शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:48 IST
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अपने ही गढ़ में क्यों हार गई BJP?


चुनावों के परिणाम आने पहले ही लग रहा है कि आजकल बीजेपी के बुरे दिन चल रहे हैं। तभी तो जिस  मोदी लहर के कारण  बीजेपी ने कांग्रेस का पत्ता साफ किया था, अब वो लहर मोदी ही सरकार पर भारी पड़ती दिख रही है, क्योंकि देश में सिर्फ बीजेपी की विरोधी कांग्रेस नहीं, बल्कि कई नई पार्टी आवाज  उठाने लगी है। इसी कारण मोदी सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसा ही कुछ मोदी सरकार को बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में देखने को मिला, जहां परिणाम से पहले ही बीजेपी उम्मीद्वार ने कांग्रेस के सामने घुटने टेककर अपनी हार स्वीकार ली।


 

मध्य प्रदेश के चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी को अपने ससुराल में भी बढ़त नहीं मिली और कांग्रेस के उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने भारी मतों के अंतर से बाजी मारी। चित्रकूट विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिल रही हार के बाद भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि नतीजों की समीक्षा की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी जनादेश स्वीकार करता हूं। हालांकि, उम्मीदवार के चयन में गलती होने की बात पर भाजपा अध्यक्ष ने सीधे तौर पर जवाब देने की बजाए कहा कि नतीजों की समीक्षा होगी।

 

 

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के चित्रकूट विधानसभा की मतगणना में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मैजिक फेल होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जिन इलाकों में चुनावी सभाएं की थीं, उनमें अधिकांश जगह पर कांग्रेस के उम्मीदवार को बढ़त मिली है, लेकिन भाजपा ने जीत हासिल करने के लिए प्रचार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। पिछले 27 सालों में इस सीट पर हुए 6 चुनावों में बीजेपी महज एक बार ही महज 722 वोटों से जीत सकी थी, जिसके बाद देखना काफी दिलचस्प होगा कि बीजेपी के अपने ही राज्य में मिली हार पर मोदी सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।



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