सोमवार, 23 अप्रैल 2018 | 07:29 IST
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महान व्यक्तित्व स्वामी विवेकानंद जी के महान विचार


गणेश कुमावत

भारत का उदय और उजागर करने वाले महान व्यक्तित्व स्वामी विवेकानंद जी के महान चरित्र को अपने जीवन में जरूर उतारना चाहिए।

आज के नवयुवक जो भारतीय संस्कृति समझने की भूल कर रहे है। आज के शिक्षित भारतीय युवक अपने पिता, अपने पूर्वजों, अपने इतिहास एवं अपनी संस्कृति से घृणा करने लगते है। यहाँ तक की पवित्र वेदों,  पवित्र गीता को थोथा एवं झूठा समझते है। वही दूसरी ओर अपने अतीत, अपनी संस्कृति पर गर्व करने के बदले वह उससे ही घृणा करने लगते है और विदेशी संस्कृति को अपनाकर,  अपने आप पर गर्व महसूस करते है।

यह जानकर बड़ा अपसोस होता है कि जिस देश में गर्व से कहा जाता है कि महान व्यक्तित्व वाले महापुरुषों ने भारत माँ की गोद में जन्म लिया। दूसरी ओर हम भारत माता के पुत्र होते हुए भी स्वतन्त्र रूप से कुछ भी करने में असमर्थ रहते हैं।

विदेशी संस्कृति को अपनाकर, नौकरियों के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। बी.ए.,  एम.ए., बी.एस.सी,  इंजिनियरिंग व मास्टर डिग्री तक प्राप्त करने के बाद भी युवक स्वतन्त्र रूप से अपनी आजीविका नहीं कमा पा रहा है।

आज के युग में कुछ परीक्षायें पास कर लेना या धुआंधार व्याख्यान देने की शक्ति प्राप्त कर लेना ही शिक्षित नहीं होती जबकि शिक्षा वह है जिससे लोगों के जीवन को सफल बनाया जा सके। पोथियाँ पढ़ लेना शिक्षा नहीं है। न ही अनेक प्रकार का ज्ञान प्राप्त करने का नाम शिक्षा है। शिक्षा तो वह है जिसकी सहायता से इच्छा शक्ति का वेग और स्फूर्ति अपने वश में हो जाये और जिससे अपने जीवन के उद्देश्य पूर्ण हो सकें।

 

आज के नवयुवकों को ऐसी शिक्षा चाहिए कि जो मनुष्य बुद्धि एवं दृष्टिकोण को विकसित कर सके। जो व्यक्ति में न्यायप्रियता, सत्यप्रियता एवं कार्य दक्षता को बढ़ा सके।

हमें ऐसी शिक्षा की जरूरत है जिससे चरित्र निर्माण हो, मानसिक शक्ति बढ़े,  बुद्धि विकसित हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा होना सीखे।

हमें ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जिससे की व्यक्ति अपनी आर्थिक जरूरत पूरी कर सके । ऐसी शिक्षा जो दूसरों के बारे में अच्छा सोच सके। जिससे अपने परिवार के साथ-साथ समाज व देश का गौरवान्वित कर सके।

अच्छे आदर्श और अच्छे भावों को काम में लाकर लाभ उठाना चाहिए, जिनसे वास्तविक मनुष्यत्व चरित्र और जीवन बन सके।



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