रविवार, 21 जुलाई 2019 | 08:51 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
81 साल की उम्र में शीला दीक्षित का निघन          शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं थी          दिल्ली की सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का दिल्ली में निधन          इसरो ने किया ऐलान, अब 22 जुलाई को लॉन्च होगा चंद्रयान-2          कुलभूषण जाधव मामले पर पीएम मोदी ने जताई खुशी कहा- ये सच्चाई और न्याय की जीत है          भारतीय वायुसेना के लिए गेम चेंजर साबित होगी राफेल-सुखोई की जोड़ी,एयर मार्शल भदौरिया          कुलभूषण जाधव केस, ICJ में भारत की बड़ी जीत, फांसी की सजा पर रोक, पाकिस्तान को सजा की समीक्षा का आदेश          गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान, कहा- सभी घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को करेंगे देश से बाहर          पीएम नरेंद्र मोदी सितंबर में अमेरिका जाएंगे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों से उनकी मुलाकात हो सकती है। इस दौरान दुनिया के कई अन्‍य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की संभावना है          भाजपा को 2016-18 के बीच 900 करोड़ रू से ज्यादा चंदा मिला, एडीआर की रिपोर्ट में आया सामने          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार          बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने किया तेज सेना का गठन           भ्रष्ट अफसरों को जबरन वीआरएस दिया जाए, ऐसे लोग नहीं चाहिए-योगी आदित्यनाथ         
होम | देश | गांधी परिवार के बिना क्या चल पाएगी कांग्रेस ?

गांधी परिवार के बिना क्या चल पाएगी कांग्रेस ?


लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। एक महीने से ज़्यादा समय तक मान मनौव्वल करवाने के बाद आज राहुल ने पत्र लिखकर दो टूक कह दिया कि न वे और न ही गांधी परिवार का कोई सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा। इसके बाद वर्किंग कमेटी ने 90 साल के मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बना दिया, लेकिन पूर्णकालिक अध्यक्ष की तलाश तेज कर दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता कांग्रेस को चला सकता है। ऐसे समय में जब हर तरफ मोदी-मोदी की गूंज है और राषट्रवाद उफान मार रहा है, तो क्या कांग्रेस को नई दिशा देने वाला कोई नेता है।

 वैसे नेहरू, इंदिरा और राहुल गांधी के काल के बाद 1991 से 1996 तक नरसिंह राव और फिर 1996 से 1998 तक सीताराम केसरी कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन जिस दिन सोनिया गांधी ने राजनीति में आने का मन बना लिया, तभी सीताराम केसरी को बेआबरू करके बाहर फेंक दिया गया। यानी जब गांधी परिवार के किसी शख्स ने चाह लिया कि पार्टी वही चलाएगा तो फिर बाहर के किसी नेता के लिए कोई जगह नहीं। लेकिन इसका नुकसान ये हुआ कि पिछले पांच साल से मोदी ने कांग्रेस को एक पार्टी की जागीर साबित करके बहुत बहुत सियासी नुकसान पहुंचा दिया है। राहुल गांधी को समझ में आ गया है कि अगर आगे मोदी से मुकाबला करना है तो उनका परिवारवाद वाला हथियार खत्म करना पड़ेगा, इसीलिए उन्होंने पार्टी अध्यक्ष छोड़ ही दिया,. लेकिन अच्छी तरह ये जताने के बाद कि पूरी पार्टी गांधी परिवार को ही चाहती है, इसलिए उनका परिवार कांग्रेस को संभाले हुए है, न कि विरासत के कारण। हो सकता हो कि राहुल गांधी जनता को ये समझाने में कामयाब हो जाएं कि लेकिन ऐसी सूरत में दूसरा नेता जो भी अध्यक्ष बनेगा, क्या कांग्रेसी उसे स्वीकार कर पाएंगे ?

 

सूत्रों का दावा है कि नया अध्यक्ष जिसे भी बनाया जाएगा, इतना तय है कि वो गांधी परिवार का बेहद वफादार होगा, जैसे कि मनमोहन सिंह पीएम रहे। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है, लेकिन वे सीएम की कुर्सी छोड़कर नाम के लिए इस पद पर आने को तैयार नहीं हैं। दूसरा नाम है गुलाम नबी आज़ाद का। आज़ाद को बनाने से मुसलिम वोटों को लुभाने में आसानी होगी, लेकिन जिस तरह मोदी ने राष्ट्रवाद का हल्ला मचा रखा है, उससे निपटने में कांग्रेस को दिक्कत आएगी। तीसरा नाम केरल के 56 साल के नेता केसी वेणुगोपाल का है, जिन पर राहुल  गांधी एके एंटनी से भी ज़्यादा भरोसा करने लगे हैं। पार्टी में मनमोहन सिंह, अमरिंदर सिंह और एके एंटनी का नाम भी चल रहा है, लेकिन इनकी उम्र बहुत ज़्यादा हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस दो राहे पर खड़ी हो नज़र आ रही है।

 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: