शनिवार, 16 दिसम्बर 2017 | 06:29 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
विजय दिवस के मौके पर शहीदों को दी श्रद्धांजली।           अध्यक्ष बनते ही बीजेपी पार्टी पर तगड़े तंज: राहुल गांधी           राहुल गांधी बने कांग्रेस पार्टी के नये अध्यक्ष।          कोयला घोटाले में मधु कोड़ा को 3 साल की सजा, 25 लाख का जुर्माना           तीन तलाक दिया तो 3 साल की सजा होगी ।          केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ट्रिपल तलाक बिल को दी मंजूरी          राहुल गांधी की ताजपोशी 16 दिसंबर को होगी।          कांग्रेस पार्टी के नये अध्यक्ष बनने जा रहे है राहुल गांधी          हिमाचल प्रदेश व गुजरात विधानसभा चुनावों के फैसले 18 दिसंबर को होंगे जारी।          राज्यसभा में विपक्षी दलों का हंगामा।          लोकसभा 18 दिसंबर तक के लिए स्थगित ।          18 दिसंबर को होगा फैसला: भाजपा या कांग्रेस         
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उत्तराखंड में खेती की बढ़ोतरी, हो रही है मंडुवे की मांग


पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करना वेसे ही बड़ा मुश्किल काम है लेकिन वहाँ की जनता रोजगार से मजबूर होकर खेती की ओर रुझान कर रही है। वहीं दूसरी ओर बरसाते के भरोसे जीने वाले किसाने के लिए, पहाड़ों में जीवन काटना तो अग्नि परीक्षा के बराबर है।  जानकारी के मुताबिक सीमांत उत्तरकाशी जिले में पारंपरिक फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। तीन वर्ष पहले की तुलना में मंडुवे का उत्पादन तो दोगुना हो गया। इसे और बढ़ाने के लिए कृषि विभाग ने नया लक्ष्य निर्धारित किया है। ताकि आने वाले वर्ष में मडुंवा सहित अन्य फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हो। 

उत्तराखंड में जनता जैसे-जैसे जागरूक होती जा रही है वैसे-वैसे रोजगार खुद-ब-खुद बना रही है। कृषि के क्षेत्र में धीरे-धीरे मडुंवा, झंगोरा, चौलाई आदि पारंपरिक फसलों को अच्छा बाजार मिलने लगा है। मांग बढ़ने के कारण इन फसलों के प्रति ग्रामीणों का रुझान भी बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में जहां जिले में पारंपरिक फसलों का उत्पादन करने वाले काश्तकारों संख्या जहां आठ हजार थी, वहीं वर्ष 2017-18 में यह संख्या 15 हजार से अधिक हो गई। उम्मीद की जा रही है कि इसमें और इजाफा होगा।  साथ ही मंडुवा, रामदाना व झंगोरा की फसल पर सरकार की ओर से बोनस दिए जाने की योजना की शुरुआत कृषि विभाग ने कर दी है। इसके लिए किसानों का पंजीकरण भी शुरू हो चुका है। अब तक छह हजार किसान इन फसलों को उगाने के लिए पंजीकरण भी करा चुके हैं। इस योजना के तहत इन फसलों पर प्रति क्विंटल 300 रुपये बोनस दिया जाना है। उत्तरकाशी में वर्ष 2017-18 में मंडुवा व अन्य पारंपरिक फसलों का अच्छा उत्पादन हुआ। इसके पीछे दो कारण निकलकर सामने आए हैं। एक तो किसानों का पारंपरिक खेती के प्रति रुझान बढ़ना और दूसरा बरसात में सामान्य बारिश का होना।   



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