बुधवार, 23 मई 2018 | 08:50 IST
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जस्टिस जोसेफ से क्या बदला ले रही है मोदी सरकार?


सुप्रीम कोर्ट पर उठते सवाल अभ थमें भई नहीं थे..कि...एक और न.या विवाद खड़ा हो गया है और ये विवदा तब बढ़ा..जब  उत्त राखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिएस केएम जोसेफ की सुपिरीम  कोर्ट में नियुक्ति रोक दी गई जिसके बाद कांग्रेस और बीजपी आमने सांने आ गई है...और कांगिरेस जस्टिखस केएम जोसेफ के परमो शन रोके जाने का जिम्मेदार बीजेपी को बताते दुए कह रही है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के रूप में उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं देने के मामले को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर 'बदले की राजनीति'  करार दिया है  कागंर्स बीजेपी को इसलिये घेर रही है  क्योकि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा के नाम को सरकार ने स्वीकृति दे दी है, लेकिन जोसेफ नाम को मंजूरी नहीं दी गई .और वो इ,सके पीछे राजनीति कारण ये बता रही है कि.  दें मार्च, 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया था.लेकिन कुछ दिनों बाद ही जस्टिस जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे निरस्त कर दिया था  और बीजेपी को सब से बड़ी झटका लगा था  जिसेका कारण बीजेपी की जमकर किरकिरी हुई थी.  इ सलिये इसे कांग्रेस ने बदले की राजनीति बता रही है तो वहीं..इसमुद्दे पर बीजेपी सफआ दी है कि  देश भर में उच्च न्यायालयों में सेवारत चीफ जस्टिस और जजों की वरिष्ठता सूची में जस्टिस जोसफ काफी नीचे आते हैं..यही कीरण है..की मोदी सरकार ने इस पर अपनी स्वकृति नही दी है  लेकिन जो तर्क बीदेपी ती तरफ से दिया गया है कही से कही तक लागू नहीं होता है  केंद्र में काबिज सरकारें अपनी मर्ज़ी से इस कसौटी पर अपना खेल कर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हित साधती रहती हैं. इसी आपाधापी और अपारदर्शिता की वजह से कई जजों ने इस्तीफा भी दिया...जिसकी वजह से इअब सवाल उठने लगे है क्या वाकई में जस्टिस जोसेफ के साथ गलत हुआ है बहरहाल अब इस ममाले ने राजनैतिक रंग ले लिया है..जिसका वजह से कई सवाल उठने लगे ह  इससे पहले भई ये सवाल खुद जज भी उठा चुके है कि न्यापालिका पर राजनीति हावी होती जा रही है

 



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