शनिवार, 19 अगस्त 2017 | 06:22 IST
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मंच पर जी उठा ‘देवदास’


सुनील कुमार

प्रेम की पूर्णता उसे पाने में नहीं, बल्कि उसे उत्सर्ग करने में है, इसे केंद्र में रखकर प्रेम और भावुकता से लबरेज नाटक 'देवदास' का मंचन दिल्ली के श्रीराम सेंटर में किया गया। गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा, सुमुख एवं प्रिज्म थियेटर की ओर से मंचित किया गया यह नाटक शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय के लोकप्रिय उपन्यास ‘देवदास’ पर आधारित था। इस नाटक में देवदास के किरदार में साहिल सिंह सेठी, और एनब खिज्रा पारो की भूमिका में दर्शकों पर जबर्दस्त प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि सुशील सिंह ‘चुन्नीबाबू’ और मेघा माथुर ‘चंद्रमुखी’ की भूमिका दर्शकों को सम्मोहित करने में कामयाब होती हैं। किरदार इस तरह के मंच पर जीवंत होते हैं कि वह परिस्थितियों के भंवर में पड़े मानवीय संवेदनाओं, प्रेम और संबंधों को उबारकर उन्हें नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कामयाब होते हैं। वैसे नाटक आसान नहीं रहा है, लेकिन मंच पर उतरे कलाकारों ने सफलतापूर्वक उसका मंचन कर दिखाया।

पारो और चंद्रमुखी के बीच संवादों के चित्रण में मेघा माथुर और एनब खिज्रा पूरी तरह से कामयाब हुई हैं और उनके बीच की संवाद अदायगी बार-बार कलाप्रेमियों के मन-मस्तिष्क को आकर्षित करती है। ऐसा शायद इस वजह से था कि देवदास इन्हीं दो किरदारों के बीच दिशाहीन भटकता दिखता है और ये दोनों किरदार अपनी अपनी मर्यादाओं में खुद को संजोये-समेटे देवदास की तुलना में कहीं ज्यादा ऊंचा स्थान पाते दिखते हैं।  निश्चित दौर पर अरविंद के निर्देशन में मंचित ‘देवदास’ का कथानक, पात्र, परिस्थितियां और संवाद शरदचंद्र के हैं लेकिन उसकी प्रस्तुति भिन्न दिखती है और अरविंद उसमें सफल दिखते हैं।



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