शनिवार, 16 दिसम्बर 2017 | 06:19 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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इन कारणों से भारत के लिए अहम होगा चाबहार..!


रविवार को भारतीय प्रतिनिधि की मौजूदगी में ईरान राष्ट्रपति चाबहार पोर्ट के फर्स्ट फेज़ का उद्घाटन करेंगे। आपको बता दें कि चाबहार पोर्ट के ज़रिए ही भारत-ईरान-अफगानिस्तान रणनीतिक ट्रांजिट रूट की शुरुआत करेंगे। भारत के लिए ये पोर्ट कई मायनों में अहम माना जा रहा है, जिसकी कई वजह भी हैं, जैसे:-
 
 
1. भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान से होकर गुजरना पड़ता था, लेकिन चाबहार पोर्ट से भारत बिना पाक की मदद से अफगानिस्तान, रूस और यूरोप उससे आगे तमाम देशों से जुड़ सकेगा। 
 
2. कांडला और चाबहार बंदरगाह की दूरी, नई दिल्ली से मुंबई की दूरी से भी कम है। ऐसे में चाबहार समझौतै भारत वस्तुएं ईरान तक पहुंचाने और नए रेल व सड़क मार्ग से अफगानिस्तान ले जाने में काफी मददगार साबित होगा, जिससे न सिर्प ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी, बल्कि वक्त भी बचेगा।
 
3. इसके अलावा रणनीतिक दृष्टिकोण से भी ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलुचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए उपयोगी है। भारत के पश्चिम तट पर स्थित चाबहार फारस की खाड़ी के बाहर है, ऐसे में भारत के पश्चित तट से यहां सरलता से आया जा सकता है।
 
4. चाबहार पोर्ट भारत के लिए महत्वपूर्ण होने का एक और कारण है कि यह पाकिस्तान में चीनी ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किमी. दूर है। जानकारी के मुताबिक, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे कार्यक्रम के तहत चीन अपने 46 अरब डॉलर से ये पोर्ट बनवा रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा करके चीन एशिया में नए व्यापार और परिवहन मार्ग खोलना चाहता है।
 
5. ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, क्योंकि इससे मध्य एशियाई देश ओमान और हिंद महासागर के रास्ते दुनिया के अन्य देशों से जुड़ सकेंगे। इस लिहाज़ से भी यह बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
 
6. भारत ईरान-अफगान सीमा पर पहले ही जरांग से दिलराम तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 200 किमी. से ज्यादा लंबी सड़क बना चुका है। ऐसे में चाबहार बंदरगाह सहित अफगान की सीमा तक सड़क और रेलवे का विकास होने से अफगानिस्तान और पूरे मध्य एशिया में भारत की पहुंच पक्की होगी। 
 
7. चाबहार बंदरगाह ऐसा विदेशी बंदरगाह है, जिसे विकसित करने में भारत की सीधी भागीदारी है।


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