शुक्रवार, 4 दिसम्बर 2020 | 07:20 IST
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पारंपरिक जड़ी-बूटियां कोरोना वायरस के मरीजों के लिए साबित हो रही है वरदान


कोरोना काल से पहले लोग योग और आयुर्वेद के बारे में जानते जरूर थे लेकिन आयुर्वेदिक उपायों का इस्तेमाल कम करते थे। कोरोना काल में योग और आयुर्वेद ब्रह्मास्त्र साबित हुए। गिलोय, अदरक, काली मिर्च और हल्दी के काढ़े ने न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में लोगों की इम्यूनिटी को बूस्ट किया। इससे ये साफ हो गया कि बीमारी कोई भी क्यों न हो आयुर्वेद के पारंपरिक पक्के तरीकों से उसका इलाज हो सकता है। बस जरूरी है कि योग और आयुर्वेद को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करें। आयुर्वेद को औषधियों का खजाना कहा गया है। वैसे तो आयुर्वेद में लगभग 1200 जड़ी बूटियां हैं। हर जड़ी बूटी के अपने फायदे होते हैं लेकिन उसका ज्ञान होनी भी बहुत जरूरी है।

1. हल्दी : इसमें आठ फीसद उडऩशील तेल है। विटामिन-ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह दुर्बलतानाशक, प्रमेहनाशक, श्वास कफनाशक है।

2. आंवला : यह कैल्शियम का बड़ा स्रोत है। इसमें संतरे और नारंगी से 20 गुना विटामिन सी है। सौ मिलीलीटर रस में 921 मिलीग्राम और गुदे में 720 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है। इसमें न्यूरोटानिक होते हैं। यह कफ व कासनाशी भी है।

3. असगंध : इसमें .31 फीसद से 4.3 फीसद तक एल्कलायड हो सकता है। यह मस्तिष्क शामक, नर्वसतंत्र, कासश्वास नाशक गुणधर्म वाला है।

4. गिलोय : इसमें बर्बरिन एल्कलायड, गललीन ग्लूकोसाइट होता है। इसका तेल उडऩशील है। कास शामक, दुर्बलतानाशक व एंटी वायरल भी है।

5. शतावार : इसमें सैपोनिन रसायन घटक है। यह दुर्बलतानाशक, बलवर्धक है।

6. अजवायन : इसमें थायमाल पांच फीसद होता है। इसका तेल सुगंधित होता है। यह कफनाशी, ज्वर व शीतज्वर में उपयोगी होता है।

7. तुलसीपत्र : इसमें पीतवर्ण का उडऩशील तेल होता है। इसमें कैल्शियम, जिंक, आयरन पाया जाता है। यह कफनाशक, कास श्वास, ज्वर नाशक में उपयोगी व एंटीआक्सीडेंट होता है।

8. नीमपत्र : नीम के बीज में 45 फीसद मार्गोसिन तेल पाया जाता है। यह कास, जीर्ण ज्वरनाशक है।

9. काली मिर्च : काली मिर्च में विटामिन-ए पाया जाता है। यह जुकाम, कास व श्वास रोगों में उपयोगी है।

10. सौंठ : इसमें विटामिन, ए, बी, सी मिलता है। इसका तेल उडऩशील होता है। यह कफ श्वास, कास में उपयोगी। जीर्ण ज्‍वर में काफी कारगर।

सहजन की फलियों एवं पत्तियों को दाल या करी में डालकर खाएं। इसमें विटामिन ए व अन्य तत्व बड़ी मात्रा में होते हैं। सहजन में एंटी बैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसकी पत्तियों का पाउडर बनाकर लें। लाल मिर्च या लाल शिमला मिर्च में मौजूद विटामिन सी एंटी आक्सीडेंट और इम्युनिटी को बढ़ाने वाला है। सेब, पपीता, अंगूर, नाशपाती से सेवन से शरीर एल्कलाइन रहती है, जो इम्युनिटी बढ़ाती है। लहसुन की दस कलियां एक लीटर पानी में घंटेभर उबालें और आधा पानी रहने पर घूंट-घूंटकर पीएं। पानी में त्रिफला, हल्दी, मुलेठी, और सेंधा नमक डालकर उबालें और गरारा करें। गले में पहुंचे वायरस खत्म हो जाएंगे। लेकिन ध्यान रखें इन सारी पारंपरिक जड़ी-बूटियों को प्रयोग हमेशा डाक्टर और आयुर्वेदिक जानकारों की देख रेख में ही करें।



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