मंगलवार, 28 जनवरी 2020 | 05:40 IST
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149 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग,16 जुलाई की मध्यरात्रि को चंद्र ग्रहण चंद्र ग्रहण पर क्या करें,क


इस बार गुरु पूर्णिमा पर्व वाले दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। गुरु पूर्णिमा पर यह लगातार दूसरे साल चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्र ग्रहण था। क्योंकि ग्रहण से पहले सूतक लग जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा के कार्यक्रम सूतक लगने से पहले तक ही होंगे।

इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई 2019 को है। यह आंशिक रूप से होगा और भारत में दिखाई देगा। इसका समय 16 जुलाई की देर रात यानी रात 01:31 से सुबह 04:31 तक रहेगा। इस ग्रहण का असर भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी होगा।

माना जाता है कि सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। एक दुर्लभ योग इस बार के चंद्र ग्रहण पर बन रहा है।

जानें ग्रहण काल में क्या करना शुभ होता है ...

- ग्रहण काल में स्नान आदि करके जप, तप मंत्रोच्चार आदि के साथ विशेष अनुष्ठान भी किये जाते हैं।

- कहा जाता है कि ग्रहण काल में किए गए जप, तप, अनुष्ठान व दान का अधिक महत्व होता है और इसका फल भी आम दिनों से अधिक मिलता है।

- ग्रहण काल में भोजन भी नहीं किया जाता बल्कि सूतक से पहले ही भोजन कर लिया जाता है। यह नियम बच्चों, बुजुर्गों व अस्वस्थ पर लागू नहीं होता।

क्या न करें .....

- ग्रहण काल में भोजन नहीं किया जाता क्योंकि इसका अशुभ फल मिलता है।

- ग्रहण काल में स्त्री समागम करने की गलती भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके अशुभ फल प्राप्त होते हैं।

- ग्रहण काल में परनिंदा करने की बजाय इष्ट का ध्यान करेंगे तो बेहतर होगा।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं ये सब न करें ....

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में कई सावधानियां बरतने को कहा जाता है क्योंकि इससे उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है। माना जाता है कि ग्रहण के समय जो दूषित किरणें निकलती है गर्भवती महिला के होने वाले बच्चे पर बुरा असर डाल सकती है।

इस तथ्य के धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। वहीं कुछ सावधानियां बरतकर गर्भवती महिला अपने साथ अपने होने वाले बच्चे का ध्यान भी रख सकती है।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं का बाहर न निकलना ही बेहतर होता है। बाहर निकलने और ग्रहण देखने का सीधा असर उनके होने वाले बच्चे पर हो सकता है।

ग्रहण की किरणों के असर से बच्चा शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार हो सकता है या फिर उसके शरीर पर न मिटने वाले दाग भी रह सकते हैं। तो बेहतर यही होगा कि गर्भवती महिलाएं उस समय बाहर न निकलें।

- माना जाता है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में नुकीली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बेहतर तो यही होगा कि वह इन चीजों को हाथ भी न लगाए। कहते हैं कि उनके नुकीली चीजों के इस्तेमाल से शिशु के अंगों को नुकसान हो सकता है।

- ग्रहण काल के दौरान बना खाना खाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए क्योंकि उसमें दूषित किरणों का असर हो सकता है। इससे तो बेहतर यही होगा कि वह घर के बने खाने में तुलसी के पत्ते डाल दे और फिर ग्रहण के बाद उसका इस्तेमाल करे।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगने वाला यह ग्रहण धनु राशि में होगा। 2019 में कुल 2 चंद्र ग्रहण हैं। जिसमें से पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को लग चुका है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण था और अब जुलाई में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है।

वर्ष 1870 में 12 जुलाई को यानी 149 साल पहले बना था। जब गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था और उस समय भी शनि, केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में स्थित था। सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था।

ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति: शनि और केतु ग्रहण के समय चंद्र के साथ धनु राशि में रहेंगे। जिससे ग्रहण का प्रभाव ज्यादा पड़ेगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र भी रहने वाले हैं। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। इस दौरान मंगल नीच का रहेगा।

\ग्रहों का यह योग और इस पर लगने वाला चंद्र ग्रहण तनाव बढ़ा सकता है। ज्योतिष अनुसार भूकंप का खतरा रहेगा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने के योग भी बन रहे हैं।

 

 



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