शनिवार, 21 अक्टूबर 2017 | 06:48 IST
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डाॅ. मुरली मनोहर जोशी


पहाड़ को पद्म

डाॅ. मुरली मनोहर जोशी ऐसी शख्सियत हैं जो भारतीय राजनीति में ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति, अर्थ और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दूसरी तरफ बसंती बिष्ट को लोक संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का श्रेय जाता है। दोनों प्रतिभाओं को पद्म सम्मान इस सम्मान की गरिमा की दृष्टि से उचित है।

पहाड़ जितने ऊंचे होते हैं उतने ही गहरे भी। यहां का आदमी जीवन में जितना ऊंचा उठता है उसकी सोच-समझ और चिंतन में उतनी ही गहराई भी होती है। देश के जाने-माने राजनेता और वैज्ञानिक डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी का उदाहरण सामने है। इस वर्ष गणतंत्रत दिवस के अवसर पर उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्मविभूषण देने की घोषणा की गई तो इसके खास मायने हैं। वास्तव में डाॅ जोशी भारतीय राजनीति में ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा, अर्थ, धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का प्रतिनिधित्व करने वाली अद्भुत शख्सियत हैं। वे ऐसे स्वप्नदृष्टा हैं जो हमेशा राष्ट्र को उसके गौरवशाली अतीत के साथ स्वर्णिम भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहे। यही वजह है कि वे डाॅ हेडगेवार से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय और प्रोफेसर राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैय्या’ तक संघ परिवार से जुड़े तमाम विचारकों और चिंतकों के स्नेह और प्रशंसा के पात्र रहे।

संघ ही नहीं बल्कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी विचारकों ने भी डाॅक्टर जोशी की प्रतिभा को बखूबी पहचाना। संभवतः यही वजह है कि आपातकाल के दौरान जब जनता पार्टी का गठन हुआ तो डाॅ जोशी को उसमें महासचिव जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई। आपातकाल में जोशी 19 महीने जेल में रहे। सन् 1977 में वे अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। 1980 में भाजपा का गठन हुआ तो यहां भी उनको महामंत्री का दायित्व दिया गया। अपनी नेतृत्व क्षमता से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। अपने कार्यक्रमों से पार्टी में वो जान फूंकी कि लोकसभा में पार्टी के सांसदों की संख्या 144 तक जा पहुंची। पार्टी कार्यकर्ताओं और देशवासियों का हौसला बढ़ाने के लिए अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में उन्होंने न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा निकाली बल्कि 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लालचैक पर राष्ट्रध्वज फहराकर आतंकवादियों को खुली चुनौती भी दी थी।

एक साहसी और कर्मठ राजनेता के गुण उनके भीतर वास्तव में बचपन से ही थे। जब वे महज 24 दिन के थे तब उनके सिर से पिता का साया उठ चुका था। विषम परिस्थितियों के बाजवूद उन्होंने भौतिक विज्ञान में एमएससी और पीएचडी की उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपनी प्रतिभा से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। उनका मार्गदर्शन पाकर कई युवा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर पहुंचे। एक राजनेता के तौर पर डाॅ. जोशी की लोकप्रियता का आकलन करें तो उन्हें अल्मोड़ा, इलाहाबाद, वाराणसी और कानपुर जैसे चार लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने का श्रेय है। किसी भी राजनेता के लिए यह बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। केंद्र में विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री रहते उन्होंने देश की वैज्ञानिक प्रतिभाओं का हौसला बढ़ाया कि हम दूसरे देशों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि अपने भविष्य का मार्ग खुद बनाने में सक्षम हैं।

सन् 1998 में पोखरण पमाणु परीक्षण के दौरान जोशी विज्ञान और तकनीकी मंत्री थे। उन्हीं के मंत्रिकाल में देश में ‘परम’ नामक सुपर कम्प्यूटर का निर्माण हुआ। केंद्र में मानव संसाधन विकास और गृहमंत्री जैसे विभागों का दायित्व भी उन्होंने निभाया। 6-14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार उन्हीं के मानव संधान मंत्री रहते मिला था। डाॅ. जोशी एक ऐसे अद्भुत वैज्ञानिक हैं जिन्हें एक ओजस्वी राजनेता के साथ ही अच्छा अर्थशास्त्री भी माना जाता है। हालांकि वे सिर्फ एक वैज्ञानिक के तौर पर आरामदायक जीवन व्यतीत कर सकते थे। लेकिन राष्ट्र के लिए कुछ करने का जज्बा उनके भीतर ऐसा रहा कि उन्हें कभी चैन से नहीं बैठने दिया। उनका अध्ययन, चिंतन-मनन देश और समाज के लिए उपयोगी साबित हुआ। उन्हें पद्म सम्मान मिलना वास्तव में इस सम्मान की गरिमा के अनुकूल है।

गणतंत्र दिवस पर पहाड़ की एक अन्य प्रतिभा बसंती बिष्ट को भी कला-संस्कृति के क्षेत्र में पद्म सम्मान देने की घोषणा हुई। बसंती को बचपन से ही तमाम संघर्षमय स्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का सिलिसिला जारी रखा। हिमालय के महाकुंभ नंदा राजजात के जागरों के संरक्षण और संवर्धन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्हें पद्म सम्मान वास्तव में उत्तराखण्ड की उस मातृशक्ति का भी सम्मान है जो सदियों से इस हिमालयी क्षेत्र के अस्तित्व की हर तरह से रक्षा करती आ रही है। (दि संडे पोस्ट, अंक 34 2015) दाताराम की फेसबुक वॉल से



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