहें, सुगर और कॉलेस्ट्रेल के लेवल पता करने के लिए ब्लड टेस्ट करवाते रहें। ऐसा करने वालों के लिए सीटी स्कैन की जरूरत नहीं है।
लेकिन जो लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहते हैं। वो कम कम घूमते-टहलते हैं या एक्सरसाइज नहीं करते हैं तो भी सीटी स्कैन करवाने की जरूरत नहीं है। उनके लिए बेहतर यह होगा कि वो एक्सरसाइज करना शुरू कर दें और शुरुआत आसान कदमों से करें फिर धीरे-धीरे कठिन अभ्यास की तरफ बढ़ें। कुछ दिनों बाद खुद को इतना ट्रेंड कर लें कि हर दिन कम-से-कम 45 मिनट एक्सरसाइज आसानी से की जा सके। 
अगर आपको एक्सरसाइज के वक्त परेशानी महसूस हो रही है या किसी रोग के लक्षण दिखने लगे हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हर व्यस्क व्यक्ति के लिए बीपी , कॉलेस्ट्रॉल और सुगर लेवल का रूटीन चेकअप जरूरी है, चाहे वो एक्सरसाइज कर रहा हो, शुरू करने वाला हो या नहीं करने वाला हो। हमें पूरा यकीन है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए बीमारियों को होने से रोकने का लक्ष्य ही बेहतर है, ना कि यह सोचकर बीमारियों के प्रति लापरवाह रहने की आदत कि इलाज तो हो ही जाएगा। इसलिए, नियमित व्यायाम, धूम्रपान को बिल्कुल तौबा करने के साथ-साथ हाई बीपी, 
हाई कॉलेस्ट्रॉल और डाइबिटीज की जांच करवाते रहना चाहिए। वैज्ञानिक ज्ञान के आधार पर पूरे दावे से कहा जा सकता है कि बीमारियों से बचने के लिए सीटी स्कैन या इकोकार्डियोग्राम आदि का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए।

 



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