सोमवार, 8 अगस्त 2022 | 05:59 IST
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दिल्ली में ‘बवाल’, आप में उबाल’, बीजेपी का ‘धमाल’


क्या केजरीवाल सरकार पर इस बार मोदी सरकार ने पूरी तरह शिकंजा कस लिया है। इस बार मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी के साथ ही ‘आप’ पर सबसे बड़ा सियासी हमला होगा ? आम आदमी पार्टी के नेताओं के त़ड़कते, भड़कते बयान क्या इशारा कर रहे हैं ? 
या हर बार की तरह इस बार भी केजरीवाल ये कहकर मामले को हल्का करने में कामयाब हो जाएंगे कि ‘ये तो लोग उनके पीछे पड़े ही रहते हैं। हम तो जी, बहुत ईमानदार लोग हैं।‘   
जी नहीं, इस बार मामला इतना हल्का नही है। पूरी कहानी और अंदर की बात सिलसिलेवार आपको बताएंगे। 

 

पहले आपको बैकग्राउंडर बता देते हैं- 
आम आदमी पार्टी की दिल्ली मॉडल की पूरे देश में चर्चा है। खुद सीएम केजरीवाल और उनके बाकी दूसरे नेता घूम घूमकर इसका प्रचार करते रहते हैं। हाल ही में पंजाब के चुनाव उन्होंने इसी दम पर जीत कर दिखाया। इसके बाद हिमाचल और गुजरात में भी उनकी सभाओं में भीड़ जुटती है। एमपी में भी आप का मेयर बना- यानी आम आदमी पार्टी का वोट बैंक पूरे देश में बढ़ रहा है।– इसमें कोई दो राय नहीं है। इसमें भी कोई दो-राय नहीं है कि बीजेपी को लगने लगा है कि आप ऐसे ही आगे बढ़ती रही तो उनके लिए मुख्य चुनौती बन जाएगी। तो सियासी लड़ाई में दोनों पार्टियां एक दूसरे पर हमला करती रहती हैं, ज़ाहिर तौर पर केन्द्र सरकार भी दिल्ली सरकार के कामकाज पर पूरी नजर रखती है और कहीं भी गड़बड़ी मिलते ही उस पर बड़ी से बड़ी कार्रवाई करने में पीछे नहीं रहती। इसी का नतीजा है कि आप के मंत्री सत्येन्द्र जैन सहित तीन दर्जन विधायकों पर कार्रवाई हुई है और कई जेल भी गए। 
इस बार क्या हुआ है ? 

 


पिछले काफी समय से दिल्ली में सुगबुगाहट है कि सरकार के डिप्टी सीएम और आप में नंबर दो माने जाने वाले मनीष सिसौदिया के खिलाफ कोई बड़ा करप्शन का मामला मिल गया है। दिल्ली सरकार के डिप्टी सीएम  मनीष सिसौदिया 19 विभागों का जिम्मा संभालते हैं। उन पर आरोप है कि दिल्ली की आबकारी नीति यानी शराब बेचने की नीति में बदलाव करने में उन्होंने नियमों की धज्जियां उड़ाईं। दिल्ली के मुख्य सचिव ने 14 जुलाई तो इसकी एक जांच रिपोर्ट दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना और सीएम ऑफिस को सौंपी। एलजी साहब ने इस पर आज सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। केजरीवाल जो दो तीन महीने से अपनी हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनीष सिसौदिया के खिलाफ चल रही साजिश की बात कह रहे थे, वो इसी जांच रिपोर्ट की पेशबन्दी  थी। अब जांच में क्या निकल कर आता है, ये तो बाद में पता लगेगा, लेकिन इससे पहले कि मुद्दा बने और मीडिया में ये परसेप्शन बने कि मनीष सिसौदिया ने कोई घोटाला किया है, केजरीवाल और पूरी आम आदमी पार्टी ने दो महीने पहले से ही बचाव शुरू कर दिया था, और वही उन्होंने आज मीडिया से कहा भी, कि देखिए, हम तो पहले से बोल रहे थे। इसी मुद्दे पर आज  सीएम केजरीवाल, बेधड़क बोलने वाले सांसद संजय सिंह, प्रवक्ता सौरव भारद्वाज सहित कई नेता मोर्चे पर आए और मोदी सरकार और बीजेपी को खूब खरीखोटी सुनाई। संजय सिंह ने तो सुष्मिता सेन और ललित मोदी का एंगल भी डालकर अपने आरोपों को मसालेदार बनाने की भी अच्छी कोशिश की। उनका कहना था कि सुष्मिता सेन ने तो ललित मोदी को ढूंढ लिया, लेकिन मोदी सरकार ललित मोदी को नहीं ढूंढ पा रही है। जाहिर तौर पर आम आदमी पार्टी का सियासी आक्रमण और डिफेंस बहुत मजबूत है, जिसके दम पर मुसीबत आने से पहले ही बचाव के रास्ते तैयार करने शुरू कर देते हैं और यही कारण है कि इतनी शक्तिशाली सरकार से मुकाबला कर पा रही  है। 

 

 

उधर बीजेपी का क्या कहना है ? 
दिल्ली में इतने बड़े घोटाले पर दिल्ली बीजेपी के नेताओं ने भी केजरीवाल को खूब घेरा। सांसद मीनाक्षी लेखी, सांसद गौतम गंभीर और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता सहित सभी बड़े नेताओं ने केजरीवाल की पोल खोली। ये कहा गया कि पूरे देश में घूम घूमकर फ्री -फ्री करने वाले केजरीवाल दरअसल शराब माफिया को बढ़ावा दे रहे हैं। केजरीवाल मॉडल में करप्शन शामिल है और ईमानदारी का नाटक करने वाले केजरीवाल शराब माफिया से कमीशन लेकर गली-गली शराब बेचने की छूट देते हैं। 

 


तो ये तो हो गई आरोप-प्रत्यारोप और उसका जवाब। आप उस रिपोर्ट में क्या है, जो मुख्य सचिव ने एलजी को सौंपी है? 
मुख्य सचिव की रिपोर्ट बेहद गंभीर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस समय कोरोना महामारी के दौर में गरीब प्रवासी मजदूर दिल्ली छोड़कर पैदल जाने को मजबूर थे, आम लोगों का कारोबार ठप पड़ा था, ढाबे, रेस्त्रां, होटल, जिम, स्कूल सब बन्द थे, उस समय दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कमीशन लेकर शराब कारोबारियों के 144 करोड़ माफ कर दिए। अब ये जो आबकारी नीति में बदलाव करने का काम हुआ है, ये मनीष सिसौदिया जी के आदेश से हुआ है। जाहिर है सीबीआई जब जांच करेगी तो सबसे पहले निशाने पर मनीष सिसौदिया ही आएंगे। उसके बाद उनकी गिरफ्तारी की भी आशंका है। 

 


केजरीवाल का विरोधी पक्ष कहता है कि केजरीवाल सरकार उस 144 करोड़ के बदले गरीब लोगों को बड़ी राहत दे सकती थी। बीजेपी का तो यहां तक कहना है कि आम आदमी पार्टी ने खुद कमीशन लेकर सरकारी खजाने को तगड़ा चूना लगाया। शराब माफिया को दिल्ली में खुली लूट की परमिशन देकर केजरीवाल मुफ्त का नाटक करते हैं। 


अब आपको बताते हैं अंदर की बात। 
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देखिए सियासी लड़ाई में सत्ता धारी पार्टी पूरे दमखम से विरोधी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ती- वही बीजेपी भी कर रही है- इसमें नया क्या है। जब कांग्रेस सत्ता में हुआ करती थी, वो भी यही सब करती थी- भले ही इतने आक्रामक तरीके से तब नहीं होता था। लेकिन आज जांच रिपोर्ट आने से पहले ही विरोधी को कठघरे में खड़ा करने और एक परसेप्शन तैयार करने की कोशिश की जाती है, जिसमें काफी हद तक कामयाबी मिल भी जाती है। उधर आम आदमी पार्टी का जो फ्री वाला मॉडल है, वही उसकी कामयाबी का मजबूत आधार है। तो वो उसको छोड़ तो नहीं सकती,  उल्टे वो और जोरशोर से उसका समर्थन करके सियासी फायदा लेती है। जब बिल फ्री में माफ किए जाएंगे तो जाहिर तौर पर कहीं न कहीं सरकारी खजाने को उसकी भरपाई करनी ही पड़ेगी। इसकी भरपाई के लिए केजरीवाल ने शराब को बढ़ावा देने का रास्ता चुना, जो न केवल बेहद खतरनाक है, बल्कि लंबे समय के लिए समाज के लिए घातक भी है। पार्टी चलाने में भी काफी खर्च होता है, उसका भी इंतजाम करना पड़ता ही है। उस पर केन्द्र सरकार की पूरी नजर हर खर्च पर लगी रहती है, उसका भी ध्यान रखना है। 
आप सांसद संजय सिंह मानते हैं कि दिल्ली को 1300 करोड़ का फायदा पहुंचाया गया नई शराब नीति से। उससे विकास के काम करेंगे। लेकिन यहां सवाल उठता है कि सरकारी खजाने को भरने के लिए अगर केवल शराब की बिक्री ही बढ़ाना एक रास्ता है तो फिर बढ़ चढ़कर इतनी बातें क्यों ? क्यों नहीं जनता को बताया जाता कि आपको जो भी हम फ्री में दे रहे हैं, उसकी भरपाई शराब की बिक्री बढ़ाकर कर रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली का जो धन विकास में खर्च होना चाहिए, उतना विकास हो नहीं पाता, क्योंकि पैसा नहीं होगा तो विकास के कामों पर असर पड़ेगा। मॉनसून के इस सीज़न में जो दिल्ली की हालत, आप देख ही रहे होंगे। 

 


अब सवाल उठता है कि अगर सीबीआई जांच में मनीष सिसौदिया बेदाग निकले, उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला तो क्या होगा ? यही आम आदमी पार्टी का कहना है कि उसके नेताओं को झूठे केस में फंसाया जाता है, एक परसेप्शन क्रिएट किया जाता है ताकि सियासी फायदा उठाया जा सके। ज़ाहिर तौर पर अगर मनीष सिसौदिया गिरफ्तार होते हैं तो इससे आप की इमेज पर असर पड़ेगा। किसी पार्टी के नंबर दो नेता पर इतने खतरनाक साबित होते लग रहे हों तो जो ईमानदारी वाली ब्रैंडिंग है, उस पर तगड़ा डेन्ट लगेगा ही। लेकिन सियासी लड़ाइयों में ऐसा ही होता है। 

 


तो कुल मिलाकर ये फ्री के विकास के मॉडल को बनाए रखने और उसकी पोल खोलने की सियासी लड़ाई है। आने वाले समय में इसमें दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर और तीखे हथियार इस्तेमाल करेंगे, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।



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