बुधवार, 23 मई 2018 | 08:54 IST
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये किसी व्यक्ति का नहीं!!
होम | उत्तराखंड | जिनकी याद में बन रहा हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र, उस महान आत्मा को जान लीजिए!

जिनकी याद में बन रहा हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र, उस महान आत्मा को जान लीजिए!


नवीन पाण्डेय

 

देहरादून विश्वविद्यालय में 9 फरवरी को डॉ. नित्यानन्द हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र का शिलान्यास एवं भूमि पूजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत होंगे, जबकि अति विशिष्ठ अतिथि केन्द्रीय राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह। इसके अलावा उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद और पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी, सांसद एवं पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और देहरादून के मेयर विनोद चमोली भी मौजूद रहेंगे। देहरादून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सी एस नौटियाल भी इस मौके पर उपस्थित रहेंगे।

 

डॉ. नित्यानन्द हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र, उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा का एक बड़ा केन्द्र होगा, ये तय है। यह संस्थान आने वाले सालों में हिमालय पर्वत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शोध का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। लेकिन इतने बड़े संस्थान को जिन डॉ. नित्यानन्द के नाम पर रखा गया है, वो आखिर थे कौन? उत्तराखण्ड की आधी सरकार, कई पूर्व सीएम और केन्द्रीय मंत्री जिस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने जा रहे हैं, आखिर डॉ. नित्यानन्द का उनसे क्या नाता है , ये जानना भी ज़रूरी है।

 

आमतौर पर लोग डॉ. नित्यानन्द को उत्तराखण्ड राज्य के पहले सीएम नित्यानन्द स्वामी समझने की भूल कर लेते हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि डॉ. नित्यानन्द ऐसी शख्सियत थे, जो भले ही उत्तराखण्ड मूल के न रहे हों, लेकिन उन्होंने यहां के लिए बहुत बड़े काम किए। हमेशा प्रचार प्रसार से दूर रहकर उत्तराखण्ड के ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले संघ के अद्भुत सिपाही थे डॉ. नित्यानन्द।

 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रदेश संघ चालक रहे  डाक्टर  नित्यानंद देहरादून के दयानंद बृजेन्द्र स्वरूप यानी डीबीएस  कालेज में भूगोल के विभागाध्यक्ष रहे ! उनका शोध भी गढ़वाल पर ही था ! उत्तरकाशी भूकंप में उनके दो दशक तक चलाये पुनर्वास कार्यों से स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल लंबे समय तक जुड़े थे ! सियासी तौर पर देखें तो माना जाता है कि बीजेपी ने पहली बार उनकी जबरदस्त सिफारिश के कारण ही अलग उत्तरांचल राज्य की अवधारणा स्वीकार की थी ! जीवन भर बिना प्रचार -प्रसिद्धि सेवा व संगठन कार्यों में लगे रहे डाक्टर नित्यानन्द ने जनसमर्थन जुटाने के लिए “उत्तरांचल राज्य क्यों ?’ पुस्तक भी लिखी थी !

 

20 फरवरी 1926 को आगरा में जन्मे डॉक्टर नित्यानन्द 1946 में वहीं से पीएचडी करने के बाद देहरादून में भूगोल के प्राध्यापक बनकर आ गए। उन्होंने 1988 में तत्कालीन वरिष्ठ संघ प्रचारक भाऊराव देवरस की प्रेरणा से उत्तराखण्ड उत्थान परिषद का गठन किया, जो आज गांव गांव में फैल चुका है। डाक्टर नित्यानंद ने रिटायरमेंट के बाद अपनी जन्मभूमि आगरा या कर्मभूमि देहरादून में बसने की बजाय देश के इस सीमान्त प्रदेश के उजड़ रहे गांवों को बचाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने सीमान्त उत्तरकाशी के मनेरी गांव में कुटिया बना कर पलायन के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया, जो 2016 में 90 वर्ष की आयु में उनके निधन तक जारी रहा। ऐसी महान आत्मा को उत्तराखण्ड का कण-कण नमन करता है।



© 2016 All Rights Reserved.
Follow US On: