मंगलवार, 28 जनवरी 2020 | 07:39 IST
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उच्च न्यायालय पहुंचा उत्तराखंड में आपातकालीन 108 स्वास्थ्य सेवा का मामला


उत्तराखण्ड में चलने वाली 108 स्वास्थ्य सेवा सुविधा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। इस मामले पर न्यायालय ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब देने के साथ सेवा दे रही कैम्प कंपनी को भी नोटिस जारी किया है। देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनु पन्त ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका डाल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 के स्तर में आयी  गिरावट पर न्यायालय को अवगत कराया। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2008 में उत्तराखंड ने कई राज्यों की तरह 108 स्वास्थ्य सेवा, आपातकाल स्वास्थ्य सहुलियतों के लिए शुरू की थी।

याचिका में कहा गया हैं कि प्रथम दस वर्ष में 10,000 से अधिक बच्चों का जन्म एम्बुलेंस में हुआ था। वर्ष 2018 में 'रिक्वेस्ट फार प्रोपोजल डॉक्यूमेंट' के आधार पर नई कम्पनी, कैम्प कम्पनी को 108 स्वास्थ्य सेवा का संचालन सौंप दिया गया। इसमें मुख्य बात यह है कि, कैम्प कम्पनी ने नियमों को ताक पर रखकर आपातकालीन स्वास्थ सेवा चलाई गई, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों के खिलाफ है। एम्बुलेंस में प्रशिक्षित आपातकाल तकनीकी स्टाफ (Qualified emergency medical technician, E.M.T.) की जगह अप्रशिक्षित कर्मचारी बैठे है। इन लोगों को तीन दिन के मौखिक प्रशिक्षण के बाद जीवनदायनी कार्य की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दे दी गई है।

 कैम्प कम्पनी का अनुभव केवल शव वाहन चलाने का था फिर उन्हें किस आधार पर लाया गया। याचिका में ये भी कहा गया है कि एम्बुलेंस के चालकों को भी, पहाड़ में वाहन चलाने के अनुभव कम होने की वजह से एक माह में ही 11 एक्सीडेंट सामने आ गए। पिथौरागढ़ से लेकर देहरादून तक अधिकांश ज़िलों में एक्सीडेंट पाए गए थे। याचिकाकर्ता ने कैम्प के निदेशक के उस सार्वजनिक कथन का भी संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने कहा की एम्बुलेंस जान बचाने के लिए नही केवल मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए है। अनु पंत ने न्यायालय को बताया कि एक प्रशिक्षित ई.एम.टी.को बाहर कर दिया गया,जो दो माह से बिना काम के परेड ग्राउंड पर आंदोलन करने को विवश है। यह भी कहा गया है कि नीति आयोग की जून 2019 की रिपोर्ट में उत्तराखंड की परफॉर्मेंस आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा में देश में सबसे खराब आंकी गई है। 

इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से केवल दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है,और वर्तमान में 108 का संचालन कर रही कैम्प कम्पनी को भी नोटिस जारी किया गया है।

 



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