शुक्रवार, 7 अगस्त 2020 | 09:51 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
पीएम मोदी ने रखी राम मंदिर की नींव, देश भर में घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर मनाई जा रही है खुशियां          उत्तराखंड में भूमि पर महिलाओं को भी मिलेगा मालिकाना हक          सीएम रावत ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को लिखा पत्र,उत्तराखंड में आइटी सेक्टर में निवेश करने का किया अनुरोध           कोरोना के चलते रद्द हुई अमरनाथ यात्रा,अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने रद्द करने का किया एलान           कोटद्वार में अतिवृष्टि से सड़क पर आया मलबा, बरसाती नाले में बही कार, चालक की मौत          चारधाम देवस्थानम बोर्ड मामले में उत्तराखंड सरकार को बड़ी राहत,सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका हाईकोर्ट          प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से की केदारनाथ के निर्माण कार्यों की समीक्षा, कहा धाम के अलौकिक स्वरूप में और भी वृद्धि होगी          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार         
होम | उत्तराखंड | सीएम त्रिवेंद्र का एलान,आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगी एक-एक हजार की सम्मान निधि

सीएम त्रिवेंद्र का एलान,आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगी एक-एक हजार की सम्मान निधि


उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को एक-एक हजार रुपये सम्मान निधि के तौर पर देने का एलान किया है। इससे 50 हजार कार्यकर्ता लाभांवित होंगे। सरकार ने इसी के साथ सफाई कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के वेतन से प्रतिमाह होने वाली एक दिन की वेतन कटौती नहीं करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण मित्रों ने स्वयं एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया था, लेकिन अब सरकार ने निर्णय लिया है कि चतुर्थ श्रेणी और पर्यावरण मित्रों के वेतन से कोई धनराशि नहीं कटेगी। सरकार ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए सरकारी कर्मचारियों के वेतन से एक दिन का वेतन प्रतिमाह काटने का निर्णय लिया था। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान यह कटौती की जानी है। राज्य के सीमांत क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र विकास निधि के तहत 27 सीमांत ब्लाकों के लिए प्रावधान किया है। इसको लेकर सेना, आईबी और अन्य एजेंसियों से फीडबैक भी लिया गया कि किस तरह से सीमांत क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। आर्थिक आपातकाल नहीं लगा जो वेतन काट दिया कर्मचारी संगठनों ने वेतन कटौती के मामले में हाईकोर्ट की ओर से प्रदेश सरकार से जवाब मांगें जाने का समर्थन किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में कोई आर्थिक आपातकाल नहीं लगा है, जो सरकार उनके वेतन की कटौती को लेकर मनमाना फैसला ले लिया। उनकी राय में सरकार का यह कदम उनके मौलिक अधिकार में दखलंदाजी है। वे सरकार को आगाह कर रहे हैं कि यदि सरकार ने वेतन कटौती के मामले में हठधर्मिता दिखाई तो कोरोनाकाल समाप्त होने के बाद कर्मचारी डीए फ्रीज करने और वेतन कटौती के फैसले के खिलाफ आर पार की जंग लड़ेंगे। राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद ने खुलासा किया है कि वह भी वेतन कटौती के मामले में न्यायालय जाने पर विचार कर रहा है। वेतन कटौती किन नियमों के तहत की गई, इस बारे में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी गई है। सूचना प्राप्त होने पर कानूनी राय लेने के बाद परिषद कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन कर्मचारियों का हक है और उनकी सहमति के बगैर सरकार इसमें कोई कटौती नहीं कर सकती है। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने वेतन कटौती, डीए फ्रीज करने व कर्मचारियों के लंबित मसलों पर तत्काल प्रभाव से त्रिस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की। संगठन ने वेतन कटौती के फैसले को असांविधानिक करार दिया। इस मसले पर कई कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।

© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: