बृहस्पतिवार, 23 नवंबर 2017 | 10:45 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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करियर चयन के सुझाव


अक्षिता बहुगुणा

प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक और शिक्षक कन्फ्यूशियस, ने एक बार कहा था, “नौकरी ऐसी चुनो जो कि तुम्हे पसंद हो और तुम्हे एक भी दिन काम नहीं करना पड़ेगाI” एक और प्रसिद्ध उद्धरण है “आप जो करते हैं उसे प्रेम से करें और वही कीजिये जो आपको पसंद होI”

इसी प्रकार हमारे पास अनेक उद्धरण हैं जो हमें प्रेरित करते हैं अपनी पसंद का व्यवसाय चुनने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाने में परंतु वास्तव में क्या अपनी ज़िन्दगी का इतना महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इतना ही काफी है यह जानते हुए भी कि ये हमारे जीवन के और पहलुओं पर भी असर कर सकता है? आखिर किस समय हमें अपने करियर की तरफ ध्यान देना चाहिए? क्या हमें हमारे बड़ों के ज्ञान और अनुभवों पर विश्वास रखना चाहिए या अपने लिए नया रास्ता खोजना चाहिए? हमारे पास कौन-कौन से विभिन्न करियर विकल्प मौजूद हैं? क्या हमारा व्यक्तित्व हमारे पसंद के करियर से मैच करता है?आप क्या अतिरिक्त प्रयास कर सकते हैं अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए? क्या आपकी पसंद का व्यवसाय आपको संतुष्टि प्रदान करेगा? इसी प्रकार के ढेर सारे प्रश्न हैं जो अपने लिए एक करियर पसंद करने से जुड़े हुए हैं परंतु एक कोर्स चुनने से पहले क्या हम इन प्रश्नों का उत्तर अपनी पूरी क्षमता से दे पाते हैं?

ज़िन्दगी में हम सबसे पहले करियर चुनने का प्रश्न गंभीरता से हाई स्कूल में लेते हैं जब हमें ग्यारहवीं में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स में से अपने विषय चुनने के लिए कहा जाता हैI एक विद्यार्थी के लिए हाई स्कूल बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता हैI यह एक समय है जब उन्हें न केवल वरिष्ठ छात्र बनने की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि यह उनके सामने अवसरों का एक महासागर भी लाता है।

परंतु बहुत सारे विद्यार्थी अंत तक अपने पसंद के सब्जेक्ट लेने के लिए उलझन में होते हैं जबकि अन्य बिना सोचे साइंस या कॉमर्स ले लेते हैं क्योंकिं उनपे 'अच्छे' सब्जेक्ट्स पसंद करने का दबाव होता है या उन्हें ये ग़लतफहमी होती है कि स्कूल से पढाई पूरी होने के पश्चात उनके पास अपना करियर चुनने के लिए अनेकों विकप्ल होंगेI यह स्थिति और भी बुरी इसलिए है क्योंकि छात्रों को पता भी नहीं है कि उनके पास डिप्लोमा या आईटीआई से शिक्षा प्राप्त करने का भी विकल्प मौजूद होता हैI

तो इस स्थिति में सवाल यह है कि कोई अपने करियर का चयन किस प्रकार करे?

पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने जूनून के बारे में पता लगाएंI आपका लक्ष्य क्या है? एक व्यक्ति बहुत सारी चीजों में अव्वल होता है और कई समय वह सभी काम करना चाहता है क्योंकि उसे लगता है कि वह सब करने की क्षमता रखता है परंतु इस स्थिति में यह ध्यान में रखना ज़रूरी है कि आप असल में ज़िन्दगी में क्या प्राप्त करना चाहते होI अपने जुनून को पहचानें, उनको सहेज कर रखे और उन पर काम करें, कभी भी हार न मानें और अगर ज़रुरत पड़े तो वह काम दोबारा करने में मत झिझकियेI फिर भी सबसे महत्वपूर्ण यही होता है की आप अपने जूनून और उसकी हद को पहचानेंI उदहारण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति कहता है की क्रिकेट खेलना उसका जूनून है परंतु वह उससे जल्द ही थक जाता है या वह अपने कौशल को निखारना ही नहीं चाहता तो इसे जूनून नहीं कहतेI जुनून चीजों को हल्के में लेने की अनुमति नहीं देता हैI यह एक व्यक्ति को प्रेरित और सारे दिन उत्साहित रहने में मदद करता हैI एक और उदाहरण लेते हैं, अगर सचिन तेंदुलकर को टेनिस खेलने को कहा गया होता तो वह विफल होते और इतनी प्रसिद्धि नहीं पाते क्योंकि उन्हें पता था की उनका जूनून क्या थाI

उसके बाद, खूब पढ़ेंI भारत में, जब करियर की बात आती है तो विद्यार्थी अदूरदर्शी दृष्टि से देखते और सोचते हैंI उनके पास करियर के विकल्पों के बारे में बहुत कम या नगण्य जानकारी होती है या वे अपने माता-पिता या दोस्तों के दबाव में आकर उनके पसंद का कोर्स चुन लेते हैंI इन परिस्थितियों में ज्ञान पाना बहुत ज़रूरी होता हैI विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में जानें, आगे चलकर उनकी गुंजाइशें क्या होंगी, वह कोर्स प्रदान करते संस्थान कौन से हैं और यह कोर्स करने वाले छात्रों की व्यवसाय में ज़रुरत कितनी हैI उदहारण के तौर पर भारत में अनेक संस्थान करियर काउन्सलिंग सेवाएं प्रदान करते हैं परंतु हमारे देश में एक भी ऐसी विश्वविद्यालय नहीं है जो इस विशेष पाठ्यक्रम की शिक्षा प्रदान करता होI इसलिए, पढ़ने से न केवल आपका ज्ञान बढ़ता है, बल्कि यह आपके अवसरों के क्षितिज का विस्तार भी करता हैI

इसके बाद यह जानिये कि आप किस चीज़ में अच्छे हैंI यह जूनून पहचानने से अलग बात होती हैI एक उदहारण लेते हैं -शुभम कहता है की उसे क्रिकेट खेलना पसंद है और यह उसका जूनून हैI वह जानता है कि वह इसमें अच्छा है पर वह अपनी प्रतिभा निखारना नहीं चाहताI एक दूसरा क्रिकेटर गौरव अच्छा खेलता है पर शुभम जितना माहिर नहीं है पर वो अपनी प्रतिभा निखारने में ध्यान देता हैI इसी तरह वह शुभम जैसी सफलता प्राप्त करने में समर्थ होता हैIइस उदहारण से यह साफ़ है कि यह जानना बहुत ज़रूरी है की आप क्या करना चाहते हो, आप किस चीज़ में महारत हासिल कर सकते हो और किस प्रकार अपनी क्षमता का दोहन कर सकते होI अगर हम एम. एस. धोनी का उदहारण लें तो यह प्रख्यात क्रिकेटर फुटबॉल भी खेलते थे पर वह जानते थे कि वे अपनी क्षमता क्रिकेट में ही दिखा पाएंगेI

मतलब अपने व्यक्तित्व का पता करेंI लोगों का अलग अलग व्यक्तित्व होता है और यदि कभी वे अपने व्यक्तित्व से अलग कार्य करतें हैं तो विफल भी हो सकते हैं इसलिए सभी को अपना व्यक्तित्व पता होना चाहिएI उदहारण के तौर पे एक अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाला व्यक्ति भीड़ भाड़ में असुविधाजनक महसूस करेगाI नतीजतन वह अपना कार्य सही प्रकार से पूरा नहीं कर पायेगा और न ही न्याय कर पायेगाI

आपका करियर विकल्प आपको संतुष्टि प्रदान करने में सक्षम होना चाहिएI एक व्यक्ति व्यवसाय इसलिए करता है ताकि वह अपने काम से संतुष्ट रहे व अपने वातावरण में आराम से रहेI इसीलिए, व्यक्ति को वह करियर चुनना चाहिए जो उसे संतुष्टि प्रदान करेI अगर आप जो करना पसंद करते हो वह महज़ शौक बनकर रह जायेगा और आप उसके सीमित दायरे से नाखुश हैं तो उसका फायदा नहीं हैI अपनी पसंद के क्षेत्र में उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाओ और संतोषजनक अवसरों की तलाश करो जो आपको आगे बढ़ने के अनेक अवसर प्रदान करेंगेI

आखिर में आप फिर भी दुविधा में हों तो एक्सपर्ट्स की मदद लेने से कभी न कतराएंI एक्सपर्ट्स वो लोग होते हैं जो इस छेत्र में अनुभव रखते हैं व अनेक टेस्ट करके आपके जूनून और व्यक्तित्व को ध्यान में रखकर आपको सबसे बेहतर करियर विकल्प का सुझाव देते हैं जिनमें से कई के बारे में बहुत लोगों को पता भी नहीं होता   . 

इसलिए सबसे श्रेष्ठ करियर विकल्प वही होता है जो न केवल जुनून का पालन करने के लिए एक अवसर प्रदान करे बल्कि लोगों को अपनी क्षमता का एहसास और संतुष्टि भी प्रदान करेI अच्छी तरह से शोध किया हुआ करियर विकल्प जो एक व्यक्ति की जरूरतों और अपेक्षाओं को जोड़ता है, वही सबसे बेहतर होता हैI



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