शनिवार, 16 दिसम्बर 2017 | 06:20 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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राम मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी


अयोध्या में राम मंदिर मामले की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आने वाली 8 फरवरी को तय किया है। जानकारी के मुताबिक चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की बेंच इस केस की सुनवाई कर रहे हैं। 

जानकारी के मुताबिक कई वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी है कि इस मामले की सुनवाई कम से कम 7 जजों की बेंच को करनी चाहिए और इस तरह से उन्होंने कोर्ट की कार्रवाई को लेकर अपना एक तरह से विरोध भी दर्ज करवाया।

साथ ही कपिल सिब्बल ने कहा- मामले की सुनवाई के कोर्ट के बाहर भी असर। अभी कागज़ी कार्रवाई को पूरा होने दें। मामला 15 जुलाई 2019 के बाद सुनें। धवन और सिब्बल ने मामला 7 जजों की बेंच को सौंपने की भी मांग रखी।

इस तौर पर राजीव धवन ने मामला 5 जजों की बेंच में भेजने की मांग उठाई। कहा-पहले 5 जजों की बेंच एक मामले में ये कह चुकी है कि मस्ज़िद इस्लाम का मूल हिस्सा नहीं है। ये सुनवाई भी मस्ज़िद पर है। इसे 5 जजों को भेजा जाए।

इसी के साथ वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने तुषार मेहता की बात का समर्थन किया कहा सुप्रीम कोर्ट में अपीलों पर सुनवाई हो रही है। ये सुनवाई 3 महीने में पूरी हो सकती है। निचली अदालत में सुनवाई में समय लगता है।

आगे की सुनवाई के लिए  उत्तर प्रदेश सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कह चुका है कि इस मामले की रोजाना सुनवाई की जाएगी तो फिर ऐसे में यह सवाल ही कहां से उठता है कि इसके फैसले के लिए अवधि तय की जाए।

सभी को ध्यान में रखते हुए  वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि वह इस मामले के निपटारे के लिए एक तय अविधि भी तय करें

वही दूसरी ओर सिब्बल की दलील- अभी भी HC में रखे गए सभी दस्तावेज SC में जमा नहीं हुए हैं। अयोध्या में हुई खुदाई पर एएसआई की पूरी रिपोर्ट भी अभी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनी है। सभी पक्षों की तरफ से अनुवाद करवाए गए कुल 19950 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में औपचारिक तरीके से जमा होने चाहिए।

पलटवार करते हुए यूपी सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सिब्बल की दलील का खंडन किया। कहा-सभी सबंधित दस्तावेज कोर्ट के रिकॉर्ड में हैं।

दस्तावेजों को लेकर सिब्बल ने कहा- 19000 से ज़्यादा पन्नों के दस्तावेज इतने कम समय मे कैसे जमा करवाए गए। अगर ऐसा हुआ भी है तो मामले से जुड़े पक्षों के पास अभी ये दस्तावेज नहीं पहुँचे हैं।

मुस्लिम समुदाय के सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल उन तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर रहे हैं। जो सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने रखे गए थे।

साथ ही कपिल सिब्बल ने कहा किन दस्तावेजों में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के बारे में भी पूरी जानकारी नहीं है जो इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के सामने रखी गई थी। कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि इस मामले में करीब 19500 पन्नों के दस्तावेज तैयार हुए थे लिहाजा उन सभी दस्तावेजों का सामने आना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश सरकार के वकील तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने सारे अहम दस्तावेज लाये जा चुके हैं लिहाजा यह कहना कि दस्तावेज अधूरे हैं सही नहीं है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पेश होने वकील कपिल सिब्बल ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हो रहे वकील तुषार मेहता की दलीलों पर भी सवाल खड़े किए। कहा क्या वाकई में 19500 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा क्योंकि अभी तक उनको या उनके मुव्वकिलों को सारे दस्तावेज़ अभी तक नहीं मुहैया कराए गए।

इस मामले पर बाबरी मस्जिद के मुख्य मुद्दई इकबाल अंसारी का कहना है कि जो भी कोर्ट का फैसला होगा वो उन्हें मान्य है। श्याम बेनेगल, तीस्ता सीतलवाड़, ओम थानवी, जॉन दयाल, मेधा पाटकर समेत 32 लोगों ने अर्ज़ी दायर कर अयोध्या विवाद में पक्ष रखने की मांग की है। इन लोगों ने कहा है कि विवादित ज़मीन का धार्मिक इस्तेमाल न हो। वहां जनहित के काम की कोई इमारत बनाई जाए।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो हम अपने हिसाब से काम करेंगे।

इलाहाबाद में संगम के किनारे आश्रमों में रहने वाले साधू- संतों और वेदपाठियों ने हनुमान जी के मंदिर में सुंदरकांड का पाठ और हवन कर बजरंग बली से अपनी जीत का आशीर्वाद मांगा है। इस दौरान वहां अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि भी मौजूद थे।

सभी को मद्देनजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी तय की है। 



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