मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018 | 04:39 IST
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आतंकवाद पर पाक का दोहरा रूख़ फिर हुआ उजागर


आतंकी हाफिज सईद को लेकर पाकिस्तान का दोहरा रवैया एक बार फिर दुनिया के सामने आया है। एक ओर जहां पाकिस्तान सबसे खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के संस्थापक और जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद की रिहाई के रास्ते साफ कर रहा है, तो दूसरी ओर दुनिया को गुमराह करने के लिए उसकी राजनीतिक पार्टी "मिल्ली मुस्लिम लीग" को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं दे रहा है।
 
एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत करने को लेकर पाकिस्तान चुनाव आयोग ने गृह मंत्रासय से राय मांगी थी। इस पर गृह मंत्रालय ने कहा कि एमएमएल के तार आतंकियों से जुड़े रहे है, इस लिहाज से उसे राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। इसके बाद पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत करने के आवेदन को खारिज कर दिया।
 
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत और अमेरिका के दबाव के चलते आतंकी हाफिज को राजनीति में न आने देने का दिखावा कर रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तानी सेना स्वयं हाफिज समेत कई आतंकियों को राजनीति में लाने की पैरवी कर रहा है। हाल ही में पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ को बर्खास्त करने के बाद लाहौर की एनए-120 पर उपचुनाव हुए थे। उसमें पाबंदी के बाद भी एमएमएल के प्रत्याशी को निर्दलीय के रूप में चुनाव में उतारा गया। हालांकि चुनाव में एमएमएल के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव के बाद आतंकियों के हौसले काफी बुलंद है, तो वहीं पाकिस्तानी आंतकियों ने होने वाले आगामी आम चुनावों में भी उतरने का ऐलान कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान के रुख से साफ हो गया है कि वह हाफिज सईद की राजनीति में आने की ख्वाहिश को पूरी करना चाहता है।
 
 
 
 


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