मंगलवार, 22 अगस्त 2017 | 03:02 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
होम | साहित्य | क्यों मानता है हिन्दू सूतक और पातक की परंपरा को जाने, आखिर क्या है राज

क्यों मानता है हिन्दू सूतक और पातक की परंपरा को जाने, आखिर क्या है राज


क्यों मानता है हिन्दू सूतक और पातक की परंपरा को जाने, जाने आखिर क्या है राज

भारत एक ऐसा देश है जो विविध धर्म, पंथ ओर संप्रदायों का गढ़ माना जाता है यहां की रीति-नीति और संस्कृति का वाहक समस्त भू-चरा चर है यही कारण है कि भारत के तीज त्यौहारो को विश्व भी आदर्शता के साथ मनाता है। हिन्दू धर्म में सूतक और पातक का भी बहुत बड़ा महत्व है। सूतक लगने के बाद मंदिर में जाना वर्जित हो माना जाता है। यही नही घर के मंदिर में भी पूजा की जाती । और ये प्रक्रिया किसी एक घर में नही सभी हिंदू घरों में अपनाई जाती है। यह जानना भी जरूरी है कि आखिर सूतक और पातक क्या होते हैं। और इसके लिए किस प्रकार की विधि अपनाई जाती है।

इसे कहते है सूतक

जब भी परिवार में किसी का जन्म होता है तो परिवार पर दस दिन के लिए सूतक लग जाता है। इस दौरान परिवार का कोई भी सदस्य ना तो किसी धार्मिक कार्य में भाग ले सकता है और ना ही मंदिर जा सकता है। उन्हें इन दस दिनों के लिए पूजा-पाठ से दूर रहना होता है। इसके अलावा बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री का रसोईघर में जाना या घर का कोई काम करना तब तक वर्जित होता है जब तक कि घर में हवन ना हो जाए।

कितने दिनों तक रहता है इसका असर :-

सूतक का संबंध ‘जन्म के’ निमित्त से हुई अशुद्धि से है। जन्म के अवसर पर जो नाल काटा जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमें लगने वाले दोष पाप के प्रायश्चित स्वरूप ‘सूतक’ माना जाता है। यह 10 दिन का सूतक माना है। प्रसूति (नवजात की मां) का 45 दिन का सूतक रखती है। प्रसूति स्थान 1 माह तक अशुद्ध रहता है। इसीलिए कई लोग जब भी अस्पताल से घर आते हैं तो स्नान करते हैं।

ये है वैज्ञानिक कारण :-

जब बच्चे का जन्म होता है तो उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी नहीं हुआ होता। वह बहुत ही जल्द संक्रमण के दायरे में आ सकता है, इसलिए 10-30 दिनों की समयावधि में उसे बाहरी लोगों से दूर रखा जाता था, उसे घर से बाहर नहीं लेकर जाया जाता। यह कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसका मौलिक उद्देश्य स्त्री के शरीर को आराम देना और शिशु के स्वास्थ्य का ख्याल रखना है।

 

क्या है पातक :-

पातक का संबंध ‘मरण के’ निमित्त हुई अशुद्धि से है। मरण के अवसर पर दाह संस्कार में जो हिंसा होती है, उसमें लगने वाले दोष पाप के प्रायश्चित स्वरूप ‘पातक’ माना जाता है।

 

वैज्ञानिक कारण :-

किसी लंबी और घातक बीमारी, एक्सिडेंट की वजह से या फिर वृद्धावस्था के कारण व्यक्ति की मृत्यु होती है। कारण चाहे कुछ भी हो लेकिन इन सभी की वजह से संक्रमण फैलने की संभावनाएं बहुत हद तक बढ़ जाती हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि दाह-संस्कार के पश्चात स्नान आवश्यक है ताकि श्मशान घाट और घर के भीतर मौजूद कीटाणुओं से मुक्ति मिल सके।

 



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: