शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023 | 04:56 IST
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धर्म-अध्यात्म

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर नहीं जा पा रहे तो यहां चले आइये

पशुपतिनाथ मंदिर गंगा तट पर श्रवणनाथ मठ के बीचोबीच स्थित है। यह मंदिर निरंजनी अखाड़े के विख्यात महंत श्रवणनाथ महाराज ने नेपाल नरेश विक्रम शाह को यहां बुलाकर बनवाया गया था। और पढ़ें »

भगवान मदमहेश्वर के शीतकालीन प्रवास पर निकलने से पहले कैसे होती हैं तैयारियां?

कपाट बन्द करने की तैयारियां के लिए मन्दिर समिति के पदाधिकारी जुटे हुए हैं। इसी के साथ ऊखीमठ मंदिर में भी तैयारियां चल रही हैं, जहां भगवान विराजित होंगे। बता दे कि पंच केदारों में द्वितीय केदार के नाम से विख्यात मदमहेश्वर धाम में भगवान शंकर के मध्य भाग की पूजा की जाती है! और पढ़ें »

उत्पन्ना एकादशी कब है? हिन्दू धर्म में एकादशी का इतना महत्व क्यों है ?

हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी तिथि पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं। और पढ़ें »

गढ़वाल की केदारघाटी में पांडव नृत्य की धूम

पंचाग की गणना के बाद पांडव लीला का शुभ दिन तय होता है। रुद्रप्रयाग जनपद के कई जगहों पर ग्रामीण अस्त्र-शस्त्रों के साथ पांडव नृत्य करते हैं। वहीं कई स्थानों पर मंडाण के साथ यह नृत्य होता है। कहा जाता है कि ये परंपराएं पांडवकाल से चली आ रही हैं। और पढ़ें »

दिन में चंद्रग्रण, रात में भूकंप का कनेक्शन !

ज्योतिषों की मानें तो चंद्रग्रहण का सीधा संबंध भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से होता है. ग्रहण को ज्योतिष में अशुभ और हानिकारक प्रभाव वाला माना जाता है. साल 2018 में 31 जनवरी को चंद्रग्रहण लगने से पहले दिल्ली-एनसीआर, पाकिस्तान और कजाकिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. इस भूकंप की तीव्रता 6.1 थी. और पढ़ें »

संतान प्राप्ति के लिए महादेव के दर पहुंचे 145 दंपती, रातभर खड़े होकर पूजा

रविवार शाम गोधुलि वेला (सुबह 5:15 बजे) में श्रीनगर गढ़वाल के कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने दीपक जलाकर खड़ा दीया अनुष्ठान की शुरूआत की थी। महिलाओं के कमर में जुड़वा नींबू, श्रीफल, पंचमेवा एवं चावल की पोटली बांधी गई। तत्पश्चात महंत ने सभी दंपतियों के हाथ में दीपक रखते हुए पूजा अर्चना की। दंपती पूरी रात जलता दीया हाथ में लेकर भगवान शिव (कमलेश्वर) की पूजा की। सोमवार सुबह स्नान के बाद महंत ने दंपतियों को आशीर्वाद देकर पूजा संपन्न कराई। ऐसी मान्यता है कि खड़ा दीया अनुष्ठान करने से दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। और पढ़ें »

सूर्य ग्रहण के बाद अब चंद्र ग्रहण लगेगा, आठ नवंबर की शाम 5.32 से शुरू होगा चंद्र ग्रहण

8 नवंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण कोलकाता, सिलीगुड़ी, पटना, रांची, गुवाहाटी से दिखाई देगा। ग्रहण की शुरुआत शाम 5.32 बजे से होगी और समाप्ति शाम 6.18 बजे होगी। ग्रहण का सूतक काल सुबह 9.21 मिनट से शुरू होकर शाम 6.18 बजे तक रहेगा। और पढ़ें »

इस साल दो दिन मना सकते हैं भाई दूज, 26 और 27 दोनों दिन रहेगा मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि, जिस दिन दोपहर के समय होती है, उसी दिन भाई दूज का त्योहार मनाना चाहिए। इसी दिन यमराज, यमदूत और चित्रगुप्त की पूजा करनी चाहिए और इनके नाम से अर्घ्य और दीपदान भी करना चाहिए। और पढ़ें »

दिवाली पर इन गलतियों के कारण नहीं मिल पाता पूरा फल, इनसे बचें

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ अन्नपूर्णा माता की भी पूजा करनी चाहिए. दिवाली की रात को रसोईं घर में भूलकर भी जूठे बर्तन नहीं छोड़ना चाहिए. और पढ़ें »

दिवाली के मौके पर आज क्या होगा खास, जानिए पूरे देश का हाल

दिवाली को लेकर एक रोचक और लोकप्रिय तथ्य यह भी है कि भगवान राम जब 14 साल का वनवास खत्म कर अयोध्या लौटे थे, तब उनका दीप जलाकर भव्य स्वागत किया गया था. ऐसा कहा जाता है कि तभी से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. और पढ़ें »

यहां जानें क्यों छोटी दिवाली को कहते हैं नरक चतुर्दशी, इसके पीछे की कहानी क्या है ?

धनतरेस, छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली जैसे कई अन्य त्योहार बेहद पास हैं। धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली होती है। इस दिन लोग अपने-अपने घरों में दीये जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं। साथ ही कहा जाता है कि इस दिन से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। और पढ़ें »

दीवाली के बाद लगने वाले सूर्यग्रहण के बारे में ज्योतिषाचार्य से जानें-

ज्योतिष शास्त्र के आधार पर सूर्य ग्रहण का कारण होता है चंद्रमा तथा चंद्रग्रहण का मुख्य कारण होता है पृथ्वी की काली छाया। पुराणों के अनुसार ग्रहण राहु और केतु द्वारा होते हैं। भारत के पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा आदि के समीप यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसके अलावा संपूर्ण देश में तथा विदेशों में भी यह दिखाई देगा। और पढ़ें »

27 साल बाद दीवाली पर बन रहा सूर्य ग्रहण का ये संयोग, जानें इस दिन किन बातों का रखें खास ख्याल

दिवाली के ठीक एक दिन बाद 25 अक्टूबर को दुनिया भर में साल 2022 का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण 24 अक्टूबर को शाम 05.27 बजे शुरू होगा और 25 अक्टूबर की शाम 04.18 बजे तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई नहीं देगा। और पढ़ें »

इस साल कब होगा दीवाली पूजन, शुभ मुहूर्त और पूरी विधि जान लीजिए

शुभ मुहूर्त इस साल अमावस्या तिथि 24 और 25 दोनों दिन है, लेकिन 25 को तिथि समाप्त हो रही है, इसलिए 24 को ही दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है. कार्तिक अमावस्या तिथि शुरू- 24 अक्टूबर 2022, शाम 05.27 कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त- 25 अक्टूबर 2022, शाम 04.18 लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त - रात 07.02 - रात 08.23 लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त - रात 11.46 - प्रात: 12.37 रात्रि मुहूर्त (लाभ) - रात 10:36 - प्रात: 12 और पढ़ें »

अल्मोड़ा में दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर, मूर्तियां बनाने में जुटे कलाकार

अल्मोड़ा में नवरात्रि और दुर्गा पूजा के लिए देवी की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं. यहां ज्यादातर मूर्तियां स्थानीय कलाकारों के द्वारा बनाई जाती हैं. यह कलाकार रात भर जाग कर मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते हैं. शहर के युवा कलाकार भी बढ़-चढ़कर इसमें हाथ बंटाते हैं. और पढ़ें »
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