शनिवार, 18 नवंबर 2017 | 11:39 IST
दूसरों की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है।
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अपना धर्म(मानवता) क्या होना चाहिए...


मानवता की कदर करना ही हमारा धर्म होता है लेकिन ऐसा करने में लोग हिचकिचाते हैं। इसलिए ही मानवता अपने रास्ते से भटकती हुई नजर आती है। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि इस मानवता को कैसे निभाया जाए...जी इसको निभाने में कोई ज्यादा महनत की बात नही सिर्फ समझने की जरुरत है। वो इस प्रकार एक दूसरे का सम्मान करना बडो की आज्ञा का पालन करना और अपने धर्म, कर्म के साथ चलना जीवन में किसी की निंदा या बुराई मत करो और यदि आप किसी की सहायता कर सकते हो तो करे यदि नही कर सकते हो तो किसी को दुख भी ना पहुचाएं। जिससे किसी की आंत्माओं को ठेस पहुचें। जीवन एक साईकिल है जिसको चलाने के लिए बैलेंस बनाना होगा और आगे ही बढते रहना होगा जिससे आप सवारी सही कर सकें। अंत में एक और ऐसा रास्ता है जिससे आप बच भी सकते है और नही भी लेकिन अपने जीवन को सही और सहज रखना चाहते हो तो सात बातों को ध्यान में रखना जरुरी होगा। बिना महनत के धन,बिना विवेक के सुख, बिना सिद्धांतों के राजनीति, बिना चरित्र के ज्ञान, बिना नैतिकता के व्यापार, बिना मानवता के विज्ञान, और बिना त्याग के पूजा। इन सब बातों का ज्ञान होना और अमल करना हमारी मानवता है...... 



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