सोमवार, 23 सितंबर 2019 | 11:05 IST
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गांधी परिवार के बिना क्या चल पाएगी कांग्रेस ?


लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। एक महीने से ज़्यादा समय तक मान मनौव्वल करवाने के बाद आज राहुल ने पत्र लिखकर दो टूक कह दिया कि न वे और न ही गांधी परिवार का कोई सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा। इसके बाद वर्किंग कमेटी ने 90 साल के मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बना दिया, लेकिन पूर्णकालिक अध्यक्ष की तलाश तेज कर दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता कांग्रेस को चला सकता है। ऐसे समय में जब हर तरफ मोदी-मोदी की गूंज है और राषट्रवाद उफान मार रहा है, तो क्या कांग्रेस को नई दिशा देने वाला कोई नेता है।

 वैसे नेहरू, इंदिरा और राहुल गांधी के काल के बाद 1991 से 1996 तक नरसिंह राव और फिर 1996 से 1998 तक सीताराम केसरी कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन जिस दिन सोनिया गांधी ने राजनीति में आने का मन बना लिया, तभी सीताराम केसरी को बेआबरू करके बाहर फेंक दिया गया। यानी जब गांधी परिवार के किसी शख्स ने चाह लिया कि पार्टी वही चलाएगा तो फिर बाहर के किसी नेता के लिए कोई जगह नहीं। लेकिन इसका नुकसान ये हुआ कि पिछले पांच साल से मोदी ने कांग्रेस को एक पार्टी की जागीर साबित करके बहुत बहुत सियासी नुकसान पहुंचा दिया है। राहुल गांधी को समझ में आ गया है कि अगर आगे मोदी से मुकाबला करना है तो उनका परिवारवाद वाला हथियार खत्म करना पड़ेगा, इसीलिए उन्होंने पार्टी अध्यक्ष छोड़ ही दिया,. लेकिन अच्छी तरह ये जताने के बाद कि पूरी पार्टी गांधी परिवार को ही चाहती है, इसलिए उनका परिवार कांग्रेस को संभाले हुए है, न कि विरासत के कारण। हो सकता हो कि राहुल गांधी जनता को ये समझाने में कामयाब हो जाएं कि लेकिन ऐसी सूरत में दूसरा नेता जो भी अध्यक्ष बनेगा, क्या कांग्रेसी उसे स्वीकार कर पाएंगे ?

 

सूत्रों का दावा है कि नया अध्यक्ष जिसे भी बनाया जाएगा, इतना तय है कि वो गांधी परिवार का बेहद वफादार होगा, जैसे कि मनमोहन सिंह पीएम रहे। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है, लेकिन वे सीएम की कुर्सी छोड़कर नाम के लिए इस पद पर आने को तैयार नहीं हैं। दूसरा नाम है गुलाम नबी आज़ाद का। आज़ाद को बनाने से मुसलिम वोटों को लुभाने में आसानी होगी, लेकिन जिस तरह मोदी ने राष्ट्रवाद का हल्ला मचा रखा है, उससे निपटने में कांग्रेस को दिक्कत आएगी। तीसरा नाम केरल के 56 साल के नेता केसी वेणुगोपाल का है, जिन पर राहुल  गांधी एके एंटनी से भी ज़्यादा भरोसा करने लगे हैं। पार्टी में मनमोहन सिंह, अमरिंदर सिंह और एके एंटनी का नाम भी चल रहा है, लेकिन इनकी उम्र बहुत ज़्यादा हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस दो राहे पर खड़ी हो नज़र आ रही है।

 



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