सोमवार, 27 सितंबर 2021 | 03:40 IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का केंद्र सरकार को सुझाव,गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए संसद में लाना चाहि


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को लेकर केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा के हैं वह गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें। कोर्ट ने अपने सुझाव में कहा कि केन्द्र सरकार संसद में बिल लाकर गायों को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दें। कोर्ट ने वैदिक,पौराणिक,सांस्कृतिक महत्व व सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए गाय को  राष्ट्रीय पशु घोषित करें।

कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को माता मानते हैं। यह हिंदुओं की आस्था का का विषय है। आस्था पर चोट से देश कमजोर होता है। कोर्ट ने कहा गो मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। यह भारतीय कृषि की रीढ़ है।

कोर्ट ने कहा पूरे विश्व में भारत ही एक मात्र देश है जहां सभी संप्रदायों के लोग रहते हैं। पूजा पद्धति भले ही अलग-अलग हो,सोच सभी की एक है। यहां एक दूसरे के धर्म का आदर करते हैं।

न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने संभल के जावेद की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि गाय को मारने वाले को छोड़ा तो फिर अपराध करेगा।

आपको बता दें कि याची पर साथियों के साथ खिलेंद्र सिंह की गाय चुराकर जंगल में  अन्य गायों सहित मारकर मांस इकट्ठा करते टार्च की रोशनी में देखें जाने का आरोप है। जो  8 मार्च 21 से जेल में बंद हैं। शिकायतकर्ता ने गाय के कटे सिर से पहचान की थी। तब आरोपी मोटर साइकिल छोड़ कर भाग गए थे। अर्जी पर शासकीय अधिवक्ता एस के पाल  व  ए जी ए मिथिलेश कुमार ने प्रतिवाद किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा 29 में से 24 राज्यों में गोवध प्रतिबंधित है। एक गाय जीवन काल में 410 से 440 लोगों का भोजन जुटाती है। गोमांस से केवल 80 लोगो का पेट भरता है। महाराजा रणजीत सिंह ने गो हत्या पर मृत्यु दण्ड देने का आदेश दिया था। कई मुस्लिम व हिंदू राजाओं ने गोवध पर रोक लगाई। मल-मूत्र असाध्य रोगों में लाभकारी है। गाय की महिमा का वेदों पुराणों में बखान किया गया है। रसखान ने कहा जन्म मिले तो नंद के गायों के बीच मिले। गाय की चर्बी को लेकर मंगल पाण्डेय ने क्रांति की। संविधान में भी गो संरक्षण पर बल दिया गया है।



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