शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:44 IST
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अमेरिका के मुंह से भारत की तारीफ सुन क्यों भड़का चीन?


व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने टोक्यो में पत्रकारवार्ता के दौरान जमकर भारत की तारीफों के पुल बांधे, जहां अमेरिकी सरकार ने 'एशिया-प्रशांत' की बजाय 'भारत-प्रशांत' कहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये शब्दावली भारत के विकास की अहमियत को बयां करता है, जिसके साथ अमेरिका के मजबूत संबंध और गहरे होते जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा, 'भारत-प्रशांत मुक्त समुद्री साझा हित की अहमियत बयां करता है, जिससे हमारी सुरक्षा और समृद्धि भी जारी रहेगी।

 

 

हालांकि, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच एक रणनीतिक वार्ता को लेकर उन्होंने साफ किया कि रणनीति का मकसद चीन को रोकना नहीं है। वहीं, इससे पहले आई खबरों में सामने आया था कि जापान भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को साथ लाने की योजना से वन बेल्ट वन रोड यानी ओबीओआर के जरिये पूरी दुनिया पर दबदबा कायम का सपना देख रहे चीन को जवाब देने की तैयारी कर रहा है।

 

 

खबरों की मानें, तो जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 6 नवंबर को एशियाई दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात में इसका प्रस्ताव रखेंगे। इसके तहत चारों देशों के नेता जमीन और समुद्र के रास्ते से होने वाले अपने व्यापार और सुरक्षा मामलों में सहयोग बढ़ाएंगे, जिसे दक्षिणपूर्व, दक्षिण और मध्य एशिया के अलावा मध्य पूर्व और अफ्रीका तक फैलाया जाएगा।

 

 

प्रशांत और हिंद महासागर में भारत को मिल रही तरजीह ने एक बार फिर चीन की बौखलाहट बढ़ाने का काम किया है, जिसे प्रस्ताव समझने वाला चीन मुकाबले के तौर पर देख रहा है, हालांकि उसने फिलहाल बेहद सधी प्रतिक्रिया दी है, जिसको लेकर चीन का कहना है इससे तीसरे पक्ष के हित पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।  



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