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कुमाऊंनी भाषा में ‘छिलुक’ उपन्यास का विमोचन


उत्तराखंडी संस्कृति और कुमाऊंनी भाषा में ग्रामीण परिवेश पर आधारित ‘छिलुक’ उपन्यास का विमोचन

गणेश कुमावत

 

उत्तराखंडी संस्कृति को उजागर करने के लिए दिल्ली के गढ़वाल भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंडी लेखक पूरन चन्द काण्डपाल के ‘छिलुक’ उपन्यास का विमोजन किया गया। साथ ही इस मौके पर बड़े-बड़े दिग्गजों ने अपनी बात रखी । इन दौरान उत्तराखंड के लेखनों नें उत्तराखंडी भाषा गढ़वाली और कुमाऊंनी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही पूरन चन्द्र काण्डपाल, हेम पंत के साथ-साथ डी. पी. एम. आई के चेयरमैन विनोद बछेती भी मौजूद रहे। साथ ही इस मौके पर उत्तराखंडी लेखकों ने अपनी-अपनी बात रखी। 

 

इस उपन्याश के जरिये समाज में कुरूतियाँ और कमजोरियों के माध्यम से उत्तराखंडी लोगों में सुधार की कोशिश की गई। वही दूसरी ओर एक सरकारी नौकरी पाकर भी गरीब बन जाता है। क्योंकि इसे नशे की लत लग जाती है और वो पूरी तरह से अपने शरीर को खराब कर लेता है। उन नशेड़ी को समझाने के लिए बहुत प्रयास किया जाता है। लेकिन आखिर में वह नहीं समझता। अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेता है।

 

उत्तराखंड का कुमाऊंनी भाषा में इसे लेखक ने ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया है। साथ ही अपने बोली भाषा को बचाने की पहल की है।  साथ ही उत्तराखंडी प्रवासियों ने उत्तराखंडी साहित्य को आगे लाने का प्रयास करने पर भी जोर दिया है।

 

उत्तराखंडी भाषाओं में कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी का बड़ा महत्व बताया है। इन भाषाओं के शब्दों से उत्तराखंडी की संस्कृति के साथ देव भाषा भी इन भाषाओं से मिलती झुलती बताते है।



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