मंगलवार, 16 जुलाई 2019 | 04:06 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
दिल्ली-एनसीआर में हुई झमाझम बारिश, गर्मी और उमस से मिली राहत          हिमाचल प्रदेश के सोलन में इमारत गिरने की वजह से अब तक सेना के 6 जवानों सहित सात लोगों की मौत           भारतीय क्रिकेट टीम के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम दो खेमों में बंट गई है          पीएम नरेंद्र मोदी सितंबर में अमेरिका जाएंगे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों से उनकी मुलाकात हो सकती है। इस दौरान दुनिया के कई अन्‍य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की संभावना है          अयोध्या केस मध्यस्थता पैनल 18 जुलाई को पेश करे रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश          भाजपा को 2016-18 के बीच 900 करोड़ रू से ज्यादा चंदा मिला, एडीआर की रिपोर्ट में आया सामने          बैंकों और बीमा कंपनियों में लावारिस पड़े हैं 32,000 करोड़ से भी ज्यादा पैसे, नहीं है कोई दावेदार          बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने किया तेज सेना का गठन           भ्रष्ट अफसरों को जबरन वीआरएस दिया जाए, ऐसे लोग नहीं चाहिए-योगी आदित्यनाथ         
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साहित्य

डॉ. हरिसुमन बिष्ट को रवींद्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय सम्मान

द्वितीय गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगौर अंतरराष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार-2019 के लिए प्रतिष्ठित कथाकार, लेखक, नाट्यलेखक डॉ. हरिसुमन बिष्ट को चुना गया है। दिल्ली सरकार में सचिव, हिन्दी अकादमी के रूप में उल्लेखनीय कार्य कर चुके श्री बिष्ट की प्रमुख कृतियाँ हैं - उपन्यास- (1) ममता (2)आसमान झुक रहा है (3)होना पहाड़ (4)आछरी-माछरी (5) बसेरा(6) भीतर कई एकांत । कथा संग्रह - (1)सफेद दाग (2)आग और अन्य कहानियाँ 3)मछरंगा (4)बिजूका (5)मेले की माया (नव साक्षरों के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित) (6)उत्तराखण्ड की लोक कथाएं (2011(नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित) । यात्रा-वृतांत-(1)अन्तर्यात्रा (1998) बांग्ला में अनुवाद ‘आमार ए पोथ‘ (2014)। नाटक- 'ख्वाब एक उड़ता हुआ परिन्दा था '(2012) । उन्होंने कुमांउनी के सुप्रसिद्ध कवि दिवान सिंह की पुस्तक ‘‘दिवानी विनोद’’ का हिन्दी में अनुवाद भी किया है। और पढ़ें »

कुमाऊंनी भाषा में ‘छिलुक’ उपन्यास का विमोचन

उत्तराखंडी संस्कृति को उजागर करने के लिए दिल्ली के गढ़वाल भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंडी लेखक...... और पढ़ें »

चित्रकार, साहित्यकार एवं कार्टूनिस्ट: बी. मोहन नेगी

उत्तराखंड के प्रख्यात रंगकर्मी, चित्रकार, साहित्यकार एवं कार्टूनिस्ट बी.मोहन नेगी, जो कि अपनी..... और पढ़ें »

नोबेल के इतिहास में यह कैसी भूल जिसकी नहीं हो सकती भरपाई

नोबेल पुरस्कारों की शुरूआत स्वीडन के एल्फ्रेड नोबेल के नाम पर.... और पढ़ें »

आखिर क्यों पसंद है माँ को उल्लू की सवारी ?

माँ लक्ष्मी संपन्नता और धनधान्य की प्रतीक हैं। जिन्हें सभी देवी देवताओँ में सबसे ज्यादा पसंद किया..... और पढ़ें »

एक ऐसा पौधा जिसका जहर कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक

इंसान पेड़ पौधों का उपयोग प्राचीन काल से ही करता आ रहा...... और पढ़ें »

साहित्य है समाज की सबसे बडी जरूरत

इंटरनेट के इस युग में आज भी 35 प्रतिशत आबादी.... और पढ़ें »

इन महिलाओँ ने नही किए होते ये आविष्कार तो क्या होती हमारी जिंदगी ?

अगर किसी आविष्कारक का नाम आए तो ज्यादातर थॉमस एडिसन, एलेग्जेंडर ग्राहम बेल आदि वैज्ञानिकों के नाम ही सामने.... और पढ़ें »

बारिश की भेंट चढ़ा भारत का उर्दू साहित्य, नाले में बही बेश कीमती धरोहर

भोपाल की अल्लामा इकबाल लाइब्रेरी के बेसमेंट में नाला फटने से लगभग 80 हजार ज्यादा किताबे पानी की भेंट चढ़..... और पढ़ें »

मंच पर जी उठा ‘देवदास’

प्रेम की पूर्णता उसे पाने में नहीं, बल्कि उसे उत्सर्ग करने में है, इसे केंद्र में... और पढ़ें »

कलाप्रेमी कंस क्यों बन गया था क्रूर, दिल्ली में मंचित नाटक ने दिया जवाब

दिल्ली में 4 जुलाई को गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, तथास्तु एवं... और पढ़ें »

फ्योंली दास स्टीफन फ्योल समर्पित रचना

फ्योंली दास स्टीफन फ्योल समर्पित रचना जोग ## जै ढोल दमौ कु हमुन नि जाणी क्वी मोल देखादी कन्नु भलु बजाणु अमरिका कु स्टीफन फ्योल और पढ़ें »

भारत विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने का दृढ़ संकल्प

मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि जहां भी अन्याेय होता है वहां न्याोय को खतरा है। यह केवल वैधानिक न्याय के बारे में ही नहीं... और पढ़ें »

श्रोताओं के मन को स्पर्श करती है रेडियो की ध्वनि...

जब नील नदी की लहरों की कलकल सी गुनगुनाती ध्वनि ‘’मुझे छूती है, तुम्हें छूती है’’ तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे मधुर स्वदरों में कोई कैरॉल गा रहा हो, ऐसे ही रेडियो की ध्वनि.... और पढ़ें »

क्या कोई स्त्री किसी पुरूष का हरण कर सकती, प्रेम की यह कैसी अदभुत कहानी......

चित्रलेखा ने द्वारिका जाकर सोते हुये अनिरुद्ध को पलंग सहित उषा के महल में पहुँचा दिया। नींद खुलने पर अनिरुद्ध ने स्वयं को एक नये स्थान पर पाया और देखा कि उसके पास एक अनिंद्य सुन्दरी बैठी हुई है। अनिरुद्ध के पूछने पर उषा ने बताया कि वह वाणासुर की पुत्री है और अनिरुद्ध को पति रूप में पाने की कामना रखती है। और पढ़ें »
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