शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024 | 09:33 IST
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प्रसिद्ध कुमाऊंनी गायक प्रह्लाद मेहरा का निधन, दिल का दौरा पड़ने से मौत

4 जनवरी 1971 को पिथौरागढ़ के धारचूला में चामी भैंसकोट गांव में जन्मे प्रहलाद मेहरा पूरे जीवन लोक संगीत की आराधना करते रहे। वे 1989 में केवल 18 साल की उम्र में ही आकाशवाणी के 'ए' ग्रेड कलाकार चुन लिए गए थे। और पढ़ें »

दिल्ली में तीसरे उत्तराखण्डी महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी बिखेरेंगे स्वर

भुम्याल विकास मंच के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड प्रकोष्ठ मयूर विहार जिला संयोजक दयाल सिंह नेगी ने बताया कि डीपीएमआई के चैयरमैन डॉक्टर विनोद बछेती, जो कि उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली एवं भुम्याल विकास मंच के संरक्षक भी हैं, उनके द्वारा 2012 से अपनी भाषा एवं संस्कृति को बचाने के लिए उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली के माध्यम से लगातार एक मुहिम चलाई जा रही है। और पढ़ें »

उत्तराखंड के इतिहासकार यशवंत सिंह कठोच को पद्मश्री, शिक्षा के क्षेत्र में किया बहुत काम

डॉ. कठोच पौड़ी जनपद के एकेश्वर विकासखंड स्थित मांसों गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने 1974 में आगरा विवि से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति तथा पुरातत्व विषय में विवि में प्रथम स्थान प्राप्त किया। और पढ़ें »

बेरीनाग में मिली छह हज़ार साल पुरानी गुफा, शैलचित्रों पर मानव आकृतियां

इस गुफा की खोज एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि इसमें शैलचित्र हैं जो 4000 से 6000 वर्ष से अधिक पुराने प्रतीत हो रहे हैं। और पढ़ें »

संजीव को हिंदी में तो नीलम शरण को इंग्लिश में मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

12 मार्च 2024 को कामायनी सभागार में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। साहित्य अकादमी 12 मार्च को अपने 70 वर्ष पूरे कर रही है, इसलिए समारोह महत्वपूर्ण होगा। पुरस्कार स्वरूप सभी विजेताओं को एक लाख रुपये और प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। और पढ़ें »

दो दिन देहरादून में जुटेंगे देशभर के साहित्यकार, इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल की धूम

16 और 17 दिसंबर को राजपुर रोड स्थित मधुबन होटल में आयोजित होने वाले लिटरेचर फेस्टिवल 100 लेखक प्रतिभाग करेंगे। इस मौके पर 12 पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। साथ ही तीन प्रदर्शनी भी लगाई जाएंगी। और पढ़ें »

माता सती के 52 शक्तिपीठों की महिमा जान लीजिए

माता के शरीर के अंग और आभूषण 52 टुकड़ों में धरती पर अलग अलग जगहों पर गिरे, जो शक्तिपीठ बन गए। माता सती के इन्हीं शक्तिपीठ के दर्शन करना चाहते हैं तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि देवी के 52 शक्तिपीठ कहां कहां स्थित हैं और सभी शक्तिपीठ के क्या नाम हैं। और पढ़ें »

दीवाली पर क्यों करते हैं पूजा ? दीवाली और लक्ष्मी-गणेश पूजन में अंतर जान लीजिए.

हिन्दू ग्रन्थों के मुताबिक दिवाली के दिन धन-संपदा और शांति के लिए लक्ष्मी और गणेश भगवान की विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. दिवाली में हर कोई अपने घर की सफाई कर उसे सुंदर देखना चाहता है, यही कारण है कि दीयों के इस त्योहार के दिन हर कोई घर की साफ-सफाई के साथ ही खूबसूरती से साज-सज्जा भी करता है. और पढ़ें »

धनतेरस पर ये काम करना न भूलें, पूरे परिवार को होगा फायदा

धनतेरस के दिन शाम को मां लक्ष्मी, कुबेर भगवान की पूजा करने के साथ यमराज की पूजा करने का विधान है. क्या आप जानते हैं कि धनतेरस के दिन यम का दीपक जलाने का क्या महत्व है और यह दीपक क्यों जलाया जाता है. और पढ़ें »

दीपावली पूजन की तैयारी और पूजन विधि

दीपावली एवं धनत्रयोदशी पर महालक्ष्मी के पूजन के साथ-साथ धनाध्यक्ष कुबेर का पूजन भी किया जाता है। कुबेर पूजन करने से घर में स्थायी सम्पत्ति में वृद्धि होती है और धन का अभाव दूर होता है। और पढ़ें »

गंगा नंदिनी जी का लेख- रक्षाबन्धन पर नारी सम्मान का प्रण भी करें

रक्षाबंधन के माध्यम से भाई-बहन दोनों एकदूसरे की रक्षा करते हैं. रक्षा का बंधन एक प्रतीक है, एक सेतु है रक्षा का. हमारी संस्कृति में एक ओर तो हम स्वतंत्रता को महत्व देते हैं परन्तु दूसरी ओर बंधन का उत्सव मनाते है, बंधन भी प्रेम का, धर्म का और मर्यादा का, जिसमें हम सहज भाव से प्रवेश करते हैं और यह एक ऐसा बंधन है जो हमें मुक्त करता है; दिशा देता है और हमारे मूल, मूल्य, जड़ों से जोड़ता है. और पढ़ें »

योगदा आश्रम पहुंचे सुपरस्टार रजनीकांत, बताया उन्हें किसके आशीर्वाद से मिलती है फिल्मों में सफलता

फिल्म स्टार रजनीकांत का द्वाराहाट के योगदा आश्रम और महावतार बाबा की गुफा से पुराना नाता रहा है। उन्होंने बताया कि बाबा के आशीर्वाद से ही उन्हें फिल्मों में अपार सफलता मिली। एक बार प्रशंसकों ने उन्हें महावतार बाबा की तस्वीर भेंट की, इसके बाद से ही उनमें स्वत: ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति जागृत हो उठीं। और पढ़ें »

कहानी- बिखरते रिश्ते...

*बेटा ...! जब घर में बड़े बुजुर्गों को प्यार नहीं मिलता.... उन्हें बहुत अकेलापन महसूस होता है , तो वे यहाँ वहाँ बैठ कर अपना समय काटा करते हैं !* और पढ़ें »

स्कूलों की प्रार्थना में गाया जा रहा है गिरदा का जनगीत

बद्री केदारा का द्वार छना, छना कनखल हरिद्वारा, म्यार हिमाला। काली धौली का छाना जानी, जानी नान ठुला कैलाशा, म्यार हिमाला और पढ़ें »

बर्फबारी घटने से उत्तराखंड के राज्य-पुष्प बुरांश पर संकट, जलवायु परिवर्तन का असर

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी एवं शोध केंद्र (हैप्रक) ने अंतरिक्ष उपयोग केंद्र और इसरो अहमदाबाद के सहयोग से बुग्याली क्षेत्रों के फूलों की निगरानी के लिए तुंगनाथ में एक फेनोकैम लगाया है। और पढ़ें »
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