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रिसर्च- अब इंसान का बुढ़ापा आना रुक जाएगा, 80 साल तक रहेगी जवानी



नवीन पाण्डेय 
 इंसान मरता क्यों है और शरीर बूढ़ा होता  क्यों है, इन दो सवालों के पीछे इंसान पिछले हजारों साल से लगा हुआ है। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए पिछले कई दशकों से रिसर्च चल रही थी। इस रिसर्च में इंसान का बुढ़ापा रोकने और उम्र का बढ़ाने की कोशिशें चल रही थीं, जिसमें कामयाबी मिलती दिख रही है। 
2013 में गूगल के को-फाउंडर लैरी पैज ने एक कंपनी शुरू की थी कैलिको। California Life Company से बनी कैलिको का मकसद 
इंसानी शरीर में बुढ़ापा लाने वाले कारणों की खोज और उसको दुरुस्ंत करने की मेडिसिन तैयार करना था। कैलिको के दो
टॉप साइंटिस्ट हैल बैरन और डैफने कोल्लर अपनी रिसर्च के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुके थे, लेकिन 2017 में किसी कारण 
कैलिको से अलग हो गए। इसके बाद ये दोनों अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की कंपनी एल्टॉस लैब्स से जुड़ गए। हैल बेरन एल्टॉस लैब के सीईओ हैं।  
दो साल पहले इजरायली वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बुढ़ापा रोकने यानी एंटी एजिंग के कुछ हैरान कर देने वाले निष्कर्ष निकाले थे। 
चौथी रिसर्च इंग्लैंड के लाइबाबराहम इंस्टीट्यूट ने शुरू की थी, जिसमें ह्यूमन बॉडी के सेल्स यानी सबसे छोटी इकाई कोशिका
पर काम किया जा रहा है, जो बुढ़ापा लाने का कारण बनती है। 
एक रिसर्च के मुताबिक़ बुढ़ापे में कैंसर, अल्जाइमर और हड्डियों की कई बीमारियों का शिकार होकर दुनिया भर में हर रोज करीब एक लाख बुजुर्गों की मौत होती है। बुढ़ापा दुनिया भर के लिए चिंता का विषय है। बड़े-बड़े वैज्ञानिक और रिसर्चर इस अवस्था से बचने के उपाय सोच रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बुढ़ापा रोकने में कुछ खास किस्म के कीड़े और थ्री-डी प्रिंटेड ऑर्गन मुख्य भूमिका निभाएंगे।
बुढ़ापे में ज्यादातर लोगों की मौत शरीर के नाजुक अंगों जैसे दिल, जिगर और गुर्दों के काम बंद करने की वजह से होती है। अगर ये नाजुक अंग हमेशा स्वस्थ रहें या इनके खराब होने पर सेहतमंद अंग ट्रांसप्लांट कर दिए जाएं तो ज्यादा वक्त जिया जा सकता है
अब थोड़ा इतिहास में चलते हैं। महाभारत में एक बहुत ही हैरान कर देने वाली कथा का वर्णन आता है। 
आपने महाभारत में प्रतापी राजा नहुष के बेटे ययाति की कहानी जरूर सुनी होगी, जो अपने ससुर शुक्राचार्य के शाप के कारण अचानक से बुढ़े हो गए थे। उन्होंने शुक्राचार्य की बेटी देवयानी से शादी की, लेकिन देवयानी के साथ आई सुन्दर दासी शर्मिष्ठा से भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर कर लिया। ससुर जी को पता लगा तो उनकी पूरी जवानी छीनकर बुढ़ा बना दिया, बाद में बिटिया ने समझाया, ये हमारे हसबैंड है, ये तो ज़्यादा हो जाएगा, मेरा ही नुकसान होगा, तो फिर उपाय बताया।  इसके तहत अगर ययाति के पांच बेटों में से कोई अपनी जवानी दे दे तो वे फिर जवान हो सकते हैं। तब उनके बेटे पुरु ने अपनी जवानी उनको दे दी और खुद बुढ़े हो गए। कई सौ साल बाद  ययाति जो जब अहसास हुआ कि बेटे के साथ नाइंसाफी हो गई है तो उनको जवानी लौटा दी और संन्यास ले लिया। इन्हीं पुरु महाराज के वंश में आगे चलकर कौरव-पांडव हुए थे। कहानी आपको इंट्रस्टिंग लगी तो महाभारत में पूरी पढ़ सकते हैं, यहां केवल बुढ़ापा रोकने के संदर्भ में इसका इस्तेमाल किया गया है। 
ईसा पूर्व में यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस ने सबसे पहले इंसानी उम्र रोकने की कल्पना की थी। उसके बाद सन 1550 में एक इतालवी रईस लुइगी कॉरनारो ने द आर्ट ऑफ लिविंग लॉन्ग किताब लिखकर लंबी उम्र जीने के बारे में अपनी रिसर्च बताई थी, जो बड़ी काम की थी। कहने का मतलब ये है कि बुढ़ापे को रोकने की तरकीबें इंसान हजारों साल से खोजता आ रहा है। 
अब समझ लीजिए, नया क्या हुआ है। हमने आपको ऊपर चार रिसर्च के बारे में बताया था। सबसे पहले बात ईजरायल की रिसर्च में किया निकला है। 
इजरायल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी ने कई जानी मानी कंपनियों के साथ मिलकर की। इन्होंने 64 साल के ऊपर के 35 व्यक्तियों को तीन महीने तक प्योर ऑक्सीजन में रखा, तो नतीजे हैरान करने वाले आए। इन 64 साल के उम्र के लोगों में एंटी एजिंग शुरू हो गई। 
आपने साइंस में पढ़ा होगा कि ह्यूमन बॉडी में जो क्रोमोज़ोम्स पाए जाते हैं, वे डीएनए से तैयार होते हैं। इन क्रोमोज़ोम्स में व्यक्ति की पूरी जेनेटिक जानकारी छुपी होती है। इन क्रोमोज़ोम्स के आखिरी हिस्से या यूं कहें कि पूंछ को टेलोमियर कहते हैं, आसान भाषा में समझें तो ये टेलोमियर गाड़ी में आगे और पीछे लगे बंपरों जैसे होते हैं। क्रोमोज़ोम्स अपनी संख्या लगातार बढ़ाते रहते हैं और अपनी 
कॉपी तैयार करते रहते हैं। इस दौरान पुराने और नए क्रोमोज़ोम्स को किसी हादसे या टक्कर से बचाने का काम टेलोमियर करते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली इस टक्कर से टेलोमियर घिसने लगते हैं और लंबाई में छोटे होते चले जाते हैं। जब यह लंबाई में बहुत छोटे हो जाते हैं तो क्रोमोज़ोम्स अपनी कॉपी तैयार नहीं कर पाते. इसके कारण नए सेल्स नहीं बन पाते और इंसान का बुढ़ापा शुरू हो जाता है। ये कोशिकाएं लगातार डेड होती जाती हैं और इंसानी शरीर में झुर्रियां पड़ने लगती हैं और कई बीमारियां घेर लेती हैं। 
इजरायल के वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में इसी टेलोमियर को घिसने से रोकने का फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इसके बाद ऑक्सीजन थिरैपी से उन सेल्स को जिन्दा करने में कामयाबी हासिल की है, जो मरने लगी थी। इसके बाद इस प्रयोग में शामिल इन बुजुर्गों की उम्र न 
बढ़ना न केवल रुक गई, बल्कि नई कोशिकाएं बनने के कारण वे युवा दिखने लगे। यानी सिर्फ 3 महीने में इन वैज्ञानिकों ने रिवर्स एजिंग की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया। जब कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान उम्र से कम उम्र का दिखने लगता है तो उसे रिवर्स एजिंग कहते हैं अर्थात उसकी उम्र उल्टी दिशा में जाने लगती है और वह वापस जवान दिखने लगता है ।वैज्ञानिक इस प्रयोग के अंतिम स्टेज पर पहुंच चुके हैं। 
इज़रायल के समाजशास्त्री युवल नोह हरारी ने अपनी किताब 
होमोडेयस में कहा है कि आने वाले कुछ दशकों में इंसान देवता से कम नहीं होगा।  धार्मिक लोगों के लिए मृत्यु भले ही ईश्वर द्वारा लिया हुआ बड़ा फैसला हो लेकिन वैज्ञानिकों के लिए मृत्यु शरीर में आने वाला एक टेक्निकल ग्लिच है। शरीर एक मशीन की तरह है और जब इसमें कोई टेक्निकल ग्लिच अर्थात तकनीकी खामी आती है तो यह निष्क्रिय हो जाता है और इसी को मृत्यु कहते हैं। उनका मानना है कि इस तकनीकी खामी को वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में दूर करके मृत्यु को टाला जा सकता है।
भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक . केशव के. सिंह ने चार साल पहले 
एक शानदार रिसर्च के नतीजों का ऐलान किया था। उनकी रिसर्च प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में बताई गई कायाकल्प विधि जैसी है। 
बर्मिंघम में अलबामा यूनिवर्सिटी में जेनेटिक्स, पैथोलॉजी और एन्वायरमेंटल हेल्थ के प्रोफेसर डॉ. केशव के. सिंह ने दिखाया कि माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन उम्र बढ़ने से जुड़ा है और चूहों में कृत्रिम रूप से माइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन धीमा किया जाना तेजी से उम्र बढ़ने से जुड़ा था. अध्ययन का निष्कर्ष है कि माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन को दुरुस्त कर बढ़ती उम्र की त्वचा को ज्यादा युवा, स्वस्थ हालत में बहाल किया जा सकता है और बालों के विकास को भी बढ़ाया जा सकता है.
इस अध्ययन में, चूहों को डॉक्सीसाइक्लिन नाम की एक दवा देकर उम्र बढ़ने को कृत्रिम रूप से तेज किया गया, और जैसे ही दवा बंद की गई, चूहों पर उम्र का असर खत्म (de-aged) हो गया, या कहें कि उनकी त्वचा ज्यादा जवान हो गई और उनके बालों का निश्चित विकास फिर से शुरू हो गया। यही प्रयोग इंसानों पर चल रहे हैं। 
इंग्लैंड की एक्सटर यूनिवर्सिटी में मॉलिक्युलर जेनेटिक्स की प्रोफेसर लोरेना हैरिस का कहना है कि बहुत जल्द रिसर्च के जरिए ऐसे रसायन तैयार कर लिए जाएंगे जिनकी मदद से बूढ़ी हो रही कोशिकाओं को फिर से जवान किया जा सकेगा और मौजूदा कोशिकाओं को बूढ़ा होने से रोका जकेगा। इससे ना सिर्फ उम्र में इजाफा होने की उम्मीद है बल्कि बहुत सी बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलेगी।
इन सभी रिसर्च के नतीजे ये भरोसा देते हैं कि इंसानी उम्र को रोकने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यानी दस साल के भीतर वो समय आ सकता है, जब इंसान बुढ़े होने बन्द हो जाएंगे। आज जिनकी उम्र चालीस साल है, वे ये दौर देख लेंगे। बुढ़ापा रोकने में कामयाबी मिली तो इंसानी शरीर 200 साल तक भी काम करता रह सकता है। लेकिन इसके साथ हेल्दी लाइफ स्टाइल और हेल्दी फूड बहुत जरूरी होगा। 
अब सवाल उठता है कि अगर इंसान दो सौ साल तक जीने लगा तो क्या होगा ? विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक धरती पर 10 अरब लोग होंगे। अभी का अनुमान है कि अगर आज के जैसी मृत्यु दर रही नए बच्चों की जन्मदर घट गई तो सन 2100 के बाद धरती की ऑबादी तेजी से घटेगी, लेकिन अगर एंटी एजिंग का फॉर्मूला कामयाब हो गया तो आबादी घटेगी नहीं, इसके लिए दूसरे ग्रहों में इंसान को बसाने की योजना तेज करनी पड़ेगी। ज़्यादा जीने पर धरती का दोहनज़्यादा होगा, ज़्यादा खाना, पानी, कपड़े और मकान चाहिए होंगे , जिसका बोझ उठाने के रास्ते पहले से तैयार करने होंगे। लंबे समय तक जवान रहने पर आप काम 60 साल के बाद भी करते रहेंगे, ऐसे में रोजगार का संकट भी आएगा। सरकारों को उसकी तैयारी अभी से करनी होंगी। जब इंसान बीमार कम पड़ेंगे तो हो सकता है कि डॉक्टर्स की जरूरत कम पड़े, इसी तरह मेकअप की जरूरत भी उतनी नही रह जाएगी, क्योंकि महिलाओं का चेहरा  हमेशा एक जैसा ही रहेगा। तो तैयार रहिए लंबी उम्र के लिए। 

 



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