शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:46 IST
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स्वतंत्रता सेनानी ने क्यों फूंका सिस्टम के खिलाफ विद्रोह का बिगुल?


उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्वंतत्रता सेनानी चिंद्रियालाल बीते चार सालों से खुद की जमींन पर सामुदायिक भवन बनवाकर गांव के गरीब लोगों की आर्थिक मदद करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर रहे हैं। सिस्टम के लापरवाह रवैये का आलम ये है कि आंख मूंदकर बैठे प्रशासनिक किसी अधिकारी ने अब तक इस बाबत गौर करने की ज़हमत नहीं उठाई।

 

 

टिहरी राजशाही के इस रवैये से परेशान होकर उत्तरकाशी जिले के 91 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी चिंद्रियालाल ने सिस्टम की बेरुखी खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने का मन बनाया है। चार साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर रहे स्वतंत्रता सेनानी चिंद्रियालाल ने हर चौखट से खाली हाथ लौटने के बाद समस्या का निदान नहीं किए जाने पर अब दिसंबर से धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।

 

 

दरअसल, स्वतंत्रता सेनानी चिंद्रियालाल का गांव ब्रह्मखाल जुणगा जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 50 किलोमीटर की दूर है, जहां वो अपनी पट्टे की भूमि पर आर्थिक तौर पर गरीब लोगों के लिए सामुदायिक भवन कानिर्माण करवाना चाहते हैं। इसके लिए चिंद्रियालाल आर्थिक मदद देने को भी तैयार हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि चाल साल में डीएम से लेकर सीएम तक को बीसियों ख़त भेजे जाने के बाद भी उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों से सामुदायिक भवन बनाने की अनुमति नहीं मिल पाई। आलम ये है कि चिंद्रियालाल जिला मुख्यालय में अफसरों की चौखट-चौखट भटकने को मंजूर हैं। 

 

 

बता दें कि चिंद्रियालाल अपनी जिस जमींन पर सामुदायिक भवन बनवाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, वहां दो दशक पहले प्रांतीय खंड लोनिवि उत्तरकाशी ने ब्रह्मखाल-जुणगा मोटर मार्ग निर्माण के दौरान मलबा जलवाया था, जो आज तक ऐसे ही पड़ा है। लोनिवि के ईई वीएस पुंडीर से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कुछ समय पहले आने का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ लिया।

 

 

उन्होंने कहा कि ‘वो कुछ वक्त पहल ही यहां आए हैं, इसलिए उन्हें मामले का संज्ञान नहीं है और कोई भी परेशानी होने पर स्वतंत्रता सेनानी को संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता के साथ उनके पास आना चाहिए।' अब देखना होगा कि मामला लोनिवि के ईई वीएस पुंडीर के संज्ञान में आने के बाद इस पर क्या एक्शन लिया जाता है।



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