शनिवार, 16 दिसम्बर 2017 | 06:12 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
विजय दिवस के मौके पर शहीदों को दी श्रद्धांजली।           अध्यक्ष बनते ही बीजेपी पार्टी पर तगड़े तंज: राहुल गांधी           राहुल गांधी बने कांग्रेस पार्टी के नये अध्यक्ष।          कोयला घोटाले में मधु कोड़ा को 3 साल की सजा, 25 लाख का जुर्माना           तीन तलाक दिया तो 3 साल की सजा होगी ।          केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ट्रिपल तलाक बिल को दी मंजूरी          राहुल गांधी की ताजपोशी 16 दिसंबर को होगी।          कांग्रेस पार्टी के नये अध्यक्ष बनने जा रहे है राहुल गांधी          हिमाचल प्रदेश व गुजरात विधानसभा चुनावों के फैसले 18 दिसंबर को होंगे जारी।          राज्यसभा में विपक्षी दलों का हंगामा।          लोकसभा 18 दिसंबर तक के लिए स्थगित ।          18 दिसंबर को होगा फैसला: भाजपा या कांग्रेस         
होम | धर्म-अध्यात्म | पौष माह की पूर्णिमा का पवित्र स्नान देखिये जरा शुभ मुहूर्त

पौष माह की पूर्णिमा का पवित्र स्नान देखिये जरा शुभ मुहूर्त


हिन्दू परम्परा के अनुसार चैत्र माह जहां हिंदू वर्ष का प्रथम माह होता है तो वही फाल्गुन महीना वर्ष का अंतिम माह होता है। महीने की गणना चंद्रमा की कलाओं के आधार पर होती है इसलिये हर माह में अमावस्या और पूर्णिमा की तिथियों तक कृष्ण और शुक्ल पक्ष में विभाजित किया गया है। पूर्णिमा के बाद की प्रथम तिथि से लेकर अमावस्या तक के कालचक्र को कृष्ण पक्ष कहते है और अमावस्या के बाद प्रथम तिथि से लेकर पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष कहलाता है। जो पूर्णिमा जिस नक्षत्र में होती है उसी नक्षत्र के नाम पर उस महीने का नाम रखा गया है।

महीनों के नाम       पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा इस नक्षत्र होता है

चैत्र                 चित्रा, स्वाति

वैशाख             विशाखा, अनुराधा

ज्येष्ठ              ज्येष्ठा, मूल

आषाढ़             पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़

श्रावण              श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा

भाद्रपद             पूर्वभाद्र, उत्तरभाद्र

आश्विन            रेवती, अश्विन, भरणी

कार्तिक             कृतिका, रोहणी

मार्गशीर्ष            मृगशिरा, आर्द्रा

पौष                   पुनवर्सु, पुष्य

माघ                 अश्लेशा, मघा

फाल्गुन            पूर्व फाल्गुन, उत्तर फाल्गुन, हस्त

हम आपको पौष माह के बारे में बताने जा रहे हैं भारतीय हिंदू परंपरा का नया वर्ष 28 मार्च 2017 से विक्रम संवत 2074 के रूप में शुरू हो गया था और हिंदू वर्ष के 10वें माह को पौष कहा जाता है। वही दूसरी ओर अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2017 में पौष माह का आरंभ मार्गशीर्ष पूर्णिमा के पश्चात देश की राजधानी दिल्ली के समयानुसार 4 दिसंबर को शुरू हो गया है जो कि 2 जनवरी को पौष पूर्णिमा तक रहेगा।

हिन्दूओं के देवी-देवताओं की महिमा और आशीर्वाद से लोग भगवान श्री कृष्ण की पूजा, भगवान राम की पूजा, भगवान विष्णू की पूजा के साथ-साथ और सभी देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते नजर आते है। पौष माह में लोग पूर्णिमा स्नान भी करते है। जो आस्था, मन की शांति और परिवार की स्मृद्धि के लिये जरूरी है साथ ही अब आपको हम बताने जा रहे हैं कौनसी तिथि व त्यौहार कब हैं ? 

एक बार फिर आपको बता दे कि उतरते मार्गशीर्ष को बाद पौष का माह शुरू होने जा रहा है 4 दिसंबर से 2 जनवरी तक पौष माह रहेगा साथ ही पौष माह की पूर्णिमा 2 जनवरी को है।

पौष माह की पूर्णिमा का समय की जानकारी

जनवरी 1, 2018 को 11:45:57 से पूर्णिमा आरम्भ

जनवरी 2, 2018 को 07:55:41 पर पूर्णिमा समाप्त

पौष माह की पूर्णिमा को मोक्ष की कामना रखने वाले बहुत ही शुभ मानते हैं। क्योंकि इसके बाद माघ महीने की शुरुआत होती है। माघ महीने में किए जाने वाले स्नान की शुरुआत भी पौष पूर्णिमा से ही हो जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक प्रात:काल स्नान करता है वह मोक्ष का अधिकारी होता है। उसे जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है अर्थात उसकी मुक्ति हो जाती है। चूंकि माघ माह को बहुत ही शुभ व इसके प्रत्येक दिन को मंगलकारी माना जाता है इसलिए इस दिन जो भी कार्य आरंभ किया जाता है उसे फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान के पश्चात क्षमता अनुसार दान करने का भी महत्व है।

लोगों की आस्था से भरी सर्दी में स्नान करना और जीवन मंगलमय हो इसकी कामना करना। स्नान करके अपने जीवन को धन्य मानते है। ऐसे ही भारत के विभिन्न गंगा घाटों और पवित्र नदियों में स्नान करते है। बनारस के दशाश्वमेध घाट व प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर पर डुबकी लगाना बहुत ही शुभ व पवित्र माना जाता है। प्रयाग में तो कल्पवास कर लोग माघ माह की पूर्णिमा तक स्नान करते हैं। जो लोग प्रयाग या बनारस तक नहीं जा सकते वे किसी भी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करते हुए प्रयागराज का ध्यान करें।

हिन्दू पंचांग के पौष माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहा जाता है। हिन्दू धर्म और भारतीय जनजीवन में पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। हिन्दू धर्म ग्रन्थों में पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि पौष मास के समय में किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड की पूर्णता पूर्णिमा पर स्नान करने से सार्थक होती है। पौष पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है।

वैदिक ज्योतिष और हिन्दू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। चूंकि पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। अतः सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है।

पौष पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि

पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है। इस दिन सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। पौष पूर्णिमा की व्रत और पूजा विधि इस प्रकार है:

1.  पौष पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।

2.  पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें।

3.  स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।

4.  स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।

5.  किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देनी चाहिए।

6.  दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए।

पौष पूर्णिमा पर होने वाले आयोजन

पौष पूर्णिमा पर देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर स्नान और धार्मिक आयोजन होते हैं। पौष पूर्णिमा से तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले का आयोजन शुरू होता है। इस धार्मिक उत्सव में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार माघ माह के स्नान का संकल्प पौष पूर्णिमा पर लेना चाहिए।

पौष पूर्णिमा के दिन ही शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है। जैन धर्म के मानने वाले पुष्याभिषेक यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन करते हैं। वहीं छत्तीसगढ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासी इसी दिन छेरता पर्व भी मनाते हैं।



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: