शनिवार, 20 अक्टूबर 2018 | 01:33 IST
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आज की नहीं है मुस्लिम और बौद्धों की दुश्मनी


इन दिनों हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका दंगों की आग में जल रहा है,ये हिंसा मुस्लिमों और बौद्धों के बीच चल रही है, इस हिंसा में कई घर, परिवार और मासूम लोग बलि चढ़ रहे हैं। काफी लोगों को लग रहा है कि अचानक से ही बौद्धों और मुस्लिमों के बीच ये जंग शुरू हो गई है तो आपको बता दें ये जंग अचानक से नहीं बल्कि कई सालों से चल रही है....

 


श्रीलंका में बौद्ध और मुस्लिमों के बीच संघर्ष नया नहीं है, साल 2012 से ही यहां सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां की बौद्ध आबादी, मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति पर खतरा मानती है। मुस्लिमों पर यहां बौद्धों के जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगता रहा है, यहां की 75 फीसदी आबादी बौद्ध है जबकि 10 फीसदी आबादी मुस्लिमों की। श्रीलंका ही नहीं, दुनिया के कई देशों में बौद्ध और इस्लाम के बीच पिछले कुछ सालों में संघर्ष लगातार बढ़ा है। सवाल यह उठता है कि बौद्ध और इस्लाम के संघर्ष का मूल कारण क्या है? यह संघर्ष कैसे शुरू हुआ? अहिंसा और शांति का संदेश देने वाला बौद्ध धर्म इस्लाम से टकराव के रास्ते पर क्यों है?

 


तो आपको बता दें बौद्धों के अंदर इतिहास का दिया हुआ एक डर है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों को मन ही मन यह चिंता सता रही है कि मुस्लिमों की आबादी एक दिन उनसे ज्यादा हो जाएगी और उनका अस्तित्व खत्म हो जायेगा। कई बौद्धों को यह भी डर है कि उनके अपने देश में उनकी संस्कृति नष्ट हो जाएगी और उनका देश मुस्लिम बहुल देश बन जाएगा। आपको बता दें, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में 7वीं-11वीं शताब्दी में इस्लाम के आने से पहले बौद्ध बहुल आबादी वाले देश रहे थे, लेकिन इस्लाम के उदय से बौद्ध धर्म का पतन होने लगा, यही कारण है, जिसकी वजह से आज श्री लंका इन दंगों की आग में जल रहा है।

 



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