रविवार, 22 जुलाई 2018 | 06:29 IST
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जेल में लालू का एक और ड्रामा शुरू, खाने के लिए मांग रहे दही-चूड़ा


लालू को जज ने भले ही साढ़े तीन साल की सजा सुनाई हो, लेकिन वे जेल में जिस तरह से रह रहे हैं। उसे देखकर तो बिल्कुल भी नहीं लग रहा है कि उन्हें सजा का कोई गम भी है। तभी तो जज से आये दिन लालू पंगा लेते रहते हैं और किसी न किसी बात को लेकर ज़िद कर बैठते हैं और फिर शुरू हो जाता है उनकी कॉमेडी का दौर। जी हाँ, ठंड का राग अलापने के बाद लालू ने आजकल नया राग अलापना शुरू किया है और वह है, दही चूड़ा खाने का। उसको लेकर वे जज को लगातार गुहार लगा रहे हैं।


आइऐ, आपको बताते हैं कि जज और लालू के बीच दही और चूड़े को लेकर कैसी कॉमेडी हो रही है!


लालू : दही-चूड़ा हम लोग संक्रांत में खाते थे, अब क्या करेंगे सर?


जज : हम यहीं व्यवस्था कर देंगे। कितना दही चाहिए।


लालू : ई विभाग तो हम यादव लोगों का ही है सर, रिहा होकर जाते तो आपको भी बुलवाकर दही-चूड़ा खिलाते।


लालू : सजा के दिन हम एक शब्द नहीं बोले थे, सर। हमनें कहा कि वकील भी हैं। आप बुलाकर तीन की जगह साढ़े तीन वर्ष सजा दे दिए।


जज : हमारे ऊपर भी तो कोई है। हमारी एक सीमा है। कानून के अनुरूप सजा दी गई। हम न तीन वर्ष किए न पांच, बीच का काम किया है।


लालू : अच्छा, तो एक और भी मामलवा है न सर, देख लीजिएगा, उसमें तीन वर्ष ही सजा कीजिएगा। बेल मिल जाएगा। बाकी वाला का फैसला भी जल्दी कर दीजिए सर।


जज : हमने सजा के लिए लिमिट बनाया था। हम जजमेंट में सजा लिखकर नहीं रखे थे। माइंड में तीन कैटेगरी बनाकर रखे थे और सजा सुना दी।


लालू : कोर्ट में आने में धक्का-मुक्की होती है।


जज : बोलिए न कहां खाली कराना है। आपको इतनी सुरक्षा दी गई है। कोर्ट परिसर में तो आपके कार्यकर्ता ही रहते हैं।


जज : आपलोग को ओपन जेल में रखने के लिए अनुशंसा किया हूं। वहां सभी सुविधा है। शौचालय से लेकर कमरा व टीवी तक है। अक्टूबर में हम वहां गए थे। स्थिति खराब हो रही है। आपलोग वहां रहेंगे तो उसकी भी व्यवस्था सुधर जाएगी। फालतू में यहां अपराधियों के साथ रहेंगे।


तो हमनें आपको लालू और जज के बीच हुए कुछ चटपटी बातों से रूबरू करवाया, जिस तरह से लालू जेल में मजे ले रहे हैं। उसे देखकर तो ऐसा लगता है, कि उन्हें न तो जेल की चिंता और न ही सजा की।

 



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