बुधवार, 18 अक्टूबर 2017 | 01:16 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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मंगलमय हो नववर्ष


पूरब से 
उतरी नव किरणें
प्रदीप्त हुआ प्रभाकर नवीन
आज प्रभात के घाट पर
परिदृश्य हैं नवनीत
शरद ने  श्रृंगार किया


धरा बनी दुल्हन
पुष्प कीरीट से शोभित क्यारी
हर्षित है चंपा की डाली
इंद्रधनुष के रंग भर
प्रकृति मनाए उत्कर्ष
भाव भरे जनकल्याण का
नवनिर्माण का
सृजन का और विकास का
कहें सभी सहर्ष
मंगलमय हो नववर्ष

साभार कवि- हेमेंद्र जर्मा



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