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समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सभी क्षेत्रों को मिलकर काम करने की जरूरत-अजीत डोभाल


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शुक्रवार को कहा कि आने वाले वक्त में समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर तीन ऐसे क्षेत्र होंगे, जिसमें देशों को तमाम अवसरों के साथ चुनौतियां भी मिलेंगी। गोवा मेरीटाइम कॉन्क्लेव में लोगों को संबोधित करते हुए डोभाल ने भारत के पड़ोसियों से कहा कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सभी को मिलकर काम करना चाहिए। बता दें कि गोवा के पणजी में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में दस देशों के नौसेना इन सभी अतिथियों को भारत सरकार की ओर से संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि आने वाले वक्त में समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर ऐसे तीन क्षेत्र होंगे, जो सबसे बड़े अवसर देंगे लेकिन ये ही वह तीन क्षेत्र होंगे, जहां से सबसे गंभीर खतरे भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि देशों के समक्ष चुनौती यह है कि खतरों को किस तरह से कम से कम किया जा सके और अधिक से अधिक अवसरों का लाभ उठाया जा सके। डोभाल ने कहा कि हम एक महत्वाकांक्षी देश हैं, जो क्षेत्र में शांति देखना चाहते हैं और देशों को तरक्की और विकास करते देखना चाहते हैं।

डोभाल ने कार्यक्रम में शामिल देशों को क्षेत्रीय समुद्री रणनीतियों में एक दूसरे का पूरक बताया और कहा कि बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है, लेकिन शायद हममें से कोई भी अकेला अपने दम पर उन्हें करने में सक्षम नहीं है। लेकिन मगर हम मिलकर ये काम करने में सक्षम हैं। एनएसए ने कहा कि जो देश इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं, उन सभी के बीच किसी भी प्रकार का कूटनीतिक संघर्ष नहीं है और भारत सरकार की इच्छा है कि वह अपने पड़ोसियों के लिए उपयोगी हो सके।

डोभाल पणजी में चल रहे ‘गोवा मेरिटाइम कॉन्क्लेव’ में बोल रहे थे। यह सम्मेलन दूसरी बार आयोजित हुआ है। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दस देशों के नौसेना प्रमुख भी शामिल हुए। ये दस देश हैं - 
श्रीलंका
मालदीव
बांग्लादेश
म्यामांर
थाइलैंड
इंडोनेशिया
मॉरिशस
सेशेल्स
सिंगापुर
मलयेशिया

डोभाल ने कहा कि 'भोगौलिक रूप से भारत कई मायनों में लाभ की स्थिति में हैं। हम महत्वाकांक्षी देश हैं। क्षेत्र में शांति देखना चाहते हैं। देशों को तरक्की और विकास करते हुए देखना चाहते हैं।'

उन्होंने इस सम्मेलन में शामिल देशों को क्षेत्रीय समुद्री रणनीतियों में एक दूसरे का पूरक बताया। कहा कि 'बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। लेकिन शायद हममें से कोई भी अकेला अपने दम पर वे कदम उठाने में सक्षम नहीं है। लेकिन अगर हम साथ मिलकर काम करें, तो वो सभी कदम उठाने में सक्षम होंगे। इसलिए समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए। नई दिल्ली अपने पड़ोसियों के लिए उपयोगी बनना चाहती है।



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