मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018 | 11:30 IST
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हेमन्त पाण्डेय ने क्यों कहा कि मुख्यमंत्री ने मजबूरी में लिया ये फैसला ?


फिल्म विकास बोर्ड भंग किए जाने पर अभिनेता हेमंत पांडे ने नाराजगी जताई है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बगैर पैसे के कोई बोर्ड नहीं चलता है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने पिछले दो साल में बोर्ड को एक भी पैसा नहीं दिया। जितना मैं कर सकता था, मैंने किया। मुख्यमंत्री फिल्म विकास बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, लेकिन पिछले दो सालों में वे एक बार भी बोर्ड की बैठक में नहीं पहुंचे। वे बैठक में क्यों नहीं आए, यह मैं नहीं जानता। उन्होंने कहा कि वे तो राजा लोग हैं, राजा कभी भी कोई भी निर्णय ले सकता है। हेमंत पांडे ने इसे खुद के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका बताया है। 
 
 
उन्होंने कहा कि मैं उत्तराखंड में फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को सम्मानित करना चाहता था, इसके लिए हमने एक सम्मेलन कराने की योजना बनाई थी। उनका कहना है जब मैं इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिला तो उन्होंने मुझे कार्यक्रम की मंजूरी भी दी, लेकिन बाद में उन्होंने सम्मेलन से इन्कार कर दिया। यह मुझे काफी बुरा लगा, लेकिन उनकी भी कुछ मजबूरियां रहीं होंगी। उनके चारों तरफ अच्छे लोग नहीं हैं।


 
वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का आभार प्रकट करते हुए हेमंत पाडेण्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमारी ओर से भेजे गए दो प्रस्तावों को मंजूरी दी है, इसके लिए मैं उनका आभार प्रकट करना चाहता हूं, उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में शूटिंग टैक्स फ्री करना और गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल विकास निगम में ठहरने के लिए 50 प्रतिशत फ्री करने का प्रस्ताव बोर्ड ने ही मुख्यमंत्री को भेजा था।   

 



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