सोमवार, 15 जुलाई 2024 | 04:59 IST
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देश पर फिर मंडराया कोरोना का ख़तरा


कोरोना के नए वैरिएंट जेएन.1 ने दुनिया के 40 देशों में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। भारत में भी अब इसकी दहशत दिखनी शुरू हो गई है। इस वायरस के फैलने की रफ्तार और इससे जुड़े खतरों को लेकर अमेरिकी संस्था रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र यानी सीडीसी) ने चेतावनी जारी की है। संस्था ने कहा है कि ये कोरोनो वायरस का यह अत्यधिक संक्रामक वेरिएंट है। इसका तेजी से प्रसार अमेरिकी अस्पतालों को बड़ी संख्या में मरीजों को भर्ती करने के लिए मजबूर कर सकता है। सीडीसी कोविड और फ्लू के संयुक्त प्रभाव के चलते अमेरिकी मेडिकल सिस्टम पर भारी दबाव पड़ने को लेकर चिंतित है।

सीडीसी ने कहा कि कोविड के मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी के अधिकांश हिस्सों में इन्फ्लूएंजा बढ़ रहा है और कई क्षेत्रों में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) एक्टिविटी भी बहुत ज्यादा बनी हुई है। सीडीसी का मानना है कि आने वाले समय में हालात मुश्किल भरे हो सकते हैं।

भारत की बात करें तो यहां कोरोना के कुल 2300 एक्टिव मामलों में नए वेरिएंट जेएन-1 के 21 मामले देखे गए हैं। भारत में कोरोना वायरस इंफेक्‍शन के 21 मई के बाद सबसे ज्‍यादा 614 मामले दर्ज किए गए। बेंगलुरू में हुई एक मौत को नए वेरिएंट के कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। नए वेरिएंट से अब तक चार मोतें होना बताया जा रहा है। वैसे बीते दो सप्ताह में कोविड-19 से जुड़े 16 मरीजों की मौत हो गई। इन्‍हें गंभीर को-मॉर्बिडिटी थी। सबसे चिन्ता की बात ये है कि केरल के बाद महाराष्ट्र, गोवा में नए वेरिएंट के केस बढ़ने लगे हैं। चिंता की बात यह है कि नए वैरिएंट की रफ्तार बढ़ने के साथ अचानक कोरोना के मामलों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना के नए वैरिएंट के खतरे को देख राज्‍यों के अस्‍पताल अलर्ट हैं। हालांकि, लोगों के मन में कुछ सवाल हैं। वे जानना चाहते हैं कि नया वैरिएंट कितना खतरनाक है? जेएन.1 में क्‍या लक्षण दिखते हैं? जो 21 लोग इससे संक्रमित हुए हैं, उनकी हालत कैसी है? आइए, यहां इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।

सबसे पहले जान लीजिए कि नए वेरिएंट जेएन.का पहला मामला कहां सामने आया तो जवाब है कि कोविड-19 का यह सब-वैरिएंट सबसे पहले लक्जमबर्ग में मिला था। यह ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट से आया है। इसका सोर्स पिरोला वैरायटी BA.2.86 है। इसमें स्पाइक प्रोटीन आल्‍टरेशन हैं जो इसे अधिक संक्रामक और इम्‍यून सिस्‍टम को चकमा देने वाला बना देते हैं। जहां तक भारत का सवाल है तो जेएन.1 का पहला मामला 8 दिसंबर को केरल में सामने आया था। केरल में 79 साल की एक बुजुर्ग महिला इससे संक्रमित हुई थी। अब सवाल उठता है कि नया वेरिएंट जेएन.कहां कहां फैल चुका है ?

कोरोना का नया वेरिएंट कई देशों में फैला हुआ है। अमेरिका, ब्रिटेन, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, नीदरलैंड और हाल ही में चीन सहित अलग-अलग देशों में इसकी मौजूदगी मिली है। अब इस फेहरिस्‍त में भारत का नाम भी जुड़ गया है।

 नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी.के ने बताया है कि संक्रमण अभी तक ख़तरनाक नहीं दिख रहा है। इसकी चपेट में आए लोगों में से लगभग 91 से 92 फीसदी लोग घर पर ही ट्रीटमेंट का ऑप्‍शन चुन रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने भी बताया है कि भले ही कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन 92.8 फीसदी मामलों में घर पर ही इलाज हो रहा है जो हल्की बीमारी का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है। जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उन्हें अन्य बीमारियां थीं और उनमें कोविड का पता अचानक लगा।

 अब सवाल उठता है कि नए वेरिएंट जेएन.1 पर मौजूदा वैक्‍सीन कितनी असरदार होगी-
हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करने वाली वैक्‍सीन जेएन.1 वैरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी रहनी चाहिए। इसका मतलब यह हुआ है कि मौजूदा वैक्‍सीन जेएन.1 वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगी। यहीं कारण है कि एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि घबराने की बहुत जरूरत नहीं है। लेकिन, स्थितियों पर नजर जरूर रखना होगा।

सवाल ये है कि क्या JN.1 अन्य कोरोना वैरिएंट से ज्‍यादा संक्रामक या गंभीर है?
कोरोना का नया वेरिएंट जेएन.1 वैरिएंट कोविड-19 की नई लहर की वजह बनता दिख रहा है। अमेरिका सहित कई देशों में इसके गंभीर खतरे दिखने लगे हैं।

इससे बचाव के लिए वही तरीके हैं, हाथ धोते रहना, मास्क पहनना, भीड़ भाड़ वाली जगहों से बचना.. योगा प्राणायाम, अच्छा खानपान से इम्युनिटी बढ़ाना।

इसे BA.2.86 वैरिएंट के समान माना जाता है। JN.1 BA.2.86 से जुड़ा है जो ओमिक्रॉन का एक वंशज है। पिछले साल गर्मियों में इसके कारण कोरोना के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों वैरिएंट लगभग एक जैसे हैं। उनके स्पाइक प्रोटीन में बहुत मामूली अंतर है। स्‍पाइक प्रोटीन वायरस का वह हिस्सा होता जो इसे मानव कोशिकाओं पर आक्रमण करने की इजाजत देता है। नया वैरिएंट इम्यून सिस्‍टम को चकमा देने में ज्‍यादा असरदार है। इसका मतलब है कि इंफेक्‍शन होने की आशंका भी बढ़ जाती है। बीते दो सप्ताह में कोविड-19 से जुड़े 16 मरीजों की मौत हो गई। इन्‍हें गंभीर को-मॉर्बिडिटी थी।

अब सवाल उठता है कि हमारे देश में जेएन.को लेकर अभी क्या है तैयारी?
वीके पॉल ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक समुदाय नए वैरिएंट की बारीकी से जांच कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों को परीक्षण बढ़ाने और अपनी निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। केंद्र सरकार ने देश में कोविड-19 मामलों में बढ़ोतरी और जेएन.1 के सामने आने के बीच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने देशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों की समीक्षा की। साथ ही कोरोना वायरस के उभरते वैरिएंट के प्रति सतर्क रहने पर जोर दिया।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जेएन.1 के नए मामलों में से 19 मामले गोवा में दर्ज किए गए हैं। केरल और महाराष्ट्र में एक-एक मामला सामने आया है।

सरकार का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आए लोगों में से लगभग 91 से 92 फीसदी लोग घर पर ही ट्रीटमेंट का ऑप्‍शन चुन रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जेएन.1 के नए मामलों में से 19 मामले गोवा में दर्ज किए गए हैं। केरल और महाराष्ट्र में एक-एक मामला सामने आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने बताया है कि भले ही कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन 92.8 फीसदी मामलों में घर पर ही इलाज हो रहा है जो हल्की बीमारी का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है। जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उन्हें अन्य बीमारियां थीं और उनमें कोविड का पता अचानक लगा। बहरहाल कोरोना वायरल खतरनाक तो है, लेकिन इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं है। 

 
 
 
 


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