शुक्रवार, 15 दिसम्बर 2017 | 07:45 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
दूसरे चरण में करीब 68-70 प्रतिशत मतदान रहा।           दूसरे चरण में 93 सीटों के चुनावों के लिए वोट डाले गये।          गुजरात के दूसरे चरण के चुनावों का इंतजार खत्म हुआ।          मुंबई महानगरपालिका के वार्ड नंबर 21 में उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की।          गुजरात विधानसभा चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी ने गांधीनगर में वोट डाला।          पीएम मोदी ने देश को किया समर्पित: पनडुब्बी आईएनएस कलवरी           स्कॉर्पियन सीरीज की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी आज भारतीय नौसेना में शामिल।          गुजरात के साबरमती में वोटिंग के लिए पहुंचे पीएम मोदी।          18 दिसंबर को होगा फैसला: भाजपा या कांग्रेस          विराट कोहली और अनुष्का का दिल्ली में 21 दिसंबर और मुंबई में 26 दिसंबर को इंतजार।          अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी निर्विरोध चुने गए।          कांग्रेस अध्यक्ष पद के दिए 16 दिसंबर का इंतजार ।         
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इंडोनेशिया में धधक रही ज्वालामुखी, फिर भी घर छोड़ने को तैयार नहीं लोग ?


ज्वालामुखी के कारण वातावरण पर बुरा असर पड़ा है फिर भी वहाँ के लोग की आस्था भगवान पर टिकी है। लोगों के हिंदू बहुल बाली द्वीप में हजारों स्थानीय लोगों ने ज्वालामुखी के खतरे वाले इलाके से हटने से इन्कार कर दिया है। अपनी किस्मत को भगवान भरोसे छोड़कर वे अपने घरों में ही रह रहे हैं। लंबे समय से शांत तीन हजार मीटर ऊंचा माउंट अगुंग ज्वालामुखी फिर धधक उठा है। उससे राख और धुंआ निकल रहा है। इसकी वजह से इंडोनेशिया की सरकार ने ज्वालामुखी के दस किमी के दायरे में रह रहे लोगों को वहां से हटने की सलाह दी है। तीन दिन से बंद बाली का इकलौता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बुधवार को फिर खोल दिया गया। इससे द्वीप पर फंसे हजारों विदेशी सैलानी अपने-अपने देश लौटना शुरू हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक खोजी और बचाव टीमें खतरे वाले क्षेत्र में रोजाना छानबीन कर रही हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने अपने पशुओं को छोड़कर जाने से मना कर दिया तो कुछ आध्यात्मिक कारणों से जाना नहीं चाहते। बाली की खोजी और बचाव एजेंसी के प्रमुख जी अरदाना ने कहा, 'सरकार ने इस क्षेत्र से लोगों को हटाने का आदेश दिया है, लेकिन कुछ लोग देरी कर रहे हैं या जाना नहीं चाहते। हम उन्हें विवश नहीं कर सकते लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी होगी। इसलिए हमें उन्हें समझाने की जरूरत है।' सूचनाओं के मुताबिक आपदा प्रबंधन एजेंसी के द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से अब तक 43 हजार लोग विशेष शिविरों में शरण ले चुके हैं। लेकिन खतरे वाले इलाके की आबादी 90 हजार से एक लाख के बीच है और इनमें से कई जाने से मना कर चुके हैं। 33 साल की इका वरदानी का कहना है कि वह रात में राहत शिविर में सोती हैं लेकिन दिन में दस किमी दूर अपने पशुओं के पास लौट जाती हैं।



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