सोमवार, 15 जुलाई 2024 | 04:18 IST
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मोदी ने भजन लाल शर्मा को क्यों बनाया राजस्थान का सीएम?


छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश में पिछड़े समाज के नेता मोहन यादव और अब राजस्थान में सवर्ण समुदाय से भजन लाल शर्मा को बीजेपी ने सीएम का पद सौंप दिया है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में ब्राह्मण आबादी के वोटों को देखते हुए ये फैसला लिया गया। सांगानेर से पहली बार विधायक बने भजन लाल शर्मा का नाम कहीं भी दावेदारी में नहीं था, लेकिन बीजेपी ने उनको सीएम बनाकर चौंका दिया। इससे पहले मध्य प्रदेश में भी मोहन यादव का नाम कहीं नहीं था और नाम सुनकर सब चौंक गए थे। भजन लाल शर्मा तो पहली बार विधायक बने थे, लेकिन लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए थे। राजस्थान में भी एक सीएम, दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला अपनाया गया है। दलित नेता प्रेम चंद बैरवा और राजपूत महारानी दीया कुमारी को डिप्टी सीएम बनाया गया है। स्पीकर के लिए वासुदेव देवनानी का नाम फाइनल किया गया है। भजन लाल शर्मा का नाम सामने आने के बाद कहा जाने लगा है कि वसुंधरा राजे को बड़ी मुश्किल से मनाया गया है। वसुंधरा हर हाल में एक साल के सीएम का पद मांग रही थीं। वे राजस्थान से लेकर दिल्ली तक के चक्कर लगाकर आ गईं थी. वसुंधरा के अशोक गहलोत से अच्छे संबंध सबको पता है, इसलिए मोदी डर रहे थे कि कहीं वसुंधरा पार्टी न तोड़ दें। लेकिन मोदी जी किसी भी हाल में सवर्ण समुदाय को सीएम का पद देना चाहते थे, ताकि 2024 के चुनाव में फायदा मिल सके। इसके बाद राजनाथ सिंह को काम पर लगाया गया। उनके वसुंधरा से संबंध अच्छे हैं। राजनाथ ने जयपुर आकर वसुंधरा से अकेले में बैठक की., सूत्रों का दावा है कि वसुंधरा को समझाया गया कि इस बार सवर्ण नेता को सीएम बनाना जरूरी है.. वसुंधरा नहीं मान रही थीं. फिर उनकी पार्टी अध्यक्ष नड्डा से बात करवाई गई.. सबने उनको कहा कि केवल चुनाव तक बात मान जाइए.. उसके बाद पार्टी आपकी बात सुनेगी और आपको पूरा सम्मान देगी.. फिर सवर्ण की बात आई तो प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी का नाम आया.. लेकिन वसुंधरा ने उनके नाम को वीटो कर दिया.. वसुंधरा को डर था कि सीपी जोशी बड़े कद के नेता हैं, वो अगर बन गए तो वसुंधरा की बात कोई नहीं सुनेगा.. बात चलते चलते भजन लाल शर्मा पर आकर बन गई, ,क्योंकि वो पहली बार विधायक बने हैं. संगठन से व्यक्ति हैं, और सबको लेकर चलते हैं..

जयपुर में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर पहुचे कद्दावर नेता राजनाथ सिंह ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को मना लिया। वसुंधरा ने ही भजन लाल शर्मा के नाम का प्रस्ताव किया, जिसे सबने मान लिया. भरतपुर के रहने वाले भजन लाल शर्मा संगठन में लंबे समय से कार्यरत हैं. वे प्रदेश महामंत्री के तौर पर कार्य करते रहे हैं. बीजेपी ने उन्हें पहली बार जयपुर.. की सांगानेर जैसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाया और पहली बार में ही वे सीएम बने हैं. मौजूदा विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटकर भजन लाल शर्मा को टिकट दिया गया था। भजन लाल शर्मा पहली बार विधायक बने हैं. वे 4 बार प्रदेश महामंत्री रहे हैं. RSS और ABVP से जुड़े रहे हैं.

सांगानेर सीट भाजपा का गढ़ है. ऐसे में भजन लाल शर्मा ने जीत दर्ज की. संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद से नवाजा गया है।

राजस्थान में करणपुर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी 199 सीटों पर 25 नवंबर को चुनाव कराए गए थे।इसके नतीजे 3 दिसंबर को आए। राजस्थान विधानसभा चुनाव के सियासी घमासान में कांग्रेस को पछाड़ कर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस को 69 सीटें ही मिल सकीं। इसके अलावा 15 सीटें अन्य के खाते में गईं। मुख्यमंत्री बनने के लिए पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, अभी डिप्टी सीएम बनाई गईं दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मीणा समाज के बड़े नेता

किरोड़ी लाल मीणा और हिन्दुत्व के पोस्टर ब्वाय बाबा बालक नाथ का नाम चल रहा था। इसके अलावा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी रेस में बने हुए थे।

हालांकि राजस्थान भाजपा के नेताओं का भी मानना है कि भजन लाल शर्मा को चुनाव लड़ाने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय कर लिया था, क्योंकि सांगानेर की जिस विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़वाया गया था, वह पारंपरिक तौर पर भाजपा की सीट रही है और वहां से उसके विधायक लगातार जीतते रहे हैं। भजनलाल शर्मा को एक बेहद सुरक्षित सीट से चुनावी मैदान में उतारना एक सोची समझी रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। राजस्थान में लगभग 18 फीसदी ब्राह्मण आबादी भी भजनलाल शर्मा के चुनाव का प्रमुख आधार बनी है।



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