शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:56 IST
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UOU के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने जताई बेरोज़गारी पर चिंता


उत्तराखंड में पलायन के बाद बेरोजगारी दूसरा ऐसा मुद्दा है, जो प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई तमाम कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद युवाओं की रोजगार संबंधी समस्या दूर करने में फेल होती दिख रही है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति और राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने इस मुद्दे को ज़ोरशोर से उठाया। बेरोजगार संबंधी समस्या पर चिंता वयक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में युवा रोजगार की समस्याओं से दो-चार हो रहा है और ऐसे युवाओं के लिए वर्तमान कार्यक्रमों में रोजगार के लिए कौशल का समावेश होना चाहिए।

 

 

दीक्षांत समारोह को गौरवशाली अवसर बताकर उन्होंने विश्वविद्यालय में रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालन पर जोर दिया। इसमें उन्होंने बताया कि ऐसा करने से युवाओं को अधिक रोजगार मिल सकेगा। इस दौरान विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में उच्चशिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धनसिंह रावत भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गुणवत्तापरक उच्चशिक्षा के लिए प्राचार्यों एवं शिक्षाविदों के सेमिनार आयोजित किये जाएंगे और सभी जनपदों के 13 डिग्री कालेजों में आईएएस, पीसीएस की कोचिंग दी जाएगी।

 

 

जानकारी के मुताबिक, इसमें कमिश्नर, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि अधिकारी व्याख्यान देंगे और चार महीने में खाली असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हो जायेगी, जबकि प्रदेश की प्राइवेट परीक्षाओं पर फुल स्टॉप लगाया जाएगा। डॉ. रावत ने कहा विद्यार्थियों से आनलाइन सुझाव लेकर सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह की ड्रेस देशी परिधान में बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 100 गरीब छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पीएचडी के साथ ही अनुसूचित जाति जनजाति के विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग के साथ ही टॉपर, मेधावी विद्यार्थियों को लेपटॉप और गरीब मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्चशिक्षा के लिए 50 लाख तक का ऋण दिया जायेगा।

 

 

कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि तृतीय दीक्षांत समारोह मे सत्र 2016-17 के आठ हजार से ज्यादा उत्तीर्ण छात्रों को उपाधि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या 40 हजार पहुंच चुकी है। विश्वविद्यालय द्वारा आठ क्षेत्रीय केन्द्र व 238 अध्ययन केन्द्र संचालित किये जा रहे है। समारोह मे विभिन्न पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले 19 स्नातकों एवं परास्नातकों को स्वर्ण पदक के साथ ही दो छात्रों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक व चार स्नातक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रदान किये गये।



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