रविवार, 17 नवंबर 2019 | 07:19 IST
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बी मोहन नेगी के चित्र शिल्प में काव्य सँग्रह जीवन पथ पर निशंक का विमोचन


राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पौड़ी के सभागर में कलावंत बी मोहन नेगी जी की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जी के काव्य संग्रह जीवन पथ में निशंक का विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम का बीजकथन साहित्यकार नरेंद्र कठैत जी ने रखा साथ ही उन्होंने कहा कि बी मोहन जी नाम पर एक संग्रहालय और गढवाली कुमाउंनी भाषा के पुस्तकालय बनाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखित ज्ञापन स्वरूप इन बातों उठाया। इस विषय पर सरकार की उदासीनता पर उन्होंने कहा मैं अकेला गया भीड़ संस्था या झुंड में नही गया शायद इसलिए उनको एक व्यक्ति की बात का वजन न लगा हो।

जीवन पथ में निशंक काव्य संग्रह पर मुख्य अतिथि बैचेन कंडियाल ने भावात्मक रूप से पुस्तक से जुड़ी कही जानकारी के साथ बी.मोहन नेगी जी के जीवन पर कही विचार मंथन में रखे साथ उन्होंने आश्वासन दिया की वो सरकार से जुड़े होने के नाते बी मोहन जी कला को म्यूजियम और विश्व विद्यालयो में उनके कार्यो को उचित स्थान मिले इसके लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा मैं व्यक्तिगत प्रयासों से उनकी कला प्रदर्शनी और कार्यो में उनकी स्मृति को कार्यक्रम दो या तीन जरूर रखूँगा।

इस अवसर पत्रकार और साहित्यकार त्रिभुवन उनियाल ने कहा कि बी मोहन नेगी जी के कार्यो का कोई संग्रालय,संस्कृति नगरी पौड़ी में होना चाहिए जहा नेगी जी कार्यों को सहेजा जा सके। इस मंथन में साहित्यकार संदीप रावत ने कहा कि बी मोहन नेगी जी कार्यो और कविता पोस्टर चित्र और कला के विभिन्न आयामों को उचित स्थान मिले इसके लिए पौड़ी में एक आर्ट गैलरी होनी चाहिए।

इस अवसर साहित्यकार विमल नेगी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि बी मोहन जैसे व्यक्ति सदा अजर अमर होते उनके किये गये कार्यो को देख लगता है। इस व्यक्ति के पास इतना समय कहा से आता रहा होगा। वह एक अमर व्यक्तित्व हैं और रहेंगे। इस अवसर गढवाली साहित्यकार एवं गीतकार वीरेंद्र पँवार ने कहा कि बी मोहन जी के अपनी कला के माध्मय से जो कविता पोस्टर उकेरे है,वह अद्वितीय है साथ ही आज बी मोहन नेगीजी के व्यक्तित्व औऱ कृतित्व पर उन्होंने उनके कार्यो पर एक आर्ट गैलरी हो इस विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर बी मोहन नेगी जी की सोशल मीडिया में भूमिका पर उनके कॉमेंट उनके पोस्ट और उनके विचारों पर विचार रखते हुए शैलेन्द्र जोशी ने उनको रँग से बढ़ कर बहुआयामी कलावंत कहा साथ उनको चलती फिरती कला साहित्य संस्कृति आकदमी की संज्ञा दी।

कार्यक्रम  अध्यक्षता विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी गौरीशंकर थपलियाल ने की,उन्होंने कहा की मैं बी मोहन जी को प्रेम से काका हाथरसी कहता था। क्योंकि साठ के दशक में काका हाथरसी को देख जो छवि उतरी थी। जब बी मोहन नेगी को देखता था तो बिल्कुल वही चेहरा मेंरी आंखों के समाने होता था। मैं उनको सदा काका कहता रहा और वो इतने हाजिर जवाबी थे,बोलते थे,बोल मेरे आका,ऐसे व्यक्ति के ऊपर एक डाक्यूमेंट्री बननी चाहिए। जिसका ड्रामा पार्ट भी बने जिससे नई पीढ़ी तक बी मोहन नेगी जैसा व्यक्तित्व पहुँचे। उन्होंने कहा कि बी मोहन नेगी जी के काम को संग्रालय के रूप में सहेजा जाए।

इस अवसर पर स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई और इन बच्चों को  सम्मानित किया गया। बी मोहन नेगी जी के कविता पोस्टर प्रदर्शनी भी सभागर में लगाई गई थी।

इस कार्यक्रम आयोजन बी मोहन नेगी स्मृति न्यास की तरफ से किया गया था। इस मौके पर बी.मोहन नेगी जी की धर्मपत्नी कल्पेशरी देवी द्वारा स्मृति चिन्ह और स्मृति ग्रन्थ स्मृति स्वरूप अतिथियों को प्रदान किए गए। कार्यक्रम में नेगी जी के दोनों पुत्र कुलवधू और पोती सहित सपरिवार मौजूद रहे। बी.मोहन नेगी जी के पुत्र आशीष मोहन नेगी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए अपने पिता श्री बी मोहन नेगी जी की कविता ’आज के माधो’ का काव्य पाठ  भी किया। कार्यक्रम संचालन वीरेंद्र खंकरियाल ने किया।



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