सोमवार, 24 फ़रवरी 2020 | 06:33 IST
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बसुकेदार,भगवान शिव का बसेरा


बसुकेदार उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जनपद में स्तिथ अत्यंत मनोहारी शिव मंदिर है। जो कि एक हजार वर्ष प्राचीन और सदियों से आस्था का प्रतीक माना जाता रहा है। माना जाता है कि भगवान शिव केदारनाथ जाते समय यहीं से होकर गए थे। पांडव भी भगवान शिव को ढूढते हुए यहाँ पहुंचे थे। शिव के पांडवों पर नाराज होने के कारण यहाँ पर भगवान् शिव का बैल रूप उन्हें दिखाई दिए थे। माना जाता है कि यह मंदिर पांडवों द्वारा बनाया गया था जहां पर उन्होंने एक दिन विश्राम किया था ।

सदियों से केदारनाथ यात्रा इसी मंदिर से होते हुए गुजरती थी। लेकिन सड़क मार्ग आने के बाद यात्रा मार्ग बदल गया। लेकिन यह मंदिर अभी भी हजारों लोगों कि श्रद्धा का प्रतीक है। इस स्थान से चौखम्बा का सुन्दर और मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। 
बसुकेदार एक पवित्र धार्मिक स्थान है। बसुकेदार अत्यन्त धार्मिक पोराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाला स्थान है,इसके महत्व का वर्णन केदारखण्ड व स्कन्दपुराण में भी किया गया है। माना जाता है कि जब पाण्ङव स्वर्गारोहण के लिए इस पावन भूमि मेँ आए थे तो उनका एक रात्रि का विश्राम इस स्थान पर हुआ था और यहाँ पर उनके द्वारा एक भव्य मन्दिर समूह का निर्माण किया गया और यह सर्वविदित है कि केदार भूमि के मन्दिरो का निर्माण पाण्डवो ने किया था। इसलिए यहाँ पर इनकी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि जब पाण्डवों द्वारा इस स्थान पर मन्दिरों का निर्माण किया जा रहा था तो उनके कार्य में कुछ विघन उत्पन हुआ,तत्पश्चात सबेरा हो गया और पाण्डव यहाँ से केदारनाथ को प्रस्थान कर गये वहाँ पर भी उनके द्वारा एक भव्य मन्दिरों के समूह का ऩिर्माण किया गया अतः प्राचीन ग्रन्थों व पुराणों में बसुकेदार को भी केदारनाथ के समतुल्य माना गया है। कुछ समय पूर्व तक बसुकेदार में केदारनाथ के समान ही तप्तकुण्ड आदि पाये जाते थे। जो वर्तमान मे देख-रेख के अभाव मे विलुप्त हो चुके हैं। बसुकेदार को आज भी प्रथम केदार के रुप मे माना जाता है। बसुकेदार शब्द के बसु से तात्पर्य है कि बासा,हिन्दी में बसेरा,अर्थात् भगवान केदार या शिव का इस स्थान पर बसेरा है। इस स्थान के पोराणिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए आज अन्य स्थानों के नाम भी बसुकेदार पड़ने लगे हैं। पर वास्तव मे यही एक पोराणिक एवं धार्मिक स्थान है। जो उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जनपद-विकासखण्ड अगस्त्यमुनी से 22कि.मी. दूरी पर स्थिति है। यहाँ अनेक सड़क मार्गों से पहुंचा जा सकता है। कहते हैं यदि आपने एक बार बसुकेदार धाम के दर्शन कर लिए तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। बसुकेदार एक अत्यन्त सुन्दर व मनोहारी स्थल भी है इसके उत्तर मेँ हिमालय पर्वत(चोखम्भा)स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता हैं यह ब्रिटिशकाल से ही शिक्षा केऩ्द्र के रुप में बी प्रसिद्ध रहा है।



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