रविवार, 21 जुलाई 2019 | 08:51 IST
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चार धाम यात्रा पर बांबे हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने उठाए गंभीर सवाल


उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा मार्ग में सरकार भले ही बेहतर इंतजाम का दावा कर रही हो मगर यहां की अव्यवस्थाओं व खामियों को लेकर बांबे हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस पत्र का जनहित याचिका के रूप में नैनीताल हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। इसमें मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तीर्थाटन, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत उत्तरकाशी को पक्षकार बनाया है। साथ ही सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 

 चारधाम यात्रा से लौटे महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के.आर.श्रीराम ने उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर चारधाम यात्रा के दौरान आई कई खामियां गिनाई हैं । न्यायाधीश के.आर.श्रीराम ने मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन को पत्र लिखकर कहा है कि चारधाम में आपदा का इंतजार हो रहा है । यमुनोत्री में तत्काल सुरक्षा के उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग में कई किलोमीटर तक कोई पुलिस का जवान मौजूद नहीं रहता है। जिससे स्वास्थ्य अथवा दूसरे आपातकाल में मदद नहीं मिल पाएगी। इसके अलावा न्यायाधीश ने यात्रा मार्ग में बैठने की कोई बेंच, कुर्सी अथवा दूसरी सुविधा की बड़ी कमी का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि उन्होंने खच्चर से जबकि उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने दांडी से पहाड़ों के मट्टी भरे और पथरीले मार्गों से यात्रा तय की, उन्हें इन लंबे मार्गों पर कोई आराम करने की जगह नहीं मिली। न्यायाधीश ने बताया है कि उनका दल फ़ाटा से केदारनाथ और केदारनाथ से फाटा हैलीकॉप्टर से आया-गया,लेकिन इसके लिए उन्हें केदारनाथ में हैलीकॉप्टर के लिए साढ़े तीन घंटे इंतजार करना पड़ा और वहां आराम कक्ष भी नहीं था, हालांकि उत्तराखण्ड पुलिस ने उन्हें और पत्नी को अपने कक्ष में बैठने का स्थान दिया।  आम यात्रियों के लिए इन स्थानों में कोई आरामगाह नहीं है।

न्यायाधीश के.आर.श्रीराम ने लिखा हैं कि चार धाम मार्ग में सामान्य भोजन की व्यवस्था भी नहीं है। कई स्थानों में दुकानें इतनी नजदीक-नजदीक बनी हैं कि वहां आग लगने अथवा भगदड़ मचने पर काफी जानमाल का नुकसान हो सकता है। बद्रीनाथ और गंगोत्री में अगर आग लगती है तो बचने की कोई जगह नहीं है और अग्निशमन विभाग भी अपना काम नहीं कर सकेगा। मुख्य न्यायाधीश ने पत्र को जनहित याचिका के रूप में लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तीर्थाटन और सी.ई.ओ.श्री.बद्री श्री.केदार मंदिर समिति को पक्षकार बनाया है ।

 आपको बता दें कि महाराष्ट्र से चार धाम यात्रा पर आए न्यायाधीश ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पांच पन्नों के पत्र में कहा है कि उनके ग्यारह सदस्यीय दल को 22 मई से एक जून तक चारधाम यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  उत्तराखंड बेहद खूबसूरत है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ को जोडऩे वाली केंद्र सरकार की फोर लेन योजना ने सभी के दिलों को खुश कर दिया है।



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