शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:51 IST
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तेज़ी से अर्थराइटिस का शिकार हो रही हैं भारतीय महिलाएं


बदलते वक्त से साथ भारतीय लोगों में अर्थराइटिस तेजी से बढ़ती जा रही है, जिसे आमतौर पर गठिया रोग भी कहा जाता है। भारत में करीब 18 करोड़ से भी ज़्यादा लोग अर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित हैं, जिनमें महिलाओं की सबसे ज़्यादा संख्या बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।

डॉक्टरों की मानें तो, अर्थराइटिस के मामले मधुमेह, एड्स और कैंसर जैसे अन्य रोगों की तुलना में कई अधिक है। वहीं, हर सालल भारत की करीब 14 फीसदी आबादी जोड़ों के दर्द से परेशान होकर डॉक्टर का रुख करती है। तेज़ी से बढ़ती समस्या  को लेकर माना जा रहा है कि भारत में ऑस्टियो अर्थराइटिस के मामलों की संख्या साल 2025 तक छह करोड़ का आंकड़ा पार करेगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक अर्थराइटिस समस्याय पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सबसे ज्यापदा पाई गई है। विश्लेषण में पाया गया है कि इसका मुख्य कारण उत्तरी जोन की तुलना में पूर्वी जोन में अर्थराइटिस के मरीजों में ईएसआर और सीआरपी स्तर का उच्च, जोड़ों में सूजन और यूरिक एसिड का स्तर अधिक होना है।

यूरिक एसिड का असामान्य स्तर गठिया को दर्शाता है। हड्डी और जोड़ों के रोग से छुटकारे के लिए आमतौर पर एक्स-रे, सीटी-स्कैन, एमआरआई और डेक्सा स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है और स्क्रीनिंग-मॉनिटरिंग का परीक्षण अन्य प्रयोगशाला काम किया जाता है। इसके अलावा भारतीय आबादी में गठिया और रूमेटोइड अर्थराइटिस भी आमतौर पर पाए जाते हैं। इसकी संभावना उम्र बढऩे के साथ बढ़ती है। महिलाओं में तीन-चार गुना अधिक पाए जाने वाली इस समस्या की शुरुआत अक्सर 35-55 आयुवर्ग और 50 वर्ष या अधिक उम्र के में पुरुषों में गठिया के आमरुप इन्फ्लामेटरी अर्थराइटिस की सम्भावना तीन-चार गुना अधिक होती है।



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