शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:56 IST
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इस तरह देशभक्त युवाओं का सपना साकार करेगी राज्य सरकार!


उत्तराखंड सरकार कई बड़ी योजनाओं से युवाओं के लिए रोज़गार के सुनहरे अवसर प्रदान कर रही है। इसका सबसे सटीक उदाहरण है उत्तराखंड देशसेवा का सपना देख रहे उत्तराखंडी युवाओं को मिली सौगात। जी हां, सोमवार को सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सेना के बंगलूरू सिलेक्शन सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी से मुलाकात में देशसेवा का जज़्बा रखने वाले युवाओं को सैन्यबलों की भर्ती का प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। इस दौरान सरकार प्रयास के प्रयास पर खुद कमांडेंट मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी ने सहमति जताई। 

 

 

वहीं, खबरों की मानें तो राज्य सरकार परीक्षाओं और प्रशिक्षण के लिए कुमाऊं और गढ़वाल में दो केंद्र स्थापित करेगी। बता दें कि वर्तमान में एनडीए और सीडीएस परीक्षाओं की सफलता दर आईएएस परीक्षा से भी कम है। सिविल सेवाओं के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना अधिक अभ्यर्थी एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं में आवेदन करते हैं, लेकिन सेना में भर्ती के लिए समग्र व्यक्तित्व परीक्षण के सख्त मानकों के कारण सफलता दर कम होती है।

 

 

पत्रकारों को इस बाबत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है, जहां युवाओं में सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान कर एनडीए और सीडीएस परीक्षाओं में उनकी सफलता का प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि व्यक्तित्व विकास की कार्यशालाएं सिर्फ सैन्य सेवाएं ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी सेवाओं और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए लाभप्रद होंगी।

 

 

त्रिवेंद्र सिंह रावत और कमांडेंट मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी बैठक में तय हुआ कि प्रथम चरण में कुमाऊं और गढ़वाल में दो से तीन सप्ताह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं स्कूल-कॉलेज में संचालित होंगी, जहां युवाओं को एनडीए और सीडीएस की चयन प्रक्रिया के अनुरूप व्यक्तित्व विकास, साक्षात्कार एवं अन्य शारीरिक परीक्षणों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। सैनिक कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग से समन्वय कर प्रशिक्षण कार्यशालाओं के लिए स्थाई केन्द्र के रूप में स्कूल या कॉलेज के भवन चयनित करेंगे जहां नियमित पठन-पाठन के साथ-साथ कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा सके।



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