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उत्तराखण्ड की पांचों सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस में सीधी टक्कर


लगभग एक महीने चले अभियान के बाद बुधवार शाम को उत्तराखंड में प्रचार का शोर थम गया। देश की 18वीं लोकसभा चुनने के लिए होने वाले चुनाव के पहले चरण में उत्तराखंड की पांचों सीटों पर शुक्रवार को मतदान होगा।

इस बार भी राज्य में भाजपा और कांग्रेस के मध्य ही आमने-सामने की टक्कर होने जा रही है। यद्यपिबसपा मुस्लिम व अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बूते हरिद्वार व नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सीटों पर मुकाबले का तीसरा कोण बनने की कोशिश कर रही है।

भाजपा को पूरा भरोसा है कि मोदी फैक्टर पूरे राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेगाजबकि कांग्रेस की उम्मीदें 10 वर्ष की एंटी इनकंबेंसी पर टिकी हुई हैं। भाजपा जहां खुलकर प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर जन समर्थन मांग रही हैवहीं कांग्रेस की कोशिश अलग-अलग सीटों पर भाजपा को स्थानीय मुद्दों पर घेरने की रहीताकि मोदी से सीधे मुकाबले से बचा जा सके।

राम मंदिर निर्माण व राज्य में केंद्र की मदद से चल रही विकास परियोजनाओं का विषय भी चुनाव में प्रभावी रहेगा। इस सबके बावजूद मतदाताओं की खामोशी चुनावी ऊंट की करवट का अंदाजा नहीं लगाने दे रही है। उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर 83.37 लाख मतदाता कुल 55 प्रत्याशियों के राजनीतिक भाग्य का फैसला करेंगे। परंपरागत रूप से यहां महासमर के मुख्य मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस ही आमने-सामने रहती हैं और इस चुनाव में भी तस्वीर कुछ अलग नहीं।

वैसेहरिद्वार और नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सीट पर बसपा की कोशिश मुकाबले को त्रिकोणीय शक्ल देने की हैलेकिन उसे मिलने वाले मत किसे फायदा या नुकसान पहुंचाएंगेबसपा की भूमिका इस दृष्टिकोण से अवश्य निर्णायक हो सकती है। क्षेत्र विशेष के मुद्दों को लेकर अलग-अलग सीटों पर मैदान में उतरे निर्दलीय समेत कुछ प्रत्याशी भी ताल ठोक रहे हैंलेकिन जीत-हार के अंतर को प्रभावित करने के अलावा इनकी भूमिका चुनाव में क्या रहती हैयह नतीजों के बाद ही साफ होगा।

वर्ष 2014 व 2019 के बाद लगातार तीसरी बार पांचों सीट पर जीत की हैट्रिक लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा स्टार प्रचारकों के मामले में कांग्रेस से कहीं आगे रही। भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीराष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डारक्षा मंत्री राजनाथ सिंहकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धुंआधार प्रचार किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रचार अभियान के मोर्चे पर डटे रहे। उधरकांग्रेस के लिए बड़े नेताओं में केवल केवल प्रियंका गांधी वाड्रा ही उत्तराखंड पहुंचीं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी यहां एक जनसभा की। मतदान के लिए अब लगभग 24 घंटों का ही समय बचा हैलेकिन मतदाता की खामोशी ने राजनीतिक तापमान को बढ़ाने के बजाय स्थिर रखा है। पिछले चुनावों की भांति दीवार लेखनपोस्ट-बैनर और झंडे शहरी क्षेत्रों में कम ही सहीदिख रहे हैंलेकिन ग्रामीण इलाके अब भी सूने ही नजर आ रहे हैं।



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